जनहित याचिका दाखिल करने का तरीका (Mode of filing PIL)



जनहित याचिका दाखिल करने का तरीका (Mode of filing PIL)

1. सम्बंधित न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के नाम पत्र याचिका भेजना, जिसके साथ तत्संबंधी तथ्य और दस्तावेज भी हों यह पत्र रजिस्टर्ड डाक द्वारा ही भेजा जाना चाहिए।


2 न्यायालय की निःशुल्क कानूनी सेवा समिति के माध्यम से सीधे अदालत में जनहित याचिका दाखिल करना।


3. किसी जनहित याचिका वकील की मदद लेकर सीधे मामला दाखिला करना। 


4. एन० जी० ओ० या जनहित याचिका फर्मों के माध्यम से मामला दाखिल करना।


ध्यान रखने योग्य महत्वपूर्ण बातें


1. प्रभावित व्यक्तियों के साथ कानूनी मामले पर विस्तारपूर्वक विचार-विमर्श करें। 


2 पता लगाएं कि क्या मामला लोगों के मूलभूत अधिकारों के उल्लंघन का है या नहीं। यह उल्लेख करना भी महत्वपूर्ण है कि किस मूलभूत अधिकार का उल्लंघन हुआ है।


3. यह निर्णय लेने के लिए लोगों की मदद करना कि क्या उनके मूलभूत अधिकारों को पाने के लिए या उनके अधिकारों के उल्लंघन होने को रोकने के लिए अदालत में कानूनी कार्रवाई करना अनिवार्य है।


4. सभी तथ्यों, विवरणों तारीखों आदि का उल्लेख करके याचिका तैयार करना (अनुलग्नक 23 में रिट याचिका का प्रारूप देखें)। 


5. याचिका में उल्लेख करें कि लोग किस तरह की राहत चाहते हैं।


6. अगर संभव हो तो सभी प्रभावित लोगों के हस्ताक्षर करा लें। 


7. मामले से संबंधित सभी दस्तावेज, समाचार पत्रों की कतरनें, फोटोग्राफी, जांच रिपोर्ट प्रमाणपत्र और हलफनामे एकत्रित करें और उन्हें मुख्य याचिका के साथ नत्थी कर दें।


8. याचिका दाखिल करने से पहले, अगर सम्भव हो, तो किसी सामाजिक सजग वकील या स्थानीय कानूनी सलाहकार समिति के सदस्यों से परामर्श कर लें। 


9. याचिका को संबंधित उच्च न्यायालय की उच्च न्यायालय कानूनी सेवा समिति के अध्यक्ष या सर्वोच्च न्यायालय कानूनी सेवा समिति के अध्यक्ष, नई दिल्ली 110001 को रजिस्ट्री द्वारा भेज दें।


10. अगर याचिका कमजोर वर्ग के लोगों की तरफ से दाखिल की गई हो, तो अदालत याचिका दाता को अदालत के शुल्क का भुगतान करने से छूट दे सकती है।






वकील नियुक्ति करना :- 


जनहित याचिका दाता अगर स्वयं एक वकील नहीं है, तो वह अपने मामले के बारे में बहस कर सकता है। वह अदालत को सिर्फ यह बता दे कि याचिका दाता स्वयं अदालत में पेश हो रहा है। फिर भी याचिका दाता अदालत से अपने लिए वकील की व्यवस्था करने का अधिकार रखता है। अदालत निस्पृह व्यक्ति के रूप में एक वकील को नियुक्त कर सकती है, जो याचिका दाता की तरफ से कानूनी कार्रवाई करेगा, या वह उस मामले को कानूनी सेवा समिति को उपयुक्त कानूनी सहायता प्रदान करने के लिए भेज सकते है। जनहित याचिका में साक्षी जनहित याचिका में दिए गए अभिवचनों और दावों के समर्थन में साक्षी निम्नलिखित माध्यमों से एकत्रित किए जा सकते हैं:


1. जनहित याचिका में अभिव्यक्त व्यक्तियों से हलफनामे लेना, तथ्यों और सच्चाइयों के बारे में संबंधित।


2. उस मामले पर समाचार पत्र की कतरनें, 


3. याचिका में उठाए गए कानूनी मुछदे पर किए गए सर्वेक्षण या अनुसंधान की रिपोर्ट।


4 मामले पर एन० जी० ओ० या किसी सरकारी एजेंसी द्वारा दी गई कोई जांच रिपोर्ट।


5. सरकार के सम्बंधित विभाग द्वारा जारी किए गए दस्तावेज या नोटिस 


अनुच्छेद 32 के तहत अदालत की शक्ति सिर्फ रोकथाम की ही नहीं है, अर्थात मूलभूत अधिकारों के उल्लंघन को रोकना, बल्कि उनका उपचार करना भी है, अर्थात् मुआवजा मंजूर करने की शक्ति मुआवजा सिर्फ उपयुक्त मामलों में दिया जा सकता है जहां मूलभूत अधिकारों का हनन स्थूल और सुस्पष्ट उग्र रूप का हो गया उल्लंघन बड़े पैमाने पर किया गया हो और बहुत लोगों के मूलभूत अधिकारों पर प्रभाव डालता हो, या उनकी गरीबी या विकलांगता या सामाजिक या आर्थिक प्रतिकूलता-ग्रस्त स्थिति के कारण उनके साथ उन्याय या अत्यधिक कठोरता, या अत्याचार का प्रदर्शन करता हो, जिससे प्रभावित व्यक्ति को नागरिक अदालत में कार्रवाई शुरू करने और उसे आगे बढ़ाने की आवश्यकता पड़ी हो।