जनसंपर्क के साधन - Means of Public Relations
जनसंपर्क के साधन - Means of Public Relations
जनसंपर्क का सीधा रिश्ता पत्रकारिता से है। सूचना और प्रचार जिस तरह पत्रकारिता से जुड़े हैं उसी तरह जनसंपर्क से भी जुड़े हैं। तथ्यों का प्रकाशन प्रस्तुतिकरण सूचना है। सूचना को किसी खास उद्देश्य के साथ प्रभावशाली रूप से प्रस्तुत करना प्रचार है और प्रचार का सुव्यवस्थित, उद्देश्यपूर्ण सम्पूर्ण जानकारियों के साथ प्रस्तुतिकरण जनसंपर्क है लेकिन आज बदलते दौर में जनसंपर्क के तरीके भी बदल रहे है और इसी हिसाब से जनसंपर्क के साधन भी। एक दौर था जब जनसंपर्क मुख्य रूप से पत्र-पत्रिकाओं के इर्द गिर्द तक ही सीमित था मगर आज अनेक अन्य साधनों के जरिए भी जनसंपर्क किया जाता है।
जनसंपर्क के मुख्य साधन इस प्रकार हैं।
1- बोले हुए शब्द भाषण, प्रेस कांफ्रेंस आदि
2- जन संचार के साधन प्रेस टेलीविजन, रेडियो आदि
3- मुद्रित शब्द परचे-हैण्डबिल, पुस्तिकाएं व अन्य प्रचार सामग्री आदि
4 दृश्य श्रव्य माध्यम फोटोग्राफी स्लाइड शो आदि
5- प्रर्दशनी मेले व अन्य सार्वजनिक उत्सव
6- विज्ञापन
7- फिल्म व सीडी डीवीडी तथा
8- मोबाइल इंटरनेट व इलेक्ट्रानिक मीडिया के अन्य साधन
बोले हुए शब्द जनसंपर्क का सबसे पुराना और असरकारक साधन है। सीधे सम्पर्क के दौरान कही हुई बातों, भाषणों के द्वारा रखे गए तथ्यों और प्रेस कांफ्रेस में कही हुई बातों के जरिए सीधा और प्रभावपूर्ण जनसंपर्क होता है प्रेस, टेलीविजन, रेडियो आदि भी जनसंपर्क के अत्यधिक प्रचलित और प्रभावशाली साधन हैं। अखबार और पत्र पत्रिकाओं, टेलीविजन और रेडियो का जनसंपर्क में काफी इस्तेमाल होता है। पल्स पोलियो अभियान की सफलता के उदाहरण को देखें तो इन साधनों के जरिए हुए जनसंपर्क ने लोगों में पोलियो के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाई और पोलियो ड्राप पीने के प्रति रुझान को भी तेज किया। सीधे डाक के जरिए भेजी जाने वाली मुद्रित सामग्री, हैण्डबिल व अन्य छपी हुई प्रचार सामग्री का इस्तेमाल भी जनसंपर्क के पुराने साधन के तौर पर होता रहा है। आज कल भी स्वयं सेवी संगठन इस साधन का पर्याप्त इस्तेमाल कर रहे हैं। इसी तरह दृश्य श्रव्य माध्यम भी जनसंपर्क का एक अच्छा साधन है। कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाने में स्लाइड शो असरकारी रहे हैं। प्रदर्शनी मेले और अन्य सामाजिक उत्सव भी ऐसे अवसर होते हैं जहां पर किसी बात को प्रभावशाली तरीके से रखा जा सकता है, समझाया जा सकता है। बहुत से व्यवसायी अपने उत्पादों को लोकप्रिय बनाने के लिए भी जनसंपर्क के इस साधन का इस्तेमाल करते है। विज्ञापन तो जनसंपर्क का सबसे आसान साधन है जो बात कहनी उसे रेडियो, टीवी या पत्र-पत्रिकाओं में विज्ञापन के जरिए कह दिया जाता है और इस तरह बात सही जगह तक पहुंच जाती है। भारत में खाद्य तेल के तौर पर घी के स्थान डालडा के प्रारम्भिक विज्ञापन देखें तो यह बात बहुत आसानी से समझी जा सकती है। डालडा के उन विज्ञापनों (60 के दशक में) में यह बताया जाता था कि डालडा क्या है और यह देशी घी से क्यों उन्नीस नहीं है। इन विज्ञापनों ने डालडा के प्रति लोगों के उत्सुकता बढ़ाई और डालड़ा एक सफल उत्पाद बन गया बहुत सारे अन्य ब्राइंस की सफलता में भी विज्ञापन के जरिए सफल जनसंपर्क का कमाल जुड़ा हुआ है।
इसी तरह फिल्म भी जनसंपर्क का एक बड़ा साधन है। एक दौर में सिनेमाघरों में फिल्म के प्रदर्शन से पहले अनिवार्य रूप से भारत सरकार के दृश्य-श्रव्य विभाग की बनाई गयी डाक्यूमेंट्री फिल्में दिखाई जाती थी। यह फिल्में सरकार की नीतियों का प्रचार भी करती थीं और जन भावना को प्रभावित भी करती थीं। मोबाइल, इंटरनेट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के साधन जनसंपर्क की दुनिया में अपेक्षाकृत नए हैं लेकिन इसका असर और प्रभाव क्षेत्र बहुत व्यापक है इसलिए आज जनसंपर्क कर्मी इन साधनों का अधिक से अधिक इस्तेमाल कर रहे हैं। मोबाइल अब जनसंपर्क का एक बड़ा साधन बन गया है तो इंटरनेट उससे भी आगे है।
जनसंपर्क के इन साधनों को देश काल परिस्थिति के अनुसार इस्तेमाल किया जाता है। अनेक बार इस तरह के साधनों की तुलना में सीधा व्यक्तिगत सम्पर्क भी अधिक कारगर होता है। गुजरात में जामनगर में लगभग डेढ़ दशक पहले जब रिलायंस उद्योग समूह रिफाइनरी लगाने जा रहा था तो स्थानीय ग्रामीणों ने जमीनें देने से इनकार कर दिया। सरकारी आदेश और उस पर अदालत की मोहर लग जाने पर भी किसान जमीनें छोड़ने को तैयार नहीं हुए। सरकार ने जबरन जमीनें खाली करवानी चाहीं मगर वह भी अधिक कारगर नहीं हुआ। इस पर रिलायंस ने जनसंपर्क का रास्ता अपनाया रिलायंस के प्रतिनिधियों ने गांव-गांव जाकर एक-एक ग्रामीण से बात की। उन्हें तेल शोधक कारखाना बनने से होने चाले फायदों के बारे में बताया। उन्हें उनकी अनुत्पादक, नमक वाली जमीन के बदले में मिलने वाले लाभ बताए ग्रामीणों को जब सारी हकीकत पता लगी तो वे सहर्ष जमीन देने को तैयार हो गए। खुद उन्हीं के प्रतिनिधि भूमिपूजन में शामिल हुए यह उदाहरण इसलिए उल्लेखनीय है कि रिलायंस की जामनगर रिफाइनरी न केवल आज देश की समृद्धि में बहुत बड़ा योगदान कर रही है बल्कि उसकी वजह से उस सारे इलाके के ग्रामीणों की दुनिया भी बदल गई है। कहने का अभिप्राय यह भी है कि जनसंपर्क के साधन कोई भी हों यदि उनका लक्ष्य पवित्र हो और उनमें कोई थाल, दुराव-छिपाय न हो तो वही साधन सबसे अधिक प्रभावकारी साबित होता है।
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