बुद्धि परीक्षण - Intelligence Test - बुद्धि लब्धि
बुद्धि परीक्षण (Intelligence Test)
परीक्षण वे उपकरण है जो व्यक्ति के विभिन्न गुणों का मापन करते हैं। परीक्षण से तात्पर्य किसी व्यक्ति को ऐसी परिस्थितियों में रखने से है जो उसके वास्तविक गुणों को प्रकट कर दे। जैसे बुद्धि मापने के लिए बुद्धि परीक्षण, रूचि मापने के लिए परीक्षण, व्यक्तित्व के लिये व्यक्तित्व परीक्षण तथा अभिक्षमता मापने के लिए अभिक्षमता परीक्षणों का प्रयोग किया जाता है। -
विभिन्न मनोवैज्ञानिकों ने बुद्धि को जिस रूप में देखा व समझा उसी रूप में उसको परिभाषित कर दिया। "बुद्धि" क्या है ? यह एक ऐसा प्रश्न है जिस पर मनोवैज्ञानिकों में मतभेद रहा है। स्टर्न बर्ट तथा क्रूज बुद्धि को समायोजन ने करने की योग्यता के रूप में परिभाषित किया कुछ मनोवैज्ञानिकों ने बुद्धि को सीखने की योग्यता के रूप में समझा तथा कुछ ने बुद्धि को अमूर्त चिन्तन की क्षमता के रूप में जाना ।
बुद्धि मापन की आवश्यकता
वैयक्तिक भिन्नता के फलस्वरूप बुद्धि मापन की
आवश्यकता से अनुभव किया गया। बुद्धि परीक्षण का वर्तमान दौर बीसवीं शताब्दी के
प्रथम दशक में प्रारम्भ हुआ था। सन् 1905 में बिने ने अपने सहयोगी साइमन के साथ मिलकर
आधुनिक प्रकार का सबसे पहला सफल बुद्धि परीक्षण किया था। बुद्धि मापन के ऐतिहासिक
विकासक्रम को तीन काल खण्डों में बाँटा जा सकता है बिने पूर्वकाल, बिने काल - तथा बिने उत्तर काल । -
बुद्धि मापन की तकनीकें
बुद्धि परीक्षण के परिणाम अंकों के रूप में
प्राप्त होते हैं परन्तु केवल इन अंकों के आधार पर बुद्धि के सम्बन्ध में कुछ भी
नहीं कहा जा सकता है। बुद्धि परीक्षण से प्राप्त प्राप्तांकों को मानसिक आयु में
बदलकर फिर उसकी सहायता से बुद्धि लब्धि की गणना की जाती है। मानसिक आयु तथा बुद्धि
लब्धि ही किसी व्यक्ति की उच्च बुद्धि, सामान्य बुद्धि या निम्न बुद्धि को बताती है।
मानसिक आयु :-
सर्वप्रथम इसका प्रयोग बिने ने 1908 में किया था। वास्तव में
मानसिक आयु किसी व्यक्ति के द्वारा प्राप्त विकास की वह अभिव्यक्ति है जो उसके
बौद्धिक कार्यों द्वारा ज्ञात की जाती है तथा किसी आयु विशेष में उसकी अपेक्षा
होती है।
वास्तविक आयु:-
उसी प्रकार शारीरिक आयु से
तात्पर्य व्यक्ति की वास्तविक आयु या उसके जन्म से वर्तमान समय की अवधि से है।
इसका आधार बालक की जन्मतिथि का स्कूल प्रवेश रिकार्ड हो सकता है।
बुद्धि लब्धि :-
मानसिक आयु के आधार पर स्टर्न
तथा टर्मन ने "बुद्धि-लब्धि का प्रत्यय प्रतिपादित किया । बुद्धि लब्धि ज्ञात
करने के लिये मानसिक आयु को वास्तविक आयु से भाग दिया जाता है तथा निम्न सूत्र का
प्रयोग किया जाता है
जब मानसिक आयु वास्तविक आयु से अधिक होती है तो
बालक प्रखर बुद्धि वाला समझा जाता है तथा जब मानसिक आयु वास्तविक आयु से कम होती
है तो वह मन्द बुद्धि का बालक समझा जाता है। यदि दोनों बराबर हो तो वह औसत बुद्धि
वाला बालक समझा जाता है। टरमैन ने बुद्धिलब्धि के वितरण की तालिका तैयार की
सामान्य तौर पर किसी बड़े समूह के लिये बुद्धिलब्धि का वितरण सामान्य प्रायिकता
वक्र का अनुगमन करता है।
बुद्धिलब्धि विवरण का उदाहरण


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