नए इलैक्ट्रॉनिक माध्यम - New Electronic Media
नए इलैक्ट्रॉनिक माध्यम - New Electronic Media
जैसा कि हम पहले कह चुके हैं कि उपग्रह प्रणाली के आने के साथ जनसंचार के क्षेत्र में अत्यधिक गतिशीलता आई है। पृथ्वी की कक्षा में विषुवत रेखा के ऊपर एक निश्चित ऊँचाई पर उपग्रह स्थापित किया जाता है। यह भूस्थिर उपग्रह पृथ्वी की कक्षा में एक स्थान पर स्थिर होकर पृथ्वी के साथ घूमने लगता है और प्रसारण की सुविधा प्रदान करता है। इस प्रणाली में पृथ्वी से कुछ सिग्नल उपग्रह की ओर भेजे जाते हैं। उपग्रह उन्हें ग्रहण करके उनका आवर्धन कर देता है और विभिन्न दिशाओं में प्रसारित कर देता है। पृथ्वी पर स्थित अनेक केन्द्र इन सिग्नलों को ग्रहण करके प्रसारित करते हैं। भारत में अन्तरिक्ष कार्यक्रम की कुछ उपलब्धियाँ है-इसरो (1969) भारतीय अंतरिक्ष अनुसन्धान संगठन की स्थापना, अन्तरिक्ष विभाग और अन्तरिक्ष आयोग (1972) का गठन, पहले भारतीय उपग्रह आर्यभट्ट (1975) का प्रक्षेपण भारत में निर्मित पहले उपग्रह प्रक्षेपण वाहन एमएलवी-3 द्वारा रोहिणी नामक पहले उपग्रह (1980) में स्थापित हुआ।
वर्तमान में भारत अन्तरिक्ष कार्यक्रम के लिहाज से विश्व के अग्रणी देशों में एक है। भारतीय उपग्रह तकनीक का लोहा सारा विश्व मानने लगा है और उपग्रह तकनीक के इस विकास ने भारत के संचार तथा जनसंचार को बहुत विस्तार और नयापन दे दिया है।
कम्प्यूटर तथा इन्टरनेट जनसंचार के नए सशक्त माध्यम हैं, जिनके द्वारा केवल मुद्रण- प्रकाशन ही सम्भव नहीं होता अपितु ये सूचनाओं को एकत्रित कर और उन्हें त्वरित गति से प्रसारित करने में भी मददगार साबित हुए हैं। इन्टरनेट के जरिए हम इलैक्ट्रॉनिक समाचार पत्र (ई-पेपर की ओर बढ़ रहे हैं, ई-मेल द्वारा कोई भी संदेश, सूचना, पत्र लेख दुनिया के किसी भी कोने में भेज सकते हैं, डब्ल्यू डब्ल्यू डब्ल्यू (वर्ल्ड वाइड वेब) नामक डेटाबेस द्वारा उपभोक्ता कोई भी इच्छित सूचना पा सकता है। होमपेज, सूचनाभण्डारण विश्वकोश विशेष लेख वीडियो टेक्स्ट और अन्य बहुत सी नवीन उपलब्धियाँ हुई जनसंचार के क्षेत्र में हुई हैं। यहाँ मल्टीमीडिया का जिक्र करना जरूरी है। मल्टीमीडिया नए इलैक्ट्रॉनिक माध्यमों का समुच्चय है, जो जनमाध्यम के लिए साधन का काम करता है। वह सम्प्रेषण के विविध माध्यमों पाठमाला (Text), श्रव्य-दृश्य (Audio-Vedio), आरेखिकी ( Graphics ) सजीव आरेखिकी चित्रण (Animation) का संयोजन करके सूचनाओं को प्रभावोत्पादक ढंग से व्यक्त करता है। टेलीकॉन्फ्रेंन्सिंग के लिए मल्टीमीडिया समुपयुक्त संसाधन है। इसके द्वारा सुदूर क्षेत्रों के विद्यार्थियों के साक्षात्कार लिए जा सकते हैं, किसी विषय विशेषज्ञ के विचारों को सुना देखा जा सकता है।
कुछ अन्य नए इलैक्ट्रॉनिक माध्यम हैं -
पेजर -
टेलीफोन की तरह संचालित छोटी डिब्बी के आकार का उपकरण, जिसमें संदेश लिखित रूप में आते हैं। हालांकि अब यह मोबाइल के विकास के कारण बाजार से गायब हो गया है।
सेल्यूलर मोबाइल फोन -
पेजर का यह विकसित रूप आज जनसंचार का बहुत ही लोकप्रिय माध्यम है।
फैक्स -
किसी लिखित संदेश को लिखित रूप में प्राप्त करने का अनूठा उपकरण है फैक्स फोन तथा कम्प्यूटर के साथ आसानी से जुड़कर यह फोटोस्टेट मशीन की तरह आपका संदेश को दुनिया के किसी भी कोने तक जहां टेलीफोन सम्पर्क हो, भेज सकता है।
ई-मेल -
इन्टरनेट द्वारा संचालित इलैक्ट्रॉनिक मेल सेवा ई-मेल है। यह विद्युतगति से पूरे संसार में कहीं भी पत्र, लेख, संदेश आदि भेजने में समर्थ है। कम्युनिकेटर यह संचार उपकरण अनेक संचार संसाधनों मोबाइल, फैक्स, इन्टरनेट, ई-मेल आदि का सम्मिलित रूप है।
जनसंचार के नए रूप
1. टच टेक्नोलोजी इस तकनीक में कलाई में बँधी घड़ी में फोन तथा सूचना केन्द्र की व्यवस्था कर दी जाती है, जिससे पूरे शरीर में स्वतः प्रेरित संचार होने लगता है। दाहिने हाथ की उंगली कान में रखते ही समाचार सुनाई देने लगते हैं।
2. ब्लूतूथ तकनीक- यह तकनीक संचार की अधुनातन तकनीक है। इसमें दो उपकरणों यथा- मोबाइल को कम्प्यूटर से जोड़ा जाता है। इस प्रणाली द्वारा निकटवर्ती क्षेत्र के सभी सूत्र परस्पर सम्बद्ध हो जाते हैं और रेडियो तरंगों द्वारा परस्पर संचार कर लेते हैं।
3. वैप तकनीक वायरलेस एप्लीकेशन प्रोटोकॉल (WAP) तकनीक का प्रयोग इन्टरनेट से मोबाइल, पेजर, स्मार्टफोन, रेडियो को जोड़ने के लिए किया जाता है। इस सॉफ्टवियर को माइक्रो बाउजर कहते हैं।
4. नियर फील्ड कम्यूनिकेशन तकनीक (NCF) इस तकनीक में दो उपकरणों को आपस में छुआते ही फाइल तथा आंकड़ों का अन्तरण किया जा सकता है।
5. रिसोर्स डिस्क्रिप्शन फ्रेमवर्क तकनीक (RDF) यह तकनीक बेवसाइट पर उपलब्ध सूचनाओं की जानकारी देती है।
6. वायस ओवर इंटर प्रोटोकॉल (VDIP)- इसका प्रयोग इंटरनेट टेलीफोन के लिए होता है।
7. जनरल पैकेज रेडियो सर्विसेज तकनीक (GPRS ) इस तकनीक में सैलफोन हर समय कम्प्यूटर से जुड़ा रहता है। उससे ई-मेल की तुरन्त जानकारी मिल है।
8. वीसैट तकनीक (Sattellite) इस तकनीक द्वारा शीघ्रातिधीघ्र सूचनाएँ मिल जाती है। जहाँ संचार के अन्य साधन नहीं पहुँच सकते हैं, इस तकनीक से वहाँ भी यह सम्भव है।
9. पैन ड्राइव थम्ब फ्लैश आदि नाम से जाना जाने वाला पेन ड्राइव सूचनाओं अभिलेखों, इमेज यानी कंप्यूटर पर उपस्थित सामग्री को संग्रह करने की अद्भुत क्षमता से सम्पन्न उपकरण है।
10. एनीमेशन- यह फिल्मांकन की नई पद्धति है। जिसमें चित्रकारी के द्वारा एक्शन फिल्म का सारा कार्य सम्पन्न कराया जाता है।
इन तमाम नई तकनीकों के कारण जनसंचार माध्यमों ने हमारे लिए सारे संसार को समझना आसान कर दिया है। ई-मेल, वेब, पोर्टल, ई चैटिंग, ब्लॉग, सर्चइंजन आदि कितने कितने संसाधन आज हमें आसानी से उपलब्ध हैं। विकीपीडिया, ए.पी.एस. कॉरपोरेट, हिन्दी नेस्ट कॉम अनुभूति कार्यालय, अभिव्यक्ति, वागर्थ, सरस्वती, भारतदर्शन, आदि दर्जनों हिन्दी बैवसाइट इस समय कार्यरत हैं और तमाम अखबार भी अब इंटरनेट संस्करणों के रूप में इंटरनेट में उपलब्ध हो गए हैं।

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