उन्नीसवीं सदी में हिंदी पत्रकारिता - Hindi Journalism in the Nineteenth Century
उन्नीसवीं सदी में हिंदी पत्रकारिता - Hindi Journalism in the Nineteenth Century
भारत के इतिहास में 19वीं सदी का स्थाई महत्व है। यह सदी आधुनिक भारत की नींव कही जा सकती है। बंगाल को छोड़कर पूरे भारत में नवजागरण इसी सदी में प्रारंभ हुआ।
बंगाल में नवजागरण और आधुनिक युग का आरंभ 1775 से माना जाता है। इसी समय पलासी का युद्ध भी हुआ था और इस युद्ध में बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला की पराजय के बाद अंग्रेजों का आधिपत्य हो गया था लेकिन बंगाल में आई इस चेतना का विकास संपूर्ण भारत में नहीं हो पाया था। बंगाल को छोड़कर भारत के अन्य हिस्सों में नवजागरण और स्वातंत्रत्य चेतना का विकास 19 वीं सदी में ही हुआ। रेल, तार डाक, शिक्षा, प्रेस और समाचार पत्रों की शुरुआत इसी सदी में हुई।
प्रेस और पत्रकारिता से एक ओर जहां विचार स्वातंत्र्य की नींव पड़ी वहीं आधुनिक व्यवस्थाओं और आधुनिक शिक्षा की व्यवस्था में जनजागृति आई। उपनिवेश विरोधी चेतना का विकास भी हुआ। सन् 1857 के बाद पूरे भारत पर अंग्रेजों का शासन हो गया और भारत ईस्ट इंडिया कंपनी के हाथों से निकलकर विक्टोरिया के हाथों में आ गया। परिणाम स्वरूप दमनकारी नीतियों में इजाफा हुआ और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नई तरह के खतरों में पड़ गई।
उपनिवेशवाद से जहां भारत आर्थिक रूप से कमजोर हुआ वहीं दूसरी तरफ सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनैतिक दृष्टि से प्रगति की ओर अग्रसर भी हुआ।
19 वीं सदी में भारत में पत्रकारिता जातीय चेतना और उपनिवेश विरोधी चेतना का पर्याय बन गई। पत्रकारिता की ताकत से अंग्रेज परिचित थे इसीलिए सरकार और सरकारी अधिकारियों की आलोचना करने वाले पत्रों पर अंकुश लगाने के लिए उन्होंने कई कड़े नियम बनाए। लार्ड वेलेंजिली के समय पहला प्रेस संबंधी कानून बनाया गया जिसमें एक शर्त यह भी थी कि सरकारी अधिकारी के निरीक्षण के बिना कोई भी पत्र प्रकाशित नहीं किया जाएगा। इस प्रेस एक्ट का उद्देश्य साफ था। अंग्रेज भारतीयों को अंधेरे में रखना चाहते थे। वेलेजली के बाद आए। लार्ड हेस्टिंग्स ने प्रेस एक्ट में कुछ संशोधन किया पर नियम फिर भी कड़े थे। हेस्टिंग्स के बाद एडम ने कमान अपने हाथ में ली, वह और भी कठोर था। 14 मार्च 1823 को उसने नए प्रेस कानून लागू किए जिनके मुताबिक कोई भी व्यक्ति बिना लाइसेंस के कोई पत्र नहीं निकाल सकता था। इस प्रेस एक्ट के विरोध में राजा राममोहन राय ने एक याचिका दायर की प्रेस एक्ट के खिलाफ यह किसी भारतीय का पहला विरोध था और इसके कारण 4 अप्रैल 1823 को उन्हें अपना मिरातुल अखबार बंद कर देना पड़ा। लार्ड विलियम बैंटिंग के काल में आए चार्ल्स मैटकाफ ने भारतीय पत्रकारिता की आजादी के लिए काफी सक्रियता दिखाई। मैटेकाफ के प्रयासों से भारतीय समाचार पत्रों पर लगी सभी पाबंदिया हटा दी गई। हालांकि 1857 में प्रथम स्वतंत्रता संग्राम बाद फिर प्रेस संबंधी कानून और कड़े हो गए।
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