लोकतंत्र का अर्थ - Meaning of Democracy
लोकतंत्र का अर्थ - Meaning of Democracy
मीडिया के विद्यार्थियों को यह भी देखना चाहिए कि भारत में लोकतांत्रिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली कैसी हैं ? और क्या सचमुच शासन के विभिन्न अंगों द्वारा अपने अपने कार्य क्षेत्र में संविधान की मर्यादाओं के अनुकूल आचरण किया जा रहा है अथवा नहीं मीडिया के विद्यार्थी को विशेषकर भारत के संविधान की उद्देशिका, मूल अधिकार और मूल कर्तव्यों के आलोक में घटनाओं को समझना एवं उनका मूल्यांकन जरूर करना चाहिए।
• मीडिया के विद्यार्थी के लिए लोकतंत्र की स्वीकार्यता के सार्वभौमिक तत्वों को समझना भी बेहद जरूरी हैं।
ये तत्व हैं -
स्वतंत्रता, समानता, भ्रातत्व, जनता की प्रभुसत्ता, शांतिपूर्ण साधनों पर विश्वास, स्वतंत्र न्यायपालिका, स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव, नागरिकों के मौलिक अधिकार,
शासन के तीनों अंगों - विधायी, और न्यायिक अंगो पर नियंत्रण एवं संतुलन आदि।
भारतीय संविधान की उद्देशिका से भारतीय लोकतंत्र की आत्मा का पता चलता है। अतः मीडिया के विद्यार्थी को उदयेशिका के प्रत्येक शब्द को जानना एवं समझना चाहिये । इस उद्देशिका में कहा गया है कि - "हम भारत के लोग, भारत को एक संपूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य बनाने के लिए तथा उसके समस्त नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय विचार अभिव्यक्ति विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता, प्रशिक्षण एवं अवसर की समता प्राप्त कराने के लिए तथा उन सब में व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढ़ाने के लिए दृढसंकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवम्बर 1949 ई. को एतदद्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।"
संविधान की मूल भावना का अध्ययन करने से पत्रकारिता के छात्रों में यह समझ भी भलीभांति विकसित होगी कि पत्रकार को लोकतांत्रिक व्यवस्था किस तरह के अधिकार देती है और पत्रकार से किस तरह के दायित्व की अपेक्षा करती है।
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