आजादी से पूर्व विदेशों में हिन्दी पत्रकारिता - Hindi Journalism Abroad before Independence

आजादी से पूर्व विदेशों में हिन्दी पत्रकारिता - Hindi Journalism Abroad before Independence


भारत में हिन्दी पत्रकारिता जिस प्रकार विभिन्न चरणों में विकसित हुई, उसी तरह विदेशों में भी प्रवासी भारतीयों द्वारा इसके विकास के लिए महत्वपूर्ण कार्य किए।


विदेशों में हिन्दी पत्रकारिता का जन्म सन् 1883 में माना जाता है। कहा जाता है कि लन्दन से हिन्दुस्तान' नामक त्रैमासिक पत्र प्रकाशन प्रारम्भ हुआ था। इसके संस्थापक राजा रामपाल सिंह थे। यह त्रिभाषी रूप में प्रकाशित होता था और इसमें हिन्दी के साथ उर्दू तथा अंग्रेजी का अंश भी रहता था। दो वर्ष तक वहां से प्रकाशित होने के बाद 1885 में यह पत्र कालाकांकर (अवघ) से प्रकाशित होना शुरू हुआ। 1887 में इसका स्वरूप दैनिक हो गया। अमृतलाल चक्रवर्ती, शशिभूषण चक्रवर्ती, प्रतापनारायण मिश्र, बालमुकुन्द गुप्त, गोपाल राम गहमरी, लालबहादुर गुलाब चन्द चौबे, शीतल प्रसाद उपाध्याय, रामप्रसाद सिंह तथा शिवनारायण सिंह इसके सम्पादक रहे।


1857 के गदर का प्रभाव आप्रवासी भारतीयों पर भी पड़ा ओरोगन राज्य के पोर्टलैंड में भारतीयों ने हिन्दी एसोसिएशन नाम की एक संस्था बनाई। प्रसिद्ध क्रान्तिकारी लाला हरदयाल ने इस संकल्प की पहल की। 1857 की क्रांति को जीवित रखने के लिए अमेरीका से विभिन्न भारतीय भाषाओं का एक अखबार 'गदर' नाम से 1 नवम्बर 1913 में प्रकाशित हुआ। इस पत्र ने ब्रिटिश राज्य के शोषण का कच्चा चिट्ठा खोलते हुए सशस्त्र क्रान्ति का आह्वान किया। 'गदर' के प्रकाशन से पूर्व अमेरीका से ही एक छात्र तारकनाथ दास ने 1908 में 'फ्री हिन्दुस्तान', 1909 में गुरुदत्त कुमार ने पंजाबी में स्वदेश सेवक नामक पत्रों का प्रकाशन किया। कालान्तर में लन्दन से शान्ता सोनी द्वारा सम्पादित नवीन' उल्लेखनीय है।


एस. एन. गौरीसरीया के सम्पादन में 'सन्मार्ग का प्रकाशन हुआ। पेंडर्स ने 'केसरी', सुकुमार मजूमदार ने प्रवासी जगदीश कौशल ने 'अमरदीप' दैनिक आज के लन्दन स्थित प्रतिनिधि धर्मेन्द्र गौतम ने 'प्रवासिनी का प्रकाशन किया। 1972 में सोवियत संघ' नाम से एक हिन्दी पत्रिका मास्को से प्रकाशित हुई।


मारीशस से प्रकाशित पत्र पत्रिकाओं में 'हिन्दुस्तानी', 'जनता', 'कांग्रेस', "हिन्दू धर्म', 'दर्पण', 'इंडियन टाइम्स', 'अनुराग', 'महाशिवरात्रि', 'आभा' आदि कई पत्र प्रमुख रहे हैं। मारीशस से प्रकाशित हिन्दी का पहला पत्र 'हिन्दुस्तानी था। इसका प्रकाशन 1909 में हुआ इसके प्रथम सम्पादक मणिलाल थे। सूरीनाम से प्रकाशित होने वाले हिन्दी पत्रों में दैनिक कोहिनूर, साप्ताहिक प्रकाश, 'विकास', 'शान्तिदूत' प्रमुख हैं।


नेटाल (दक्षिण आफ्रिका) से 1910 में 'अमृतसिन्धु मासिक भवानी दयाल के सम्पादन में प्रकाशित हुआ। डरबन शहर से 1916 में धर्मवीर साप्ताहिक का प्रकाशन हुआ डरबन से ही 'हिन्दी' नामक मासिक पत्रिका प्रकाशित हुई। 1950 में त्रिनिनाद से शिवप्रसाद के सम्पादन में 'आर्यसंदेश का प्रकाशन हुआ। 1904 में डरबन से ही इंडियन ओपीनियन मदनजीत के सम्पादन में प्रकाशित हुआ। यह पत्र भारत के राष्ट्रीय आन्दोलन के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करता रहा। 


बर्मा से 'प्रखर प्रकाश', 'जागृति', 'ब्रहम भूमि का प्रकाशन हुआ था। अविभाजित भारत में ढाका से 1871 में 'विहार बंधु' 1880 में धर्मनीति, 1888 में विद्या धर्म दीपिका, 1904 में नारद', 1905 में नागरी हितैषी', 1911 में 'तत्वदर्शन, 1939 में 'मेल मिलाप प्रमुख रहे हैं। इसी क्रम में जैसोर से अमृत बाजार पत्रिका के संस्करण का प्रकाशन उल्लेखनीय है।


अविभाजित भारत में लाहौर किसी समय हिन्दी, संस्कृत और पत्रकारिता का गढ़ रहा, यहां से 'भारतीय', 'विश्वबंधु', 'आर्य वन्धु', 'आर्य', 'आर्य जगत', 'शांति', सुधकर', 'क्षत्रिय', 'मित्र विलास, बूढी दर्पण', 'आकाशवाणी' आदि पत्र प्रकाशित हुए। 1914 में श्री सन्तराम के सम्पादन में 'आर्यप्रभा का प्रकाशन हुआ। 1914 में ही लाहौर से एक पत्रिका श्री सन्तराम के सम्पादन में 'उषा का प्रकाशन हुआ। 1927 में 'हिन्दी मिलाप' का प्रकाशन शुरू हुआ। 23 सितम्बर 1949 में 'मिलाप' पुन: जालंधर से शुरू हुआ।


इनके अलावा आज भी कई लोग विदेशों में रह कर हिन्दी पत्रों का प्रकाशन कर रहे हैं।