आर्थिक पत्रकारिता - Economic Journalism
आर्थिक पत्रकारिता - Economic Journalism
वर्तमान में सारा विश्व जिससे सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहा है उसका नाम है अर्थव्यवस्था और यही कारण है कि आज की पत्रकारिता में आर्थिक पत्रकारिता का महत्व बहुत अधिक बढ़ गया है। ग्लोबल इकॉनामी के इस दौर में हर आदमी वित्त, वाणिज्य, व्यापार, बाजार और बैकिंग आदि की थोड़ी बहुत जानकारी जरूर रखना चाहता है। मुद्रा स्फीति शेयर बाजार, म्युचुअल फंड कमोडिटी बाजार, उपभोक्ता उत्पाद आदि शब्द आज जिन्दगी में जितने जरूरी हो गए हैं उतनी ही जरूरी हो गई हैं आर्थिक पत्रकारिता अर्थ-व्यापार वाणिज्य बैकिंग आदि से जुड़ी आर्थिक पत्रकारिता के इतिहास पर नजर डालें तो यह जानना रोचक है कि भारत में पत्रकारिता का विकास और आर्थिक पत्रकारिता दोनों ही साथ-साथ शुरू हुए हैं। 29 जनवरी 1780 को कलकता से प्रकाशित पहले भारतीय अखबार का पूरा नाम ही कलकत्ता जनरल एडवरटाइजर (Calcutta General Advertiser था। इसके मालिक, प्रकाशक, सम्पादक जेम्स ऑगस्टस हिकी ने इसके बारे में लिखा था- यह राजनैतिक और व्यापारिक साप्ताहिक सभी पार्टियों के लिए खुला है, लेकिन यह किसी से प्रभावित नहीं है। जैसा कि इसके नाम से ही स्पष्ट होता है कि यह अखबार अपने व्यावसायिक दृष्टिकोण को लेकर बेहद स्पष्ट था। दरअसल इस अखबार के प्रकाशन के पीछे मूल उद्देश्य भी अंग्रेजों के व्यावसायिक हितों को मजबूती देना था। कलकत्ता में ही अंग्रेजों ने अपना प्रारम्भिक व्यवसाय शुरू किया था उद्योगों और बैंकों की स्थापना वहीं हुई और वहीं से देश में आर्थिक पत्रकारिता की नींव भी रखी गई।
देश के पहले आर्थिक पत्र 'द कैपिटल' का प्रकाशन भी 1868 में कलकत्ता से ही हुआ। यह पत्र एसोसिएटेड चैम्बर्स आफ कार्मस एण्ड इण्डस्ट्री से जुड़ा था। 1910 में कलकत्ता से ही दूसरे आर्थिक अखबार 'कामर्स का प्रकाशन प्रारम्भ हुआ। बाद में यह मुम्बई से प्रकाशित होने लगा। कामर्स में शेयर बाजार, सर्राफ उद्योग, मण्डी और बैंकों से सम्बन्धित सूचनाएं खबरों के रूप में छपती थी।
आर्थिक पत्रकारिता के क्षेत्र में पहला भारतीय पत्र था। इण्डियन फाइनेंस 1928 में चेन्नई से प्रकाशित यह पत्र भारतीय व्यापारियों के हितों से जुड़ा था। 1943 में बिडला घराने ने 'द ईर्स्टन इकनॉमिस्ट का प्रकाशन शुरू किया। दूसरे विश्व युद्ध के इस दौर में राजनीति और अर्थ में बड़ा निकट सम्बन्ध स्थापित हो गया था। इस कारण द ईस्टर्न इकनॉमिस्ट बहुत जल्द लोकप्रिय हो गया। इसी दौर में द इकोनामिक वीकली आफ बाम्बे नामक साप्ताहिक ने भी व्यापार और आर्थिक मुद्दों पर टिप्पणी कर अपनी लोकप्रियता बढ़ानी शुरू कर दी थी।
भारतीय आर्थिक पत्रकारिता में मील का पत्थर आजादी के बाद तब स्थापित हुआ जब 1961 में टाइम्स ऑफ इण्डिया समूह ने 'द इकोनामिक टाइम्स का प्रकाशन शुरू किया। इसी वर्ष इण्डियन एक्सप्रेस समूह ने भी फाइनेंशियल एक्सप्रेस का प्रकाशन शुरू कर दिया।
वर्तमान में देश में सभी प्रमुख भाषाओं में आर्थिक अखबार निकल रहे हैं। 150 से अधिक राष्ट्रीय स्तर की बिजनेस पत्रिकाएं प्रकाशित हो रही हैं। बैंकिंग, शेयर बाजार, उद्योग, कम्प्यूटर, हाउसिंग ऑटोमोबाइल, मोबाइल, फोटोग्राफी, रिटेल मार्केटिंग आदि अनेक विषयों पर अलग-अलग पत्र पत्रिकायें उपलब्ध हैं। सभी टीवी न्यूज चैनल आर्थिक समाचारों को प्रमुखता देते हैं तो एक दर्जन से अधिक बिजनेस न्यूज चैनल आम आदमी की आर्थिक जिज्ञासाओं का समाधान करने में जुटे हैं। रेडियो के लिए भी अब बिजनेस न्यूज एक अहम चीज बन गया है। इंटरनेट ने आर्थिक पत्रकारिता को नए क्षितिज दिये हैं। आर्थिक पत्रकारिता अब सिर्फ उद्योग-व्यापार से जुड़े लोगों की जरूरत न रह कर आम आदमी की जरूरत बन चुकी है। आज आर्थिक पत्रकारिता, पत्रकारिता के व्यवसाय में सबसे बड़ा बाजार बन चुकी है और इसी वजह से आर्थिक पत्रकारिता अब एक बड़ी चुनौती भी हैं, तो पत्रकारों का सम्मान बढ़ाने वाली एक विशेषज्ञ कला भी।
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