जनसंपर्क की आचारनीति - Public Relations Ethics

जनसंपर्क की आचारनीति - Public Relations Ethics


आधुनिक युग में जनसम्पर्क एक विशिष्ट कला बन गया है। आज लोक सम्पर्क का कार्य पहले की तरह आसान नहीं बल्कि काफी जटिल बन गया है। जनसम्पर्क में सिर्फ यही बात महत्वपूर्ण नहीं है कि जनता से संपर्क करना है, बल्कि इससे ज्यादा महत्वपूर्ण यह बात बन गयी है कि जनसम्पर्क के लिए कब, किस बात को, किस माध्यम से और कैसे रखा जाए, क्योंकि कोई भी जनसम्पर्क तब तक सफल एवं प्रभावशाली नहीं माना जा सकता जब तक वह जनसाधारण को अपनी बात के समर्थन में नहीं खींच ले। एक अव्यवस्थित और अनियोजित ढंग से किया गया जन सम्पर्क सरकारी नीतियों के संदर्भ में आकर्षण के बजाय विकर्षण पैदा करता है।


अखिल भारतीय समाचार पत्र संपादक सम्मेलन ने जनसंपर्क और पत्रकारिता के दायित्वों पर एक आचार संहिता बनाई है। इस आचार संहिता में कहा गया है कि


• जनमत तैयार करने के प्रधान साधन समाचार पत्र होते हैं। इसलिए पत्रकारों को अपने काम को थाती या धरोहर समझना चाहिए और विश्व की शान्ति तथा जनहित की रक्षा और सेवा के लिए सदैव तत्पर रहना चाहिए।


• मूल मानवीय और सामाजिक अधिकारों का पत्रकार को उचित आदर करना चाहिए। अपनी वृत्ति या पेशे को पुनीत कर्तव्य मानकर समाचार देते समय पत्रकार को हमेशा निष्ठावान और न्यायनिष्ठ होना चाहिए।


• जातीय, धार्मिक और आर्थिक कारणों से उत्पन्न सामाजिक तनावों के समाचार देते समय या उन पर टीका टिप्पणी करते समय पत्रकारों को खास तौर से अपने ऊपर नियंत्रण रखना चाहिए।


• पत्रकार यह देखें कि जो कुछ छप रहा है उसमें तथ्य की एक भी गलती न हो। कोई तथ्य न तो तोड़ा मरोड़ा जाये न कोई आवश्यक तथ्य छिपाया जाये जानबूझकर गलत चीज कभी न छापी जाये। जो कुछ छपे उसकी सारी जिम्मेवारी पत्रकार लें। यदि जिम्मेवारी न लेनी हो तो पहले से इसका खास तौर से उल्लेख किया जाये।







• अफवाह और अपुष्ट समाचारों को अफवाह और अपुष्ट समाचार ही लिखा और माना जाए।


• विश्वासघात कभी न किया जाये वृत्तीय गोपनीयता की रक्षा अवश्य हो ।


• व्यक्तिगत हितों का पत्रकारिता सम्बन्धी कार्य में कभी पोषण न हो।


• गलत बातों का तुरन्त स्वेच्छा से खण्डन किया जाये। गलत बातों की ओर कोई ध्यान आकर्षित करे तो खंडन प्रकाशित करना आवश्यक हो जाता है।


• पत्रकारों को अपने पद का दुरुपयोग गैर पत्रकारी कामों के लिए कभी नहीं करना चाहिए।


• किसी चीज को छापने या न छापने के लिए घूस मांगने या घूस स्वीकार करना पत्रकार के लिए नितांत अनैतिक है। समाचार और तथ्यों के संकलन और प्रकाशन की स्वतंत्रता तथा उचित टीका टिप्पणी करने का अधिकार, ये दो ऐसे सिद्धान्त हैं जिनकी रक्षा के लिए हर एक पत्रकार को हमेशा तैयार रहना चाहिए।


• पत्रकार अपनी व्यावसायिक स्थिति का गलत उपयोग कतई न करें।


• अपनी प्रतिष्ठा के लिए खबरों में व्यक्तिगत वाद विवाद जारी रखना अनुचित है। - किसी के व्यक्तिगत जीवन के सम्बन्ध में अफवाह या अन्य बातें जनता को खुश करने के लिए या लोगों की उत्सुकता को शांत करने के लिए छापना सही नहीं, पर यदि जनहित के हित में यह आवश्यक ही हो जाए तभी किसी के निजी जीवन की बात पुष्ट आधार पर ही प्रकाशित की जा सकती है। 


• आचार नीति में निम्न बातों का होना भी आवश्यक माना गया है


• आदर्श जनसंपर्क कार्यकर्ता वही है जो प्रत्येक परिस्थिति में तटस्थ एवं निष्पक्ष रहकर तर्कसंगत विचार करने की क्षमता रखता है।


• तटस्थता के होते हुए भी उसकी सहृदयता और संवेदनशीलता अक्षुण्ण रहनी चाहिए तथा उसके अंदर कलाकार की सी कल्पना और अभिव्यक्ति बनी रहे।







• जनता के ज्ञान के स्तर, जीवन स्तर एवं उसकी रुचियों के अनुरूप जनसम्पर्क साधनों का उपयोग किया जाना चाहिए।


• जनसम्पर्क में निष्पक्ष, सत्य गत एवं तथ्यों से पूर्ण बातों को रखा जाना चाहिए।


• जनसम्पर्क समाज के किसी एक वर्ग से नहीं बल्कि सभी वर्गों से स्थापित किया जाना चाहिए।


• व्यक्तिगत सम्पर्क करते समय लोक सेवकों को अफसरशाही और शक्ति का प्रदर्शन प्रदर्शित नहीं करना चाहिए।


• आचार नीति के तहत शिकायतों को सुनने और उनके शीघ्र निष्पादन की व्यवस्था अत्यंत आवश्यक है।


• विभाग अथवा संस्था के प्रत्येक उच्चाधिकारी को जनसाधारण से मिलने का समय निश्चित कर देना चाहिए और इस समय का अनुपालन होना चाहिए।


• प्रत्येक पत्र का जवाब अविलम्ब दिया जाना चाहिए। जनसम्पर्क हेतु किये गये पत्र व्यवहार की भाषा सरल, शिष्ट और सकारात्मक होनी चाहिए।


• जनसंपर्क अधिकारी का व्यक्तिगत व्यवहार नम्र तथा मर्यादापूर्ण होना चाहिए। अधिकारी को सहृदय भाव से मानवीय दृष्टिकोण अपनाकर व्यक्तियों की समस्याओं को सुनना चाहिए। कुल मिलाकर अधिकारियों का बर्ताव ऐसा होना चाहिए जिससे लोगों की सहानुभूति और सद्भावना प्राप्त की जा सके।


जनसम्पर्क आज सभी सरकारों और संगठनों की एक अनिवार्य आवश्यकता बन गयी है। आज सरकारी संगठनों की अपेक्षा निजी संगठनों में जन सम्पर्क ज्यादा सशक्त एवं प्रभावशाली बन गया है। निजी क्षेत्र आज सरकारी क्षेत्र की तुलना में जनसम्पर्क का अधिकाधिक लाभ उठा रहा है।