विज्ञापन के प्रकाशन माध्यम - Media of Advertisement

विज्ञापन के प्रकाशन माध्यम - Media of Advertisement

प्रकाशन माध्यम या मुद्रण माध्यम विज्ञापन का बहुत पुराना माध्यम है। मुद्रित माध्यमों में समाचार पत्र और पत्रिकाएं दोनों ही शामिल हैं जो उपभोक्ताओं को सूचनाएं और संदेश देकर प्रभावित करती हैं। डायरेक्ट मेल और कैटलॉग आदि भी प्रकाशन माध्यम का हिस्सा हैं। विज्ञापन के प्रकाशन माध्यमों की विशिष्टता इस बात में है कि इस माध्यम के जरिए विज्ञापन एक छोटी सी जगह में बड़ी कलात्मकता से अपनी बात उपभोक्ताओं अथवा ग्राहकों तक संप्रेषित कर देते हैं।


समाचार पत्र : आज विज्ञापन समाचार पत्र उद्योग की रीढ़ माने जाते हैं और आज समाचार पत्रों में तरह-तरह के विज्ञापनों की भरमार भी देखी जा सकती है। समाचार पत्रों का मुख्य कार्य दिन-प्रतिदिन की खबरें समाज के व्यापक हिस्से तक पहुंचाना है मगर साथ ही साथ ये अखबार समाचार देने के साथ-साथ निर्धारित शुल्क लेकर विज्ञापन भी प्रकाशित करते हैं। समाचार पत्रों के ऐतिहासिक परिदृश्य पर नजर डाली जाए तो पता चलता है कि समाचार पत्रों ने अपने विकास के पहले चरण से ही विज्ञापन प्रकाशित करना शुरू कर दिया था। साक्षरता और शिक्षा के प्रचार-प्रसार के साथ-साथ समाचार पत्रों की लोकप्रियता बढ़ी तो इनमें विज्ञापन प्रकाशित करने की उपादेयता भी बढ़ती गई। आज दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक, मासिक सभी तरह के समाचार पत्रों में विज्ञापनों की भरमार देखी जा सकती है। क्षेत्रीय, प्रांतीय और राष्ट्रीय स्तर के सभी अखबार संसाधन जुटाने के लिए विज्ञापनों के लिए जगह सुरक्षित रखतें हैं और इस स्थान को येन केन प्रकारेण विज्ञापनों से भरते भी हैं।


जनसंपर्क अभियान के तहत विभिन्न औद्योगिक व व्यावसायिक प्रतिष्ठान तथा सरकारी व गैर सरकारी प्रतिष्ठान समाचार पत्रों में विज्ञापन देते हैं। कभी - कभी विशिष्ट अवसरों पर उत्पाद या सेवा के विज्ञापन को अधिक प्रभाव के साथ प्रस्तुत करने के लिए विशिष्ट परिशिष्ट बनवाए जाते हैं। केंद्र और राज्य सरकारें भी अपने मंत्रालयों की महत्वपूर्ण सूचनाओं और योजनाओं को जनता तक पहुंचाने के लिए समाचार पत्रों में विज्ञापन प्रकाशित करवाती हैं। राष्ट्रीय समारोहों के अवसर पर भी महत्वपूर्ण विज्ञापन प्रकाशित करवाए जाते है।






समाचार पत्रों में विज्ञापन देने के लाभ और सीमाएं दोनों ही हैं। समाचार पत्र में विज्ञापन का प्रकाशन इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों (टेलीविजन तथा रेडियो) की अपेक्षा सस्ता होता है। एक निश्चित भौगोलिक सीमा में रहने वाले समूह के हिसाब से विज्ञापन क्षेत्रीय अथवा प्रांतीय अखबारों में दिए जा सकते हैं। राष्ट्रीय स्तर पर उत्पाद तथा सेवाओं संबंधी विज्ञापन के लिए राष्ट्रीय समाचार पत्रों में विज्ञापन की भाषा और प्रस्तुति में उपभोक्ता की मनोवृति को ध्यान में रखते हुए, समय-समय पर बदलाव लाकर अधिक प्रभावशाली बनाया जा सकता है।


समाचार पत्र विज्ञापन की अपनी कुछ सीमाएं अथवा कमियां भी हैं। इसकी सबसे बड़ी कमी है इसका अल्पकालिक जीवन इसकी जीवन अवधि केवल एक दिन की होती है, इसके बाद यह रद्दी हो जाता है। निरक्षर और अशिक्षित उपभोक्ताओं या ग्राहकों के लिए समाचार पत्र के विज्ञापन निरर्थक होते हैं। समाचार पत्र एक सीधा विज्ञापन माध्यम है जो संभावित ग्राहकों या उपभोक्ताओं की बड़ी संख्या तक संदेश पहुंचाता है। यह अपेक्षाकृत सस्ता माध्यम है। समाचार पत्रों के विज्ञापन की लागत विज्ञापन के आकार स्थान और समाचार पत्र की वितरण संख्या के आधार पर तय होती है। समाचार पत्र विज्ञापन के जरिए स्थानीय सूचनाएं पहुंचाने के लिए भी आदर्श माध्यम हैं।


पत्रिकाएं :-  प्रिंट माध्यमों में पत्रिकाओं का अपना अलग अस्तित्व है। समाचार पत्रों की तरह विज्ञापन का पत्रिका माध्यम भी जनमानस तक विज्ञापन का संदेश पहुंचाने का लोकप्रिय माध्यम है। उद्योग समूह तथा व्यापारिक कंपनियां अपने उत्पाद या सेवा के निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए पत्रिकाओं में विज्ञापन प्रकाशित करवाती हैं। जहां एक अखबार अल्पजीवी होता है वहां पत्रिका की उम्र उससे कुछ लंबी होती हैं। वह एक हाथ से दूसरे हाथ में पहुंचकर महीनों पढ़ी जा सकती है। समाज का हर वर्ग, जो साक्षर है, पढ़ा-लिखा है, अपने स्तर के हिसाब से पत्रिकाएं पढ़ता है।







समाचार पत्र की तरह पत्रिका विज्ञापन माध्यम की भी अपनी विशेषताएं और सीमाएं हैं। पत्रिका सावधिक होने के कारण पाठकों के हाथों में अधिक समय तक रहती हैं। पत्रिका का कागज समाचार पत्र के कागज की तुलना में उत्कृष्ट होता है। अतः विज्ञापन का रंग संयोजन तथा पृष्ठों का संयोजन पत्रिकाओं में आकर्षक ढंग से उभरता है। पत्रिकाओं में समाचार पत्र की तरह विज्ञापनों की बेतरतीब भीड़ नहीं होती। इसलिए पत्रिकाओं के पृष्ठों पर विज्ञापन पाठकों का अधिक ध्यान खींच सकते हैं। अवकाश के समय भी पत्रिका का आनंद उठाया जा सकता है। ऐसे क्षणों में पाठक विज्ञापनों को भी खूब गौर से पढ़ते और देखते हैं। पत्रिकाएं साप्ताहिक, पाक्षिक, मासिक, त्रैमासिक या वार्षिक आदि हो सकती हैं। विषय आधार पर भी फिल्मी, खेल, धार्मिक, फैशन, महिला यदि अलग-अलग किस्म की पत्रिकाएं होती हैं जो विशेष पाठक वर्ग तक विज्ञापन संदेश पहुंचा सकती हैं।


विज्ञापन माध्यम के रूप में पत्रिकाओं की विशेषता यह है कि इनका जीवन काल लम्बा होता है। समाचार पत्रों की तरह पत्रिकाएं बहुत जल्दी रद्दी नहीं बन जाती। पाठकों के पास अधिक समय तक संग्रहीत रहने के कारण इनमें विज्ञापन अधिक समय तक प्रभावी बना रहता है। चूंकि पत्रिकाएं विशेष पाठक समूह के आधार पर प्रकाशित होती हैं इसलिए विज्ञापनकर्ता को माध्यम के रूप में पत्रिकाओं का चयन करने में आसानी होती है। उदाहरणार्थ खेल सामग्री, पौष्टिक पेय आदि के विज्ञापन के लिए विज्ञापनकर्ता खेल पत्रिकाओं को चुन सकता है तो महिला सौन्दर्य प्रसाधन, साड़ियों, जेवरों या रसोई की जरूरत की चीजों के लिए उसके पास महिला पत्रिकाओं को चुन सकने की आजादी होती है। पत्रिकाओं की छपाई, कागज व रंग भी समाचार पत्रों की तुलना में अधिक आकर्षक होते हैं, जिससे विज्ञापन का असर अधिक होता है। विज्ञापन माध्यम के रूप में पत्रिकाओं की मुख्य कमी यह है कि समाचार पत्रों की तुलना में इनका प्रसारण कम होता है तथा इनमें प्रकाशित विज्ञापनों की लागत बहुत अधिक होती है। जिससे छोटा विज्ञापनकर्ता इनका लाभ नहीं उठा पाता ।


डायरेक्ट मेल : डायरेक्ट मेल एक ऐसा मुद्रित विज्ञापन माध्यम है जिसका प्रयोग कुछ चुनींदा उपभोक्ताओं को ही लक्ष्य बनाकर किया जाता है। इस माध्यम में संदेश सार्वजनिक न होकर सिर्फ उन्हीं लोगों तक पहुंचता है जिनके पास इसे भेजा जाता है। इस माध्यम के द्वारा विज्ञापनकर्ता उपभोक्ता से सीधा संवाद करता है क्योंकि इसमें विज्ञापन को सीधे उपभोक्ता तक भेज दिया जाता है। विज्ञापनकर्ता अपने चुने हुए उपभोक्ताओं या लक्ष्य समूह तक अपने उत्पाद या विषय की जानकारी पत्र, प्रचार सामग्री, फोल्डर आदि के जरिए भेजता है।

चूंकि इस माध्यम के जरिए कुछ चुने हुए संभावित या पुराने उपभोक्ताओं तक विज्ञापनकर्ता का संदेश सीधे पहुंचता है इसलिए इसका असर भी अधिक होता है। बड़े उत्पादों के मामले में यह माध्यम अधिक असर कारक है। उदाहरणार्थ किसी एक कंपनी से कार खरीद चुके ग्राहक के पास वही कंपनी जब अपनी नई कार के बारे में डायरेक्ट मेल से सूचना भेजती है तो ग्राहक पर उसका अधिक असर होता है। इस माध्यम में संदेश विस्तृत और सूचनाप्रद होता है। जिससे उपभोक्ता को उत्पाद की पूरी जानकारी हो जाती है। लेकिन यह तुलनात्मक रूप से मंहगा माध्यम है क्योंकि इसमें संदेश पर व्यय अधिक होता है।








कैटलॉग: कैटलॉग या सूची पत्र भी एक उपयोगी विज्ञापन माध्यम है। यूरोपीय देशों में एक दौर में कैटलॉग के जरिए खूब विज्ञापन किए जाते थे। कैटलॉग किसी विशेष कंपनी या फर्म के विभिन्न उत्पादों के बारे में विस्तार से जानकारी देते हैं। इनमें विज्ञापनकर्ता के विभिन्न उत्पादों का मूल्य, गुणवत्ता रंग, आकार प्रकार, विशेषताओं, उपयोग आदि के बारे में विस्तृत जानकारी दी जाती है। कैटलॉग कई प्रकार के होते हैं। जैसे खुदरा कैटलॉग, व्यावसायिक कैटलॉग और उपभोक्ता कैटलॉग आदि।


खुदरा कैटलॉग :- खुदरा सूची पत्र का प्रयोग किसी व्यापारिक प्रतिष्ठान या संस्थान में उपलब्ध उत्पादों के मूल्य और विशेषताओं की जानकारी देने या विशेष प्रकार की छूट या योजना (स्कीम) आदि की जानकारी देने के लिए किया जाता है। बड़े रेस्तराओं के मेन्यू कार्ड भी इसी तरह के कैटलॉग हैं।


व्यावसायिक कैटलॉग :-  इस तरह के कैटलॉग व्यवसायियों के लिए होते हैं। इनमें व्यावसायिक जानकारियां होती है और प्रायः वस्तुओं के थोक मूल्य दिए होते हैं। इस तरह के कैटलॉग बड़े व्यवसाय में अधिक प्रयोग होते हैं। जैसे किसी बड़ी हथियार कंपनी या वाहन निर्माता कंपनी का कैटलॉग, जिसमें कंपनी द्वारा बनाए गए तमाम हथियारों अथवा वाहनों की उपलब्धता, मूल्य, खासियत आदि का ब्यौरा होता है।


उपभोक्ता कैटलॉग: इस तरह के कैटलॉग विज्ञापनकर्ताओं द्वारा सीधे उपभोक्ताओं के पास अपने उत्पादों की जानकारियों के लिए भेजे जाते हैं। नए जमाने के विज्ञापन माध्यम में इस तरह के कैटलॉग इंटरनेट से भी सीधे प्राप्त किए जा सकते हैं। विभिन्न प्रकाशन संस्थानों के सूची पत्र इस तरह के कैटलॉग का उदाहरण हैं।








कैलेंडर : कैलेंडर भी विज्ञापन का एक महत्वपूर्ण मुद्रित माध्यम है। कैलेंडर प्रायः हर घर में लगे होते हैं। यह एक ऐसा प्रभावी माध्यम है जो हर वक्त नजर पड़ने पर उपभोक्ता को उत्पाद की याद दिलाता रहता है। कैलेंडर दो प्रकार के होते हैं। एक वो जिनमें सिर्फ तारीखें होती हैं और विज्ञापनकर्ता का नाम पता और उत्पाद आदि की जानकारी होती है। दूसरी तरह के कलैण्डरों में आकर्षक चित्र, तस्वीरें आदि होती है, देवी देवताओं के चित्र होते हैं और इन चित्रों के नीचे या ऊपर विज्ञापनकर्ता का परिचय होता है। बड़े कारपोरेट घरानों से लेकर सार्वजनिक प्रतिष्ठान और निजी संस्थान कलैण्डरों को विज्ञापन माध्यम के रूप में इस्तेमाल करते रहते हैं


फोल्डर और पैम्फलेट :- ये स्थानीय विज्ञापन के सस्ते माध्यम हैं। पैम्फलेट प्रायः छोटे आकार के रंगीन पतले कागज पर मुद्रित किए जाते हैं और इनमें स्थानीय सेवाओं या उत्पादों के बारे में सूचनाएं दी जाती हैं। पैम्फलेट या तो हाथों हाथ बांट दिए जाते हैं या समाचार पत्रों के साथ वितरित किए जाते हैं। स्थानीय स्तर पर प्रयोग किए जाने वाले इस माध्यम का असर तत्काल होता है।


फोल्डर भी एक प्रकार के पैम्फलेट हैं जिनमें पैम्फलेट की अपेक्षा अधिक अच्छे कागज का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे कागज छपाई के बाद मोड़े (फोल्ड किए) जाते हैं, इसीलिए इन्हें फोल्डर कहा जाता है। फोल्डर में एक उत्पाद या एक संस्थान के एकाधिक उत्पादों के बारे में विस्तृत जानकारी दी जाती है। फोल्डर में शीर्षक, उपशीर्षक चित्र ब्रांड आदि का विस्तार से प्रयोग होता है। फोल्डर का प्रयोग पर्यटन सम्बन्धी सूचनाओं के प्रसार के लिए भी खूब होता है।