मीडिया सम्बन्ध - Media Relations

 मीडिया सम्बन्ध - Media Relations


यह देखा गया है कि जनसंपर्क तब अधिक असरकारक होता है जब किसी के विचार, उसकी राय उसका पक्ष, उसकी स्थिति स्वयं उसके जरिए लोगों तक पहुंचने के बजाए मीडिया के जरिए लोगों तक पहुंचे। रिलायंस जामनगर जैसे अपवाद उदाहरणों को छोड़ भी दें तो यह कहा जा सकता है कि बेहतर जनसंपर्क के लिए जनसंपर्क कर्मियों को मीडिया से अच्छे सम्बन्ध बनाकर रखने चाहिये। अगर उद्देश्य में बेईमानी नहीं है तो जनसंपर्क और मीडिया दोनों को एक दूसरे का पूरक होना चाहिए।


आज जनसंपर्क इतना महत्वपूर्ण हो गया है कि प्रायः हर किसी संस्था में जनसंपर्क विभाग होता है और जनसंपर्क अधिकारी होते हैं। राज्य सरकारें हों या राष्ट्रीय सरकार, सार्वजनिक क्षेत्र के बड़े उपक्रम हों या रक्षा संगठन, खेल संगठन हों या राजनीतिक दल, राजनेता हों या फिल्म व्यवसाय के लोग, कार्पोरेट हाउस हो या छोटे उद्यमी, संगठन संस्थाएं हों या स्वयंसेवी समूह हर कहीं जनसंपर्क कर्मियों का काम महत्वपूर्ण होता जा रहा है। 


जनसंपर्क कर्मियों को प्रायः दो तरह से काम करना होता है। 


(1) आन्तरिक जनसंपर्क और 


(2)- वाह्य जनसंपर्क। 


आंतरिक जनसंपर्क संस्था के सदस्यों अथवा कर्मचारियों से किया गया जनसंपर्क है। इसमें नोटिस बार्ड, गृह पत्रिका, न्यूज लेटर, अनौपचारिक मिलन, गोष्ठी, प्रोत्साहन, प्रेरणा, पुरस्कार, प्रशिक्षण आदि के जरिए अपनी बात- विचार लोगों तक पहुंचाए जाते हैं। लेकिन बाह्य जनसंपर्क में जनसंपर्क कर्मियों को अपनी बात प्रभावित समाज, उपभोक्ता अथवा जनसामान्य तक पहुँचानी होती हैं और इसके लिए मीडिया से अच्छे सम्बन्ध होने बहुत जरूरी हैं। कई बार अप्रिय स्थितियों में मीडिया जनसंपर्क कर्मी के पक्ष को अनदेखा भी कर सकता है लेकिन अगर जनसंपर्क कर्मियों के मीडिया से सम्बन्ध बेहतर हैं तो ऐसी अप्रिय स्थितियों में भी उन्हें मीडिया से किसी न किसी प्रकार की सहानुभूति अथवा सहयोग अवश्य मिल जाता है। बेहतर मीडिया सम्बन्धों के लिए यह भी जरूरी है कि जनसंपर्क कर्मी सिर्फ अपने काम के समय ही मीडिया से संपर्क न करे, सामान्य स्थितियों में भी मीडिया से सम्पर्क बनाए रखना लाभदायक होता है।


सूचना तकनीकी के इस तेजी से बदलते दौर में जनसंपर्क का महत्व और उसकी उपयोगिता भी तेजी से बदल रही है। अब जनसंपर्क कर्मी सिर्फ सौम्य मुस्कराहट के साथ प्रस्तुत होने वाले मेजबान ही नहीं रह गये हैं बल्कि उनकी छवि अब एक जिम्मेदार और विशेषज्ञ कम्युनिकेटर के रूप में बदल रही है। कम्युनिकेशन मैनेजमेंट आज एक महत्वपूर्ण कार्य माना जाता है और जनसंपर्क को भी एक आधुनिक नाम कार्पोरेट कम्यूनिकेशन के रूप में पहचाना जाने लगा है। लेकिन जनसंपर्क की इस नई पहचान को भी बेहतर मीडिया सम्बन्ध के बिना सफलता नहीं मिल सकती है। उसके लिए भी मीडिया से अच्छे सम्बन्ध जरूरी हैं। कॉरपोरेट कम्युनिकेशन के विशेषज्ञ मीडिया सम्बन्धों के जरिए स्थान पर बैठे-बैठे पूरे देश या विश्व भर में अपनी बात पहुंचा सकते हैं। इंटरनेट के जरिए एक स्थान से भेजा गया प्रेस नोट क्षणभर में कहीं भी पहुंच सकता है और अगर प्रेस नोट भेजने वाले के मीडिया से बेहतर सम्बन्ध हों तो जिसके पास भी वो प्रेस नोट पहुंचेगा वह उस पर ध्यान जरूर देगा। यानी कुल मिलाकर कह सकते हैं कि जनसंपर्क की सफलता की सबसे बड़ी कुंजी मीडिया से अच्छे सम्बन्ध बनाए रखना है।