जनता और जनसमूह - Public and Masses
जनता और जनसमूह - Public and Masses
लोकमत के विश्लेषण में "जनता" और "जनसमूह" के भेद को भी समझना जरूरी है। रेडियो पर कोई भाषण हुआ। लोगों ने अपने-अपने घरों दुकानों, बाजारों में सुना इसके प्रभाव क्षेत्र में जो आए वह उसकी "पब्लिक" अर्थात "जनता" है। इसके विपरीत जब किसी व्यक्ति ने सार्वजनिक मंच पर खड़े होकर जनसमूह को संबोधित किया तो स्थिति कुछ और होती है तब वहां सुनने वाले एक सामूहिक इकाई जैसे होते हैं। एक व्यक्ति एक समय पर एक ही जनसमूह में शामिल हो सकता है। लेकिन पहली अवस्था में उसकी गणना अलग-अलग विषय की "जनता" में होती है। जैसे उसने घर पर बैठे रेडियो सुना और समाचार पत्र पढ़े यहां वह जनता के रूप में होता है। मगर जब वह बहुत से लोगों के साथ मिलकर किसी बात को सुनता है तो वह जनसमूह में होता है जब व्यक्ति जनसमूह में होता है तो प्रायः उसके विवेक को सामूहिक उत्तेजना प्रभावित कर सकती है और जनमत द्वारा विस्फोट हो सकता है। दंगे-फसादों में यही प्रवृत्ति काम करती है क्योंकि जनसमूह के सामने भड़कीले भाषण दिये जाते हैं या नारे लगाए जाते हैं। दूसरी और अपने-अपने घरों के अलग-अलग वातावरण में रेडियो सुनने वाली या समाचार पत्र पढ़ने वाली जनता की प्रतिक्रिया किसी और तरीके से प्रकट होती हैं।
जनमत के कई स्तर होते हैं। कई बातें ऐसी होती हैं जो हमारे समाज में परम्परा से चली आती हैं और वे हमारे विश्वास और संस्कृति का अभिन्न अंग बन जाती हैं। इस प्रकार कालांतर में समाज द्वारा मान्यता प्राप्त मूल्य उभर आते हैं, जिनसे जनमत को सामयिक घटनाओं के गुण-दोष परखने में सहायता मिलती है।
आधारभूत विश्वास (जो परंपरागत रूप से चल कर आ रहा है) और सामयिक प्रतिक्रिया (जो वर्तमान में घटित हो रहा है) में क्या अंतर है, इसका उत्तर देना कठिन है, क्योंकि आज जो बात हमें बिल्कुल नई मालूम होती है और जिस पर सहज स्वभाव से हम अपनी पसंद या नापसन्द प्रकट कर देते हैं, वही बात समय बीतने पर या फिर से विचार करने पर हमारे विश्वास और परम्परा का अंग बन जाती है।
सामाजिक व राजनीतिक आंदोलनों में अहिंसा के सिद्धांत पर विचार करें तो यह भी सामयिक व परम्परागत रूप से भारत में देखने को मिलता है। भारतीय समाज का अहिंसा में विश्वास परम्परागत है किन्तु गांधी जी राजनीति के क्षेत्र में इसका प्रयोग करने में सफल हुए और यही कारण था कि वह केवल भारत का ही नहीं अपितु पूरे विश्व का लोकमत / जनमत जीतने में सक्षम रहे। यह भी मानना पड़ेगा कि यदि वातावरण अनुकूल न होता. तो जिस प्रकार गांधी जी से पूर्व अनेक साधु-सन्तों ने अहिंसा का प्रचार किया किन्तु उनका प्रभाव धार्मिक क्षेत्र से आगे न बढ़ सका। इसी प्रकार गांधी जी के प्रयत्न भी असफल ही रहते। परन्तु जब उन्होंने हमारे राष्ट्रीय जीवन में प्रवेश किया तो जनता विदेशी शासन से मुक्ति पाने को लेकर जागृत हो चुकी थी यानी सामयिक प्रतिक्रिया परम्परा के अनुकूल थी।
लोकमत हासिल करने के लिए सफल प्रोपेगेंडा होना चाहिए। सफल प्रोपेगेंडा का रहस्य यह है कि किसी कार्यक्रम या एजेण्डा का प्रचार करने से पूर्व उसके लिए अनुकूल वातावरण खोज लिया जाय या बना लिया जाए। उदाहरणार्थ खादी या ग्रामोद्योग की बनी वस्तुएं वहीं ज्यादा लोकप्रिय होंगी जहां या तो गांधीवाद की विचारधारा मानी जाती हो या किसी और कारण से उन्हें अपनाने के लिए समुचित भूमिका तैयार हो यह बात अच्छी तरह समझ लेनी चाहिए कि प्रचार की सफलता के लिए उपयुक्त भूमिका या वातावरण का होना नितांत आवश्यक है।
जनमत के विकास में कालान्तर या वातावरण की विविधताएं या मनोगत विशेषताएं कभी-कभी ऐसी स्थिति पैदा कर देती हैं कि हम देखते हैं कि एक ही काल या देश में या एक ही समुदाय में प्रचार की विभिन्न प्रतिक्रियाएं होती हैं। नशाबन्दी के प्रचार को ही लीजिए नशाबन्दी का नाम सुनते ही कई लोग इसका घोर विरोध करने लगते हैं और इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर कुठारघात मानते हैं। कुछ लोग ऐसे भी हैं जो यह कहते हैं कि मदिरापान का त्याग करना सच्ची भारतीयता नहीं अपितु सच्ची मानवता भी है। स्वतंत्रता प्राप्ति से पहले नशाबन्दी को राष्ट्रीय आन्दोलन का अंग माना जाता था, क्योंकि इसे लागू करने की मांग को लेकर गांधी जी ने भद्र अवज्ञा आंदोलन के दिनों शराब की दुकानों के सामने पिकेटिंग करने का प्रोग्राम चलाया था। अब परिस्थिति बदल गई है। जनता की चुनी हुई सरकारें आज नशाबन्दी लागू करने से हिचकिचाती हैं और इसके कई कारण गिना दिये जाते हैं। कुल मिला कर हम यह कह सकते हैं कि जनमत निर्माण के लिए जनता और जनसमूह दो अलग-अलग क्षेत्र हैं। जनता वह जिसका क्षेत्र विस्तृत है तथा जिसमें जनमत निर्माण के लिए किसी विशेष प्रोपेगेंडा साधन की आवश्यकता होती है। जबकि जनसमूह किसी एक परम्परागत विश्वास वाले लोगों का समूह हो सकता है और इसमें लोकमत निर्माण के लिए किसी साधारण प्रोपेगेंडा साधन का भी प्रयोग किया जा सकता है।
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