गैर सरकारी संगठन में सूचना का अधिकार का प्रयोग - Use of Right to Information in NGO
परिधि और विस्तार perimeter and extension
प्रारंभ की तिथि: सूचना का अधिकार 12.10.2005 से लागू हुआ था।
उद्देश्य प्रत्येक लोक प्राधिकरण की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व को बढ़ाने के लिए, लोक प्राधिकरणों के नियंत्रण में सूचना तक नागरिकों की पहुँच को सुनिश्चित करने के लिए, सूचना के अधिकार की एक व्यावहारिक व्यवस्था स्थापित करना इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य है।
सूचना : धारा 2 (1) के अनुसार सूचना का अभिप्राय किसी इलेक्ट्रॉनिक रूप में धारि अभिलेख, दस्तावेज ज्ञापन, ई-मेल सलाह, प्रेस विज्ञप्ति परिपत्र, आदेश लाग बुक, संविदा, रिपोर्ट, कागजपत्र, नमूने, मॉडल आंकड़ों संबंधी सामग्री और किसी प्राइवेट निकाय से संबंधित ऐसी सूचना सहित, जिस तक तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन किसी लोक प्राधिकारी की पहुंच हो सकती है, किसी रूप में कोई सामग्री से है।
अभिलेख : धारा 2 (i) में, अभिलेख की परिभाषा में निम्न को शामिल किया गया है
(i) कोई दस्तावेज, पाण्डुलिपि और फाइल,
(ii) किसी दस्तावेज की कोई माइकोफिल्म, माइकोफिशे और प्रतिकृति प्रति
(iii) ऐसी माइकोफिल्म में सन्निदिष्ट प्रतिबिम्ब या प्रतिबिम्बों का पुनरुत्पादन (चाहे) वर्धित रूप में हो या न हो), और
(iv) किसी कम्प्यूटर द्वारा या किसी अन्य युक्ति द्वारा उत्पादित कोई सामग्री। सूचना के अधिकार का अर्थ धारा 2 (j) में सूचना के अधिकार' को इस प्रकार परिभाषित किया गया है:
" (j) "सूचना का अधिकार" से इस अधिनियम के अधीन पहुँच योग्य सूचना का, जो किसी लोक प्राधिकारी द्वारा या उसके नियंत्रणाधीन धारित है, अधिकार अभिप्रेत हैं, और जिसमें निम्नलिखित का अधिकार सम्मिलित है:-
(i) कृति दस्तावेजों, अभिलेखों का निरीक्षण,
(ii) दस्तावेजों या अभिलेखों के टिप्पण, उद्धरण या प्रमाणित प्रतिलिपि लेना
(iii) सामग्री के प्रमाणित नमूने लेना
(iv) डिस्केट, फ्लापी, टेप, वीडियों के रूप में या किसी अन्य इलेक्ट्रानिक रीति में या प्रंटआउट के माध्यम से सूचना को जहाँ ऐसी सूचना किसी कम्प्यूटर या किसी अन्य यूंक्ति में भण्डारित हैं, अभिप्राप्त करना सूचना के अधिकार के लिए पात्र व्यक्ति : अधिनियम की धारा 3 अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार, सभी नागरिकों को सूचना का अधिकार प्रदान करती है। अतः कोई भी नागरिक इस कानून के अधीन पहुँच योग्य सूचना का खुलासा करने के लिए एक लोक प्राधिकरण को आवेदन कर सकता है।
अधिनियम के तहत अभिप्राप्य सूचना: एक लोक प्राधिकरण द्वारा धारित या नियंत्रणाधीन प्रत्येक सूचना एक नागरिक के लिए अभिप्राप्य होगी, जब तक वह सूचना खुलासा करने से विमुक्त न हो। खुलासा करने से विमुक्त सूचना: निम्नलिखित खुलासा करने से विमुक्त है:
1. राष्ट्रीय सुरक्षा, आदि को प्रभावित करने वाली सूचना,
2. न्यायालय के आदेश द्वारा वर्जित सूचना,
3. विधान सभा का विशेषाधिकार प्राप्त सूचना,
4. व्यापारिक भेद बौद्धिक संपत्ति अधिकार आदि
5. वैश्वासिक संबंध के तहत प्राप्त सूचना,
6. विदेशी सरकार से प्राप्त गोपनीय सूचना,
7. किसी व्यक्ति के जीवन या सुरक्षा को संकट में डालने वाली सूचना,
8. किसी अन्वेषण या अभियोजन कार्यवाही को प्रभावित करने वाली सूचना,
9. मंत्रीमंडल के दस्तावेज
10. किसी व्यक्ति की गोपनीयता में हस्तक्षेप करने वाली सूचना,
11. कॉपीराइट का अतिक्रमण और
12. विनिर्दिष्ट आसूचना और सुरक्षा संगठनों से संबंधित सूचना ।
सूचना जो खुलासा करने से विमुक्त नहीं है। पूर्ववर्ती अनुच्छेद में वर्णित खुलासे से विमुक्ति निम्न स्थितियों में लागू नहीं होगी:
1. ऐसी सूचना जो संसद या किसी राज्य विधान सभा को मना नहीं की जा सकती।
2. जहाँ सूचना का खुलासा करने से किसी सुरक्षित हित को होने वाले नुकसान लोकहित अधिक महत्वपूर्ण हो।
3. किसी घटना, बात या विषय, जो सूचना के आवेदन की तिथि से 20 वर्ष पहले घटित हुई हो, से संबद्ध सूचना, धारा 8(1)(a). (c) या (i) [अर्थात् पूर्ववर्ती अनुच्छेद के पद (1) (3) और (9)] के तहत आने वाली सूचना को छोड़कर।
4. दूसरी अनुसूची में विनिर्दिष्ट या किसी राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित आसूचना और सुरक्षा संगठनों के संबंध में भ्रष्टाचार और मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों से संबंधित सूचना।
मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों से संबंधित सूचना केन्द्र / राज्य सूचना आयोग (जैसी भी स्थिति हो) के अनुमोदन के बाद ही, आवेदन ही आवेदन प्राप्ति की तिथि से 45 दिनों के भीतर प्रदान की जाएगी। आंशिक रूप से विमुक्त सूचना : यदि मांगी गई सूचना का कोई भाग खुलासे से विमुक्त हो, तो अभिलेख का केवल वह भाग उपलब्ध कराया जाएगा जिसमें खुलासे से विमुक्त सूचना न हो तथा जिसे विमुक्त सूचना वाले भाग से विवेकपूर्वक अलग किया जा सके ।

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