पत्रकारिता एक परिचय - An Introduction to Journalism

पत्रकारिता एक परिचय - An Introduction to Journalism

पत्रकारिता समाज का आईना है। वह मनुष्य की आस्थाओं, विचारों, मूल्यों को सही रूप में जनता के सामने रखती है। ऐसे में पत्रकारिता का लक्ष्य क्या हुआ? इसका उत्तर होगा साहित्यिक कलात्मक रुझान को बढ़ाना, नैतिक तथा सामाजिक मूल्यों की प्रतिष्ठा करना, भौतिकवादी दुनिया में सही मार्ग दिखाना, सुखी जीवन के द्वार खोलना आदि।


पत्रकारिता जन सेवा का सशक्त माध्यम है। वर्तमान में आधुनिक तकनीकी विधाओं की प्रतिक्रिया स्वरूप संचार माध्यमों ने पत्रकारिता को एक नई दिशा दी है, जिसके चलते वह चुनौतीपूर्ण अभियान कम उद्यम ज्यादा बन गई है। वस्तुतः पत्रकारिता का प्रथम व प्रमुख कर्तव्य अन्याय का उद्घाटन करना, विसंगतियों का सुधार करना, परामर्श देना, समाज का मार्गदर्शन करना तथा व्यक्ति / परिवार / समाज व राष्ट्र का बहुआयामी उत्थान करना होता है। पत्रकारिता आधुनिक युगबोध राष्ट्रीय चेतना, जन जागरूकता एवं व्यापक जन संवेदना को संप्रेषित करने का सर्वसुलभ उन्नत जन माध्यम है। यह लोक मानस की सामुदायिक सहभागिता की वह जीवन्त विधा है, जिसमें जनता की आत्मा के स्वर उसके सुख-दुःख, जय-पराजय, आशा, आकांक्षा तथा सामयिक एवं सनातन सत्य मुखर हो उठते हैं।


विभिन्न विचारकों के मत


लैक्सिकन यूनिवर्सल एनसाइक्लोपीडिया, भाग-2 पृष्ठ 453-454 के अनुसार "परम्परागत रूप में पत्रकारिता का कार्य समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में समाचार एकत्रित करके लिखना, सम्पादित करके प्रकाशित करना या समाचारों पर टिप्पणी देना माना जाता है, किन्तु पत्रकारिता का क्षेत्र इस कथन से आगे भी कुछ है। उसमें सामुदायिक या लोकार्षक सामग्री का विविध संचार माध्यमों द्वारा प्रसारण भी सम्मिलित है। जिसमें मुख्य रूप से रेडियो और दूरदर्शन आते हैं। इन्हें सामान्यतया इलेक्ट्रॉनिक पत्रकारिता कहा जाता है।


वर्तमान पत्रकारिता के अन्तर्गत तत्कालीन समाचारों / विचारों का लिपिबद्ध मुद्रित प्रकाशन अर्थात् इसमें पत्र पत्रिकाएं ही सम्मिलित नहीं हैं, बल्कि रेडियो, दूरदर्शन तथा अन्य इलेक्ट्रानिक जनसंचार माध्यमों द्वारा भव्य प्रस्तुति एवं आकर्षक मौखिक प्रसारण भी समाहित है। पत्रकारिता के विषय एवं स्वरूप जीवन के सर्वांग पक्षों से सम्बद्ध हो गये हैं। चैम्बर्स एनसाइक्लोपीडिया ने पत्रकारिता को इस प्रकार परिभाषित किया है- "पत्रकारिता शायद सबसे अधिक रोमांचक अथवा जोखिमों से भरपूर व्यवसायों में से एक है, जिसमें पत्रकारों को देश के दैनिक जीवन के कार्यकलापों का ही नहीं, वरन वायुयानों की उड़ानों, युद्ध और खोज जैसे विषयों को भी समेटना होता है।"


इससे स्पष्ट होता है कि आज के सन्दर्भ में पत्रकारिता लोकतांत्रिक शासन प्रणाली का अविभाज्य अंग बन गई है। ब्रिटिश राजनीतिज्ञ बर्क ने प्रेस को राज्य के चौथे स्तम्भ की संज्ञा दी है। बर्क का कहना था कि जिस गैलरी में समाचार पत्रों के संवाददाता बैठते हैं, वह फोर्थ स्टेट के समकक्ष है। इस कथन से यह स्पष्ट होता है कि एक लोकतांत्रिक देश में प्रेस का महत्व संसद के बाद आता है। वास्तव में देखा जाय तो समाचार पत्र प्रतिदिन चलने वाली संसद है और संसद तथा प्रेस दोनों ही लोकतांत्रिक सरकारों के स्तम्भ हैं।








पत्रकारिता जनमत की अभिव्यक्ति का सशक्त एवं लोकप्रिय साधन भी हैं, क्योंकि यह समस्त मुद्दों को जनता के सामने बड़ी कलात्मकता के साथ रखती है। कटु सत्यों को निर्भीकता के साथ प्रस्तुत करती है, ताकि जनता का सही मार्गदर्शन हो सके। किसी भी प्रशासन प्रणाली को सुचारू रूप से चलाने के लिए प्रेस की आजादी और उसका सम्यक गठन एक अनिवार्य आवश्यकता है। जन हितार्थ कार्य करते हुए पत्रकारिता देश में एक स्वस्थ वातावरण का सृजन करना अपना मुख्य ध्येय समझती है। समाज की कुरीतियों, आडम्बर पूर्ण कार्यों असामाजिक तत्वों तथा विघटनकारी शक्तियों का पर्दाफाश कर सरकार को उसके दायित्व का बोध कराती है।


इस आधार पर यह कहा जा सकता है कि पत्रकारिता आधुनिकता की एक विशिष्ट उपलब्धि है। आधुनिकता उस सांस्कृतिक संचेतना का नाम है, जिसने वैज्ञानिक आलोक से मानवीय धरातल के विभिन्न स्तरों को उजागर किया है। अंग्रेजी में पत्रकारिता को जर्नलिज्म (Journalism) कहा जाता है। जर्नलिज्म शब्द लैटिन भाषा के धुर्नालिस (Diurnalis) से लिया गया है, जो फ्रेंच भाषा में जरनल (Journal) हो गया तथा जिसका शाब्दिक अर्थ है- दैनिक (Daily) | इसे एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका ने इन शब्दों में कहा है- "Journal in a word which came in to English from Latin-Diurnalis, through French, journal, with the original meaning of Daily............. Published journal may be daily, monthly, quarterly or even annual. Diurnal and journal were both used for periodicals in 17th-18th Centuries" -Ency. Br.,vol.13, p.94, 1963 ed.


पत्रकारिता के बारे में पं० पराड़कर कहते हैं- पत्रकारिता यानी तलवार की धार पर धावना है। पांडेय बेचन शर्मा 'उग्र' कहते हैं- मेरी राय में पत्रकार बनने से पूर्व आदमी को समझ लेना चाहिए कि यह मार्ग त्याग का है, जोड़ का नहीं। जिस भाई या बहन को भोग-विलास की लालसा हो, वह और धंधा करे। रहम करे. इस राम रोजगार पर मेरा आदर्श पत्रकार, ईमानदार पादरी, पीर, परमहंस सा नजर आता है। गणेश शंकर विद्यार्थी के लिए पत्रकारिता का एक मात्र ध्येय लोक सेवा एवं जनहित था। बालगंगाधर तिलक पत्रकारिता को जनजागरण का प्रमुख हथियार मानते थे।


मेरी राय में पत्रकार बनने से पूर्व आदमी को समझ लेना चाहिए कि यह मार्ग त्याग का है, जोड़ का नहीं। जिस भाई या बहन को भोग-विलास की लालसा हो, वह और धंधा करे। रहम करे, इस राम रोजगार पर मेरा आदर्श पत्रकार ईमानदार पादरी, पीर, परमहंस सा नजर आता है।" - पांडेय बेचन शर्मा 'उग्र'


पं० जवाहरलाल नेहरू कहते थे पत्रकारिता राष्ट्रीयता का चिन्तन तथा न्याय विरुद्ध शक्तियों को अवरुद्ध करने और नए राष्ट्र के निर्माण का सबसे सशक्त माध्यम है। टर्नर केटलिज के अनुसार समाचार कोई ऐसी चीज है, जिसे आप कल (बीते) तक नहीं जानते थे।

जबकि मैस फील्ड कहते हैं "घटना समाचार नहीं है, बल्कि वह घटना का विवरण है, जिसे उनके लिए लिखा जाता है, जिन्होंने उसे देखा नहीं है।"


जेम्स मैकडोनाल्ड के मुताविक 'पत्रकारिता को मैं रणभूमि से भी अधिक बड़ी समझता हूँ। यह कोई पेशा नहीं है, बल्कि पेशे से कोई ऊंची चीज है। यह एक जीवन है, जिसे मैंने अपने को स्वेच्छा पूर्वक समर्पित किया है। 








हार्थर लीच और जॉन कैरोल के अनुसार पत्रकारिता विज्ञान, कला और शिल्प की पावन त्रिवेणी है, जिसका स्नातक समाज सेवा तथा जन मानस के उन्नयन में महत्वपूर्ण भूमिका निर्वहन करना है।'


डॉ० अर्जुन तिवारी ने एनसाइक्लोपिडिया ऑफ ब्रिटेनिका के आधार पर इसकी व्याख्या इस प्रकार की हैं- "पत्रकारिता के लिए अंग्रेजी में 'जर्नलिज्म' शब्द व्यवहृत होता हैं जो 'जर्नल' से निकला है, जिसका शाब्दिक अर्थ दैनिक हैं। दिन-प्रतिदिन के क्रिया-कलापों, सरकारी बैठकों का विवरण 'जर्नल' में रहता था। 17वीं एवं 18वीं शती में पीरियाडिकल के स्थान पर लैटिन शब्द डियूनरल और जर्नल शब्दों के प्रयोग हुए 20वीं सदीं में गम्भीर समालोचना और विद्वत्तापूर्ण प्रकाशन को इसके अन्तर्गत माना गया 'जर्नल' से बना 'जर्नलिज्म अपेक्षाकृत व्यापक शब्द हैं। समाचार पत्रों एवं विविधकालिक पत्रिकाओं के सम्पादन एवं लेखन और तत्सम्बन्धी कार्यों को पत्रकारिता के अन्तर्गत रखा गया। इस प्रकार समाचारों का संकलन प्रसारण, विज्ञापन की कला एवं पत्र का व्यावसायिक संगठन पत्रकारिता है। समसामयिक गतिविधियों के संचार से सम्बद्ध सभी साधन चाहे वे रेडियो हो या टेलीविजन इसी के अन्तर्गत समाहित हैं।


डॉ० बद्रीनाथ कपूर के अनुसार "पत्रकारिता पत्र-पत्रिकाओं के लिए समाचार लेख आदि एकत्रित तथा सम्पादित करने, प्रकाशन आदेश आदि देने का कार्य हैं। 


रामकृष्ण रघुनाथ खाडिलकर के अनुसार "ज्ञान और विचार शब्दों तथा चित्रों के रूप में दूसरे तक पहुंचाना ही पत्रकला हैं। 


सी. जी. मूलर सामयिक ज्ञान के व्यवसाय को पत्रकारिता मानते हैं। इस व्यवसाय में आवश्यक तथ्यों की प्राप्ति, सावधानी पूर्वक उनका मूल्यांकन तथा उचित प्रस्तुतिकरण होता है। विखेमस्टीड ने पत्रकारिता को कला, वृत्ति और जन सेवा माना हैं।


न्यू वेव्स्टर शब्दकोश ने प्रकाशन सम्पादन, लेखन अथवा प्रसारण सहित समाचार माध्यम के संचालन के व्यवसाय को पत्रकारिता माना है। 


'जर्नलिज्म' फ्रेंच शब्द 'जर्नी' से व्युत्पन्न है जिसका तात्पर्य है प्रतिदिन के कार्यों अथवा घटनाओं का विवरण प्रस्तुत करना पत्रकारिता मोटे तौर पर प्रतिदिन की घटनाओं का यथातथ्य विवरण प्रस्तुत करती है।


प्रायः पत्रकारिता माध्यम, प्रेस, जन माध्यम, जन संचार को एक ही अर्थ में ग्रहण किया जाता हैं, पर सूक्ष्म दृष्टि से इन सभी शब्दों का अपना एक विशिष्ट अर्थ है। पत्रकारिता समाचारों के संकलन, चयन, विश्लेषण तथा सम्प्रेषण की प्रक्रिया हैं। प्रेस तकनीकी रूप से समाचार पत्र को संकेतित करता है। जन संचार में जन माध्यम के सभी साधनों के अतिरिक्त टेलीफोन, टेलीग्राफ, डाक सेवा इत्यादि सम्मिलित हैं। 


पत्रकारिता की प्रकृति


पत्रकारिता का मूल उद्देश्य सूचना देना, शिक्षित करना तथा मनोरंजन करना है। इन तीन उद्देश्यों में सम्पूर्ण पत्रकारिता का सार तत्व समाहित किया जा सकता हैं। अपनी बहुमुखी प्रवृत्तियों के कारण पत्रकारिता व्यक्ति और समाज के जीवन को गहराई तक प्रभावित करती है। पत्रकारिता देश की जनता की चित्तवृत्तियों, अनुभूतियों और आत्मा से साक्षात्कार करती हुई मानव मात्र को जीने की कला सिखाती है। सत्य की खोज में रत रहते हुए समाज में उदार मूल्यों की स्थापना की दिशा में पत्रकारिता की भूमिका विशेष उल्लेखनीय है इसका मूल लक्ष्य ही अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना दोषों का परिहार, असहाय और पीड़ितों की रक्षा एवं सहयोग तथा जनता का पथ प्रदर्शन करना है।


संक्षेप में यहां पत्रकारिता के तीन प्रमुख उद्देश्यों की चर्चा की जा रही है -







1. सूचना देना पत्रकारिता जन-जन को विश्व रंगमंच पर घटित होने वाली घटनाओं की जानकारी कराती हैं। इसके माध्यम से जनता को सरकार की नीतियों तथा गतिविधियों के बारे में जानकारी मिलती रहती हैं। एक प्रकार से यह जन हितों की संरक्षिका है।


2. शिक्षित करना सूचना के अतिरिक्त पत्रकारिता का प्रमुख कार्य शिक्षित करना भी है। पत्रकार जनता के आंख तथा कान होते हैं। पत्रकार जो देखता है, सुनता है। उसे मुद्रित तथा इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से जनता तक पहुंचाता है। पत्रकारिता सूचना के साथ-साथ जनमत निर्धारित करने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार भूमि तैयार करती है। सम्पादकीय स्तम्भों अग्रलेखों पाठकों के पत्र परिचर्चाओं साक्षात्कारों इत्यादि विविध तरीकों के द्वारा जनता को सामयिक तथा महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी देकर उनकी मानसिक खुराक की पूर्ति की जाती है। देश की वैचारिक चेतना को पत्रकारिता ही उद्वेलित करती है। इस प्रकार पत्रकारिता जन शिक्षण का प्रमुख माध्यम है।


3. मनोरंजन करना मनोरंजन रेडियो तथा दूरदर्शन का प्रमुख कार्य है। इसके अतिरिक्त समाचार पत्र पत्रिकाएं भी इस दृष्टि से काफी स्थान पाठकों के मनोरंजन सम्बन्धी सामग्री के लिए सुरक्षित कर रही है। मनोरंजन सामग्री पाठकों को स्वाभाविक रूप से आकृष्ट भी करती है। मनोरंजन में कई बार शिक्षा का मार्मिक सन्देश भी छिपा रहता है। उदाहरणार्थ राजनैतिक कार्टून तथा ऐसे हास्य-व्यंग्य के स्तम्भ एवं चुटकले। इनके मूल में सामाजिक-राजनैतिक जीवन में स्वस्थ भावों का संचार करना ही होता है। 


मनोरंजन की दृष्टि से पत्र पत्रिकाएं जहां मनोरंजक समाचारों के प्रकाशन में रूचि प्रदर्शित करती है वहीं फीचर लेखों के माध्यम से इस कार्य को विशेष रूप से किया जाता है। मनोरंजन मानवीय रूचि का महत्वपूर्ण पक्ष है।