जनमत विश्लेषण - Opinion Analysis
जनमत विश्लेषण - Opinion Analysis
जनता से मिलजुल कर रहना, उसके साथ तालमेल बिठाकर चलना ही लोक सम्पर्क का आधार होता है। पिछले कुछ दशकों में लोकसम्पर्क की कार्यविधियों में बहुत विकास हुआ है इस विकास को समझने के लिए यह आवश्यक है कि हम उन प्रक्रियाओं से परिचित हो, जिनके आधार पर सम्पर्क विशेषज्ञ जनता तक अपना संदेश पहुंचाता है।
लोकसम्पर्क अधिकारी सबसे पहले उस समस्या को समझता है जिस पर उसको अपना पक्ष जनता के सामने रखना होता है। उद्योगों का राष्ट्रीयकरण हो या नई मोटर कारों की बिक्री सबसे पहले समस्या से सम्बद्ध तथ्य और आंकड़े इकट्ठे करके सारी स्थिति को देखना व परखना पड़ता है। इसके पश्चात लोकसम्पर्क का संदेश क्या होगा, यह निर्धारित किया जाता है। फिर यह संदेश किस प्रकार जनता के सामने रखा जाएगा इसका निर्णय किया जाता है। शिक्षित वर्ग के लिए प्रचार साहित्य तथा प्रायः अशिक्षित जन समुदाय के लिए रेडियो चलचित्र, टेलीविजन, प्रदर्शनी आदि में से कौन से साधन उपयुक्त होंगे, इसका फैसला करना होता है। इसके पश्चात अंतिम प्रश्न होता है, पब्लिसिटी या प्रोपेगेंडा अभियान किस सीमा तक सफल हुआ? लोगों की प्रतिक्रिया क्या है और अगला पग क्या
होना चाहिए? इन बातों का आकलन करके ही जनमत का विश्लेषण पूरा होता है।
प्रभावशाली लोकमत निर्माण के लिए लोकसम्पर्क करते समय निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखना आवश्यक है -
1. स्पष्टता जिस सूचना का प्रसारण हो और जिस समस्या के निराकरण के लिए वह सूचना दी जा रही है, उसकी स्पष्ट और पूरी जानकारी होना तथा इस जानकारी को लोगों तक सही व स्पष्ट ढंग से पहुंचाना अति आवश्यक है। ऐसा न होने पर जनता उसे समझ ही नहीं पायेगी और जब समझ ही नहीं पायेगी तो उसका क्या प्रभाव पड़ेगा? अन्यथा जनता उसे समझ ही न पाएंगे तो प्रभाव क्या पड़ेगा? सूचना की स्पष्टता ही माध्यम के चुनाव की प्रक्रिया को सरल करती है।
2. पूर्णता कभी भी सूचना अधूरी नहीं दी जानी चाहिए, उसमें पूर्णता होनी चाहिए। अधूरी सूचना का प्रभाव तो कुछ होगा नहीं उल्टे शंकाओं और भ्रम को और बढ़ावा मिलेगा। ऐसी स्थिति में सही उद्देश्य तक ही नहीं पहुंचा जा सकता।
3. स्रोत की सच्चाई जिस स्रोत से जानकारी ली जाए, वह सही व सच्चा होना चाहिए अन्यथा सूचना असत्य, अपूर्ण व अस्पष्ट रह जायेगी। स्त्रोत ऐसा भी रहना चाहिए कि सूचना प्राप्त करने वाले उस पर विश्वास करें।
4. संक्षिप्तता जनता में लम्बी-लम्बी वार्ताएं व सूचनाएं सुनने व पढ़ने का न धैर्य होता है न ही समय इस वजह से सही सटीक संक्षिप्त सूचनाएं अधिक प्रभावशाली होती है।
5. प्रतिक्रिया जानना जनसम्पर्क मात्र सूचना देने की प्रक्रिया नहीं है। उससे दी गयी सूचनाओं के सम्बन्ध में जन समूह की प्रतिक्रिया या प्रभाव की जानकारी भी लेकर उसी के अनुसार अपने कार्यक्रमों में परिवर्तन करना चाहिए। इस मामले में जन प्रतिक्रिया का अध्ययन बेहद जरूरी है।
6. विश्वसनीयता जनसम्पर्क में जनता सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। जनसमूह के दृष्टिकोण उनकी रूचि, उनकी पृष्ठभूमि जाने बिना विश्वास नहीं पाया जा सकता और विश्वास जाग्रत किये बिना लक्ष्य पाना असम्भव है।
उपरोक्त बातों को ध्यान में रखकर जब जनमत का विश्लेषण किया जाता है तभी वह एक अच्छा जनसम्पर्क होता है। जब अच्छा जनसम्पर्क होता है तभी अच्छे जनमत / लोकमत का निर्माण होता है। अत: हम कह सकते हैं कि एक अच्छे लोकमत या Social engineering के लिए उपरोक्त सभी छह कारकों का होना आवश्यक है। तभी एक अच्छे जनमत का निर्माण हो सकता है।
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