प्रधान मंत्री रोजगार योजना - Prime Minister's Employment Scheme



प्रधानमंत्री रोजगार योजना - Prime Minister's Employment Scheme

प्रधान मंत्री रोजगार योजना आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के शिक्षित युवाओं को स्वरोजगार उपलब्ध कराने के लिए 2 अक्टूबर 1993 को यह योजना शुरू की गई थी।इस योजना का उद्देश्य उद्योग, सेवा और व्यापार क्षेत्र में स्वरोजगार उद्यम स्थापित करने के लिये पात्र युवकों को सहायता प्रदान करना है। यह योजना शहरी और ग्रामीण क्षेत्र दोनों के लिये है। इस योजना के अन्तर्गत पात्र युवकों की आयु, शैक्षिक योग्यता, पारिवारिक आय तथा उनके निवास स्थान आदि को ध्यान में रखते हुए सहायता दी 5 लाख रु तक की कोई परियोजना चलाने के लिये कोलेटरल 111/146 धनराशि की वापसी सामान्य ब्याज दर के आधार पर 3 से 7 वर्ष की अवधि में दी जाएगी। महिलाओं सहित कमजोर वर्गों को प्राथमिकता दी जाएगी। इस योजना में ( SC/ST ) के लाभार्थियों की संख्या 22.5% तथा अन्य पिछड़ा वर्ग की संख्या 27% से कम नहीं होनी चाहिए । प्रत्येक ऋण प्राप्त उद्यमी को समुचित प्रशिक्षण दिया जायेगा। ग्राम पंचायतों जैसी संस्थाओं को सम्बंधित क्षेत्र में स्थित उम्मीदवारों को चुनने और उनकी सिफारिश करने का अधिकार होगा ताकि सही व्यक्ति को ऋण प्राप्त हो सके और ऋण वसूली भी समुचित रूप से हो सके। बैंकों के साथ-साथ जिला उद्योग केंद्र और उद्योग निदेशालय इस योजना के कार्यान्वयन के लिये मुख्य रूप से जिम्मेदार होंगे।


ग्रामीण रोजगार सृजन कार्य मई 1994 में प्रस्तुत की गई उच्चाधिकार प्राप्त समिति की सिफारिशों के आधार पर खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग के 1 अप्रैल 1995 से ( KVI ) क्षेत्र में 20 लाख रोजगार उत्पन्न कराने के लिये इस योजना की शुरूआत की थी।


उद्देश्य :


1. ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन करना,


2. ग्रामीण बेरोजगार युवकों में उद्यमीय क्षमता और दृष्टिकोण विकसित करना, 


3. ग्रामीण औद्योगीकरण का लक्ष्य प्राप्त करना,


4. ग्रामीण उद्योगों के लिये अधिकाधिक ऋण उपलब्ध कराने के लिये वित्तीय संस्थाओं की भागीदारी को सुलभ बनाना। 


उपभोक्ता सभा: यह योजना 2002 में प्रारम्भ की गई थी। इसके अनुसार सरकार से मान्यता प्राप्त बोर्डो / विश्वविद्यालयों से सम्बद्ध प्रत्येक मिडिल / हाई / हायर सेकेन्ड्री स्कूल / कॉलेज में एक उपभोक्ता क्लब स्थापित किया जायेगा। इस योजना को 1.4. 2004 से विकेन्द्रीकृत करके राज्यों / संघ राज्य क्षेत्रों की सरकारों को सौंप दिया गया है। इस योजना के अधीन प्रत्येक उपभोक्ता क्लब का 10,000रू का अनुदान दिया जा सकता है। सभी इच्छुक गैर-सरकारी संगठन ( NGOs V.C.Os ) अपने-अपने राज्यों / संघ राज्य क्षेत्रों के खाद्य सार्वजनिक वितरण और उपभोक्ता कल्याण विभाग में तैनात नोडल अधिकारी को आवेदन दे सकेंगे।


उपभोक्ता संरक्षण और उपभोक्ता कल्याण में अनुसंधान संस्थाओं / विश्वविद्यालयों/ कॉलेजों के सहयोग को बढ़ावा देने की योजना


उद्देश्य


1. उपभोक्ता कल्याण के क्षेत्र में अनुसंधान एवं मूल्यांकन अध्ययन प्रायोजित करना ।


2. उपभोक्ताओं की व्यवहारिक समस्याओं का पता लगाना। 


3. उपभोक्ताओं के सामने आने वाली व्यावहारिक समस्याओं का हल उपलब्ध कराना।


4. उपभोक्ताओं के संरक्षण एवं कल्याण हेतु नीति / कार्यक्रम योजना बनाने के लिये अपेक्षित जानकारी उपलब्ध कराना।


5.अनुसंधान और मूल्यांकन अध्ययनों के परिणामों तथा अन्य संबंधित साहित्य के प्रकाशन के लिये सहायता उपलब्ध कराना।


6. उपभोक्ताओं से सम्बंधित मामलों पर सेमीनारों / कार्यशालाओं / सम्मेलनों को प्रायोजित करना तथा इनके लिये सहायता मंजूर करना।

ग्रामीण अनाज बैंक योजना उद्देश्य इस योजना का मुख्य उद्देश्य प्राकृतिक आपदा अथवा कमी वाले मौसम के दौरान होने वाली भूखमरी से सुरक्षा प्रदान करना है। 


मुख्य विशेषतायें :


1. अनाज बैंकों को जैसा कि बाढ़ बहुल, गर्म और सर्द रेगिस्तानी, आदिवासी एवं दूरस्थ पहाड़ी क्षेत्रों में स्थापित किया जाना है। ग्रामों में अनाज की कमी वाले क्षेत्रों में गरीबी की रेखा से नीचे रहने वाले सभी इच्छुक परिवारों को इसमें शामिल किया जायेगा।


2. ग्राम पंचायतें / ग्राम सभा अथवा राज्य सरकारों द्वारा अनुमोदित गैर-सरकारी संगठन इन बैंकों का संचालन करने के पात्र होंगे। ऐसी प्रत्येक कार्यकारी समिति में एक महिला सदस्य अवश्य रहेगी।


घटक एक अनाज बैंक को तैयार करने की अनुमानित लागत 60,000 रुपये है। छात्रावासों और कल्याणकारी संस्थाओं को अनाज भेजने की योजनाः छात्रावासों / कल्याण संस्थाओं अर्थात् ऐसे गैर सरकारी संगठन / धर्मार्थ संस्थाओं, जो बेघर लोगों की सहायता करती है की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए राज्यों आदि को गरीबी रेखा के नीचे के अंतर्गत आवंटित कोटे से 5% और अधिक अनाज दिया जाता है। यह योजना 2002-03 में शुरू की गई थी।


भवन निर्माण और उपकरणों के लिये सांस्कृत व स्वैच्छिक संस्थानों को दी जाने वाली वित्तीय सहायता की योजना के उद्देश्य भवन निर्माण और उपकरणों को खरीदने के लिये अनुदान उन सांस्कृतिक संस्थाओं को देना जो कि डांस, ड्रामा, थियेटर, संगीत, ललित कला जैसे क्षेत्रों में कार्यरत हैं।


बौद्ध और तिब्बती संस्कृति एवं कला के संरक्षण के लिये वित्तीय सहायता योजना के उद्देश्य : इस योजना का उद्देश्य बौद्ध / तिब्बती संस्कृति और परंपराओं को बढ़ावा देने और इसके वैज्ञानिक विकास में लगे हुए मोनास्ट्रीज सहित स्वैच्छिक बौद्ध/तिब्बती संगठनों को तथा सम्बंधित क्षेत्रों में अनुसंधान कार्यक्रमों के लिये वित्तीय सहायता प्रदान करना है।


हिमालय की सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण और विकास की योजना के उद्देश्य : इस योजना का उद्देश्य हिमालय की सांस्कृतिक धरोहर को बढ़ावा देना इसका संरक्षण करना और इसको सुरक्षित करना है, जिसके लिये संस्थाओं एवं स्वैच्छिक संगठनों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। इस योजना में निम्नलिखित कार्य शामिल हैं: 


1. सांस्कृतिक धरोहर के सभी पहलुओं का अध्ययन एवं अनुसंधान


2. लोक नृत्य, संगीत, नृत्य एवं साहित्य सहित सांस्कृतिक कला के दस्तावेज तैयार करना और कलात्मक वस्तुओं का संग्रहण करना।


3. कला और संस्कृति के कार्यक्रम के माध्यम से प्रसार 


4. लोक कला और परंपरागत कलाओं में प्रशिक्षण


5. संग्रहालयों एवं पुस्तकालयों की स्थापना में सहायता देना।


आदिवासी / लोककला और संस्कृति के प्रचार / प्रसार और बढ़ावा देने के लिए वित्तीय सहायता योजना के उद्देश्य इस योजना के उद्देश्य इस प्रकार हैं:


i)  आदिवासियों को अपनी-अपनी सांस्कृतिक गतिविधियों, जैसे कि उत्सवों का आयोजन आदि को चलाने का अवसर प्रदान करना और उनकी कला और शिल्प का संग्रह एवं संरक्षण करना ताकि यह निस्तर चलता रहे।


ii.) ऐसी कलात्मक और शिल्पकारी के दस्तावेज तैयार करना, अनुसंधान एवं सर्वेक्षण को बढ़ावा देना, विशेष रूप से उनकी फोटोग्राफिक रिकार्ड तैयार करना जिससे कि तीव्र विकास के परिणामस्वरूप लुप्त होती हुई ग्रामीण भारत की विरासत को संजोया जा सके।


iii.) सम्बंधित राज्य सरकारों की शैक्षिक प्राधिकारियों को उन परियोजनाओं का पता लगाने में सहायता देना जो आदिवासी और ग्रामीण लागों की सांस्कृतिक परम्पराओं को प्रोत्साहित करने में सहायक हों।


iv.) आदिवासी / ग्रामीण संस्कृति के महत्व की जानकारी प्रदान करना खासकर शहरी इलाके के लोगों में, ताकि उन्हें भी आदिवासी संस्कृति के विभिन्न पहलुओं की जानकारी हो सके और वे इसके महत्व को भी समझ सकें


V.) अन्य सभी साधनों से आदिवासी कला और शिल्प तथा आदिवासी संस्कृति के अन्य पहलुओं के संरक्षण और विकास को बढ़ावा देना। 


Vi.) क्षेत्रीय और स्थानीय संग्रहालय के प्रोत्साहन हेतु और इन्हें सुदृढ़ बनाने के लिये 


वित्तीय सहायता योजना के उद्देश्य : इस योजना का उद्देश्य क्षेत्रीय राज्य और स्थानीय स्तर पर व्यावसायिक रूप में संग्रहालयों की स्थापना और उनके आधुनिकीकरण

को बढ़ावा देना है। इस योजना के अन्तर्गत सोसाइट / पंजीकरण संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की योजनाओं के अन्तर्गत पात्र संस्थाओं एवं उनसे सम्बन्धित प्रमुख शर्तें आती है। 


उपभोक्ता मामलों खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय की योजनाएं उपभोक्ता मामलो का विभाग इसके अन्तर्गत उपभोक्ता कल्याण निधि आर्थिक सहयोग की योजनाए व प्रोजेक्ट उपभोक्ता सभा संरक्षण कल्याण में अनुसंधान संस्थाओं / विश्वविद्यालयों कलेजो के सहयोग को बढ़ावा देने की योजना - 


● संस्कृत मंत्रालय की योजनाए


● पर्यावरण और वन मंत्रालय की योजनाएं


● खाद्य परिष्करण उद्योग मंत्रालय की योजनाए मदर एन० जी० ओ० योजना


● सर्विस एन०जी० ओ० योजना स्ट्रीलाइजिंग बेड्स योजना


● स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की योजना


● आयुष विभाग की योजनाएं


● इसके अन्तर्गत कुष्ठ रोग सर्वेक्षण, शिक्षा और उपचार राष्ट्रीय अंधता नियंत्रण कार्यक्रम


● राष्ट्रीय कैंसर नियंत्रण कार्यक्रम


● पोलियो पीड़ित बच्चों की Currective Surgery और पुर्नवास के लिये


● वित्तीय सहायता की योजना


● राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन के कार्यक्रम


● आयुष विभाग की योजनाएं


● राष्ट्रीय चिकित्सा पौधा बोर्ड


● गृह मंत्रालय की योजनाएं


● प्रयोजक अनुसंधान के लिये राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के दिशानिर्देश


● साम्प्रदायिक सद्भावना के लिए राष्ट्रीय फाउन्डेशन की योजना


● आवास एवं शहरी निर्धनता उन्मूलन की योजनाएं


● शहरी बेघर लोगों के लिए रैन बसेरा योजना