सामाजिक शोध में समस्या निर्धारण का महत्व - Importance of Problem Solving in Social Research

सामाजिक शोध में समस्या निर्धारण का महत्व - Importance of Problem Solving in Social Research


सामाजिक शोध में समस्या निर्धारण का विशिष्ट महत्व होता है। जहोदा और कुक ने इसके महत्व को इस प्रकार से वर्णित करने का प्रयास किया है, 


"वैज्ञानिक खोज एक ऐसा कार्य है जो समस्याओं के समाधान की ओर परिचालित होता है। "


इसी प्रकार कोहेन और नागेल ने भी समस्या के महत्व को सामाजिक शोध के क्षेत्र में महत्वपूर्ण मान हुए कहा है,


"यह विचार पूर्णतया स्पष्ट है कि केवल तथ्यों के अध्ययन से ही यथार्थ का पता लगाया जाना चाहिए क्योंकि जब तक व्यावहारिक अथवा सैद्धान्तिक परिस्थिति के अंदर किसी परेशानी का अनुभव नहीं किया जा सकता तब तक कोई भी तलाश प्रारम्भ नहीं हो सकती। परेशानी अथवा समस्या ही तथ्यों में किसी-न-किसी ऐसी व्यवस्था को निर्देशित करती है जिसके संदर्भ में उस कठिनाई को दूर किया जाता है।


उक्त सभी विचारों के आधार पर यह स्पष्ट तौर पर कहा जा सकता है कि शोध का पहला चरण ही समस्या के निरूपण पर आधारित होता है। समस्या के निरूपण के बिना शोध के अस्तित्व की कल्पना भी नहीं जा सकती।