विज्ञापन के प्रारम्भिक माध्यम - Primary Medium of Advertising
विज्ञापन के प्रारम्भिक माध्यम - Primary Medium of Advertising
विज्ञापन का इतिहास मानव सभ्यता के इतिहास से जुड़ा माना जा सकता है। मिश्र के पिरामिड या चीन की दीवार एक प्रकार से अपने दौर की महान सभ्यताओं के विज्ञापन ही तो है। राजवशों के राजचिन्ह, ध्वज आदि भी एक प्रकार के विज्ञापन ही थे। सभ्यता के विकास के साथ-साथ संचार के माध्यम भी बदलते रहें हैं और उन्हीं के साथ विज्ञापनों का स्वरूप और माध्यम भी बदलता रहा है। प्राचीन सभ्यताओं में डुगडुगी बजाकर राजाज्ञा का वाचन किया जाता था जो एक प्रकार का प्रारम्भिक विज्ञापन ही था चित्रों द्वारा भी सूचनाएं दी जाती थीं। अशोक के स्तम्भ और उन पर उत्कीर्ण लेख एक तरह का विज्ञापन ही हैं। बौद्ध धर्म प्रचारकों के धर्म संदेश भी एक प्रकार से धर्म का विज्ञापन ही होते थे और इन संदेशों ने बौद्ध धर्म के प्रचार प्रसार में अभूतपूर्व भूमिका भी निभाई थी। सन् 1440 में आधुनिक मुद्रण कला के आविष्कार के साथ ही विज्ञापन कला को भी एक नया आयाम मिल गया और परचों (हैण्डबिल) तथा पोस्टरों के जरिए विज्ञापन किए जाने का सिलसिला शुरू हो गया।
प्राचीन शहर पम्पई के अवशेषों में दुकानों (सामान मिलने वाली जगहों) की दीवारों पर इस तरह के प्रतीक चिन्ह मिले हैं जिनसे यह पता चलता था कि वहां पर कौन सी वस्तु उपलब्ध है। प्राचीन रोम और ग्रीस की दुकानों के बाहर भी चिन्ह होते थे। इसी प्रकार सिंधु घाटी के अवशेषों में प्राप्त मोहरें भी एक प्रकार का प्रतीक चिन्ह या ट्रेडमार्क ही थीं। इस तरह के सभी चिन्हों, प्रतीकों या मोहरों को विज्ञापन के वाह्य माध्यम कहा जा सकता है। ये बाह्य माध्यम विज्ञापन के सबसे प्रारम्भिक माध्यम हैं। दीवारों, सार्वजनिक स्थलों तथा यातायात के साधनों पर चित्रित किए जाने वाले विज्ञापन बाह्य माध्यम कहलाते हैं।
1473 में अंग्रेजी भाषा में पहला प्रतीक चिन्ह मुद्रित कर विलियम कैक्सटन ने पहले मुद्रित विज्ञापन के निर्माण का सूत्रपात किया और 1477 में उसी ने अंग्रेजी में पहला पोस्टर (हैण्ड बिल) छाप कर मुद्रित विज्ञापन की शुरुआत की। 16वीं और 17वीं सदी में अधिकतर विज्ञापन अंग्रेजी के हाथ से लिखे हुए पोस्टरनुमा हैण्डबिलों के रूप में ही होते थे।
1622 में वीकली न्यूज़ ऑफ लंदन का प्रकाशन शुरू हुआ और 1625 में पहली बार इसमें एक विज्ञापन प्रकाशित हुआ जो एक जहाज के आने की सूचना देता था। मुद्रित माध्यमों में पहला व्यावसायिक विज्ञापन 1652 में प्रकाशित कॉफी का विज्ञापन था। 1657 में चॉकलेट और 1658 में चाय का पहला विज्ञापन प्रकाशित हुआ था।
प्रारम्भिक विज्ञापन माध्यमों में वाह्य माध्यमों और मुद्रित माध्यमों के साथ-साथ डाक माध्यमों का भी अहम स्थान है। उन्नीसवीं सदी में राजकीय डाक सेवा शुरू होने के साथ ही अमेरिका और यूरोप सहित भारतीय उपमहाद्वीप में भी डाक माध्यम का इस्तेमाल विज्ञापनों के प्रसार के लिए प्रारम्भ हो गया। भारत में कपड़ा उत्पादकों और पुस्तक प्रकाशकों ने अपने उत्पादों के प्रचार के लिए डाक द्वारा मुद्रित प्रचार सामग्री उपभोक्ताओं तक पहुंचाने की शुरुआत की थी।
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