परियोजना प्रबंधन - Project Management
परियोजना प्रबंधन Project Management
परियोजना प्रबंध संस्थान (यू.एस.ए.) ने परियोजना प्रबंध को परिभाषित करते हुए बताया कि यह एक ऐसा प्रयत्न है जो कि विशेष उत्पाद या सेवाओं का सृजन करना है यह विशिष्ट उद्देश्यों को प्राप्त करने हेतु मानवीय एवं गैर मानवीय संसाधनों को प्रयुक्त करने का विशिष्ट तरीका है ।
किसी परियोजना के निम्न तत्व होते हैं -
उद्देश्य एवं उपयोगिता
इससे जुड़े कार्यकलाप
समयावधि
उसमें लगने वाली लागत
परियोजना प्रबन्ध की संकल्पनाएं -
परियोजना प्रबन्ध से सम्बन्धित ज्ञान के क्षेत्र में 9 निकायों की पहचान परियोजना प्रबन्ध संस्थान द्वारा की गयी है। ये निम्नलिखित हैं:
1) स्वीकृत प्रबन्धन
2) अवसर प्रबंधन
3) समय प्रबंधन
4) लागत प्रबन्धन
5) गुणवत्ता प्रबंधन
6) जोखिम प्रबंधन
7) मानव संसाधन प्रबंधन
8) संचार प्रबन्धन
9) उपलब्धि प्रबन्धन
परियोजना प्रबन्ध की प्रक्रिया
परियोजना प्रबन्ध प्रक्रिया के तहत किसी परियोजना के विस्तार से लेकर उसकी समाप्ति तक अपनायी जाने वाली समस्त चरण एवं गतिविधियां इसका हिस्सा होती हैं।
परियोजना में अपनायी जाने वाली विभिन्न प्रक्रियाएँ निम्न हैं:
1) शुरुआती प्रक्रिया
2) नियोजन की प्रक्रिया
3) निष्पादन की प्रक्रिया
4) नियन्त्रणकारी प्रक्रिया
5) समापन की प्रक्रिया
प्रबन्ध प्रक्रिया
प्रबंध प्रक्रिया के मुख्य कार्य जिसका उल्लेख लूथर एच. गुलिक ने किया निम्न हैं :
● योजना बनाना
● संगठित करना
● स्टॉफ की व्यवस्था करना
● निर्देश देना
● नियंत्रण करना
● समन्वयन करना
●रिपोर्ट तैयार करना
● बजट बनाना
1) योजना बनाना :- इच्छित उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु तथा इसकी प्राप्ति के लिए दिशा का निर्धारण इसके अन्तर्गत किया जाता है।
2) संगठित करना :- इसके अन्तर्गत निम्नलिखित को समाहित किया जाता है :
◆ उद्देश्यों की पूर्ति के लिए आवश्यक क्रियाओं का निर्धारण
◆ कार्यकलाप समूहों का गठन
◆ प्रबन्धन एवं कार्यकलाप समूहों के बीच समन्वयन
3) स्टॉफ की व्यवस्था करना :- प्रबन्धकीय और गैर-प्रबन्धकीय स्तर पर स्टॉफ की नियुक्ति करना महत्वपूर्ण प्रकार्य है इसमें ध्यान रखने योग्य है कि नियुक्ति करते समय लोगों की तकनीकी और क्रियात्मक सामर्थ्य के साथ ही उनकी सामाजिक और मनोवैज्ञानिक पृष्ठभूमि को समझना।
4) निर्देशन :- इसके तहत वांछित लक्ष्य की प्राप्ति हेतु नेतृत्व सम्प्रेषण, अभिप्रेरणा तथा पर्यवेक्षण प्रदान करना शामिल है ।
5) समन्वयन:- किस संगठन के विभिन्न विभागों को दिए गए कार्यकलापों तथा संगठन के उद्देश्यों के बीच समन्वयन स्थापित करना।
6) रिपोर्ट करना :- प्रबन्धन को विभिन्न विभागों और खंडों को दिए गए कार्यों तथा उनके निष्पादन संबंधी सूचना को संग्रहित रखना आवश्यक होता है । निष्पादित किए गए कार्यों, तथा निष्पादन में हुयी प्रगति को रिपोर्ट में शामिल किया जाता है । इसके लिए आवश्यक है कि प्रबंधन एक अच्छी रिपोर्ट प्रणाली बनाए ।
7) बजट बनाना - बजट, संसाधनों के आंवटन तथा विभिन्न कार्यों के लिए उपलब्ध संसाधनों को प्राप्त कराने को दर्शाता है।
8) नियंत्रण :- इसके अन्तर्गत वह कार्यकलाप शामिल होते हैं जो यह सुनिश्चित करते हैं कि घटनाएँ पूर्व नियोजित पथ से विचलित नहीं हों । इसमें प्रगति पर निगरानी तथा आवश्यक होने पर सुधारात्मक कार्यवाही भी शामिल होती है इस प्रक्रिया के माध्यम से संशोधन तथा नई योजनाओं के निर्माण के लिए भी जानकारी प्राप्त होती है ।
परियोजना की पहचान
परियोजना की पहचान हेतु निम्नलिखित प्रश्नों को दृष्टिगत रखना चाहिए :
● क्या भौतिक अवस्थिति, विन्यास, संरेखण आदि सहित इसकी तकनीकि विशेषताएँ प्रथम दृश्य युक्ति संगत है?
● क्या अपेक्षित कच्चे माल और ऊर्जा की वास्तविक और संभावित उपलब्धता के आधार पर उसके सकल प्रचालन के लिए सामग्री की स्थिति मौजूद है? क्या अपेक्षित मुख्य जनशक्ति वहां पहले से उपलब्ध है अथवा उसके शीघ्र विकास के लिए परिस्थितियाँ मौजूद हैं?
● क्या जो परियोजना बना रहे हैं उसकी लोगों को आवश्यकता है, लोगों की उसमें भागीदारी किस हद तक सुनिश्चित की गयी है?
●क्या आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता है?
यदि उपरोक्त का उत्तर सकारात्मक है तो परियोजना का कल्पना को मूर्त रूप देने के लिए परियोजना का ब्लू प्रिंट बनाया जाना चाहिए। परियोजना की पहचान हम क्यों, कौन कहाँ, कैसे आदि प्रश्नों को ध्यान में रखते हुए कर सकते हैं। परियोजना क्यों शुरू करना चाहते हैं, उसका उद्देश्य एवं लक्ष्य क्या है, इसके लिए उपलब्ध संसाधन कहाँ से उपलब्ध होंगे परियोजना का क्रियान्वयन कैसे होगा परियोजना की आवश्यकता क्या है, कौन लोग इससे लाभान्वित होंगे, उनकी सामाजिक आर्थिक पृष्ठभूमि क्या है इसको दृष्टिगत रखना चाहिए।

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