आधुनिक भारत में जनसम्पर्क - Public Relations in Modern India

आधुनिक भारत में जनसम्पर्क - Public Relations in Modern India


वह दिन अभी बहुत पुराने नहीं हुए जब हमारे देश में पत्रकारिता के बारे में भी यही आपत्ति की जाती थी कि पत्रकारिता कोई स्वतंत्र व्यवसाय नहीं इसका कारण भी था। प्रायः वही लोग इस क्षेत्र में पदार्पण करते थे जिनका मुख्य ध्येय अपने आदशों के लिए संघर्ष करना होता था इसलिए वे आर्थिक हानि-लाभ की चिंताओं से सर्वथा मुक्त रहते हुये उन आदर्शों का प्रचार करते थे किसी व्यवसाय जीविकोपार्जन का साधन समझकर नहीं जब तक पत्रकारिता को प्रचार का माध्यम और विशेष आदर्शों की प्राप्ति का साधन ही माना जाता रहा, तब तक केवल जीविका कमाने के विचार से पत्रकार बनने वाले इस धन्धे में शामिल नहीं हुए। उन दिनों पत्रकार सार्वजनिक कार्यकर्ता, अध्यापक कलाकार साहित्यकार समाज सुधारक, धर्म प्रचारक आदि कुछ भी हों, व्यावसायिक दृष्टि से पत्रकार नहीं होते थे। पत्रकारिता विशुद्ध रूप से उनका प्रधान लक्ष्य नहीं होता था और न ही जीवन यापन का साधन इसलिए इसे स्वतंत्र व्यवसाय का रूप न मिल सका।


आधुनिक भारत में अब स्थिति बदल गई है। पत्रकार अब एक व्यवसाय के अंग हैं। उनका काम है समाचारों का संकलन, संपादन और प्रकाशन समाचारों के संकलन और संपादन में वे "विशुद्ध समाचार मूल्य" (News Value) की खोज करते हैं। अपने व्यक्तिगत विचारों को इस कार्य से एकदम अलग रखते हैं। उनका निजी दृष्टिकोण जो कुछ भी हो, उनसे अपेक्षा की जाती है कि वे समाचार मूल्यों को ही मुख्य समझकर अपना कर्तव्य पूरा करेंगे।


इसके अतिरिक्त आज का युग इतना प्रतिस्पर्धा प्रधान हो गया है कि समाचार संकलन और सम्पादन पत्रकार का पूरा समय मांगता है। समाचार संकलन के अपने कई क्षेत्र हो गए हैं जिनमें विशेष ज्ञान और अनुभव की आवश्यकता होती है। समाचार पत्रों में साहित्यिक, कलाविषयक, राजनैतिक, सामाजिक, आर्थिक आदि विषयों के विशेष स्तम्भ और पृष्ठ होते हैं जिनके लिए संवाददाताओं तैयारी करनी पड़ती है। को विशेष


यही समस्याएं लोकसम्पर्क की है। लोकसम्पर्क की साधना भी पूर्णकालिक श्रम से ही सम्भव है। इसीलिए तो लोकसम्पर्क को स्वतंत्र व्यवसाय का गौरव और महत्व प्राप्त हुआ है। एक स्वतंत्र व्यवसाय के रूप में सार्वजनिक मान्यता प्राप्त करने के लिए लोकसम्पर्क कर्मियों का सर्व प्रथम अखिल भारतीय सम्मेलन 1968 में दिल्ली में हुआ था। इसलिए कहा जा सकता है कि यह व्यवसाय अपने वर्तमान रूप में अभी 50 वर्ष का भी नहीं हुआ है। इस पेशे की एक प्रतिनिधि संस्था पब्लिक रिलेशन्स सोसाइटी ऑफ इण्डिया है इस सोसाइटी की स्थापना 1958 में हुई थी। इस संस्था का पंजीकृत मुख्यालय बम्बई में है।







लोकसम्पर्क को एक स्वतंत्र व्यवसाय की मान्यता मिलने से इस क्षेत्र में हो रहे सारे कार्यों को स्वस्थ और रचनात्मक दिशा मिली है। इससे जनसम्पर्क एक आवश्यक विषय या विधा व विभाग के रूप में समाज में आया है। जिसमें हजारों नवयुवकों को रोजगार प्राप्त हो रहा है तथा वे अपनी योग्यता का उपयोग समाज के इस स्वतंत्र व्यवसाय के लिए कर रहे हैं।


आधुनिक भारत में जनसम्पर्क के विकास हेतु कार्यशील प्रमुख साधन अथवा जनसम्पर्क व्यवस्था निम्नलिखित हैं:


1. दूरदर्शन:- सितम्बर, 1959 में दिल्ली से पहली बार शुरू हुआ यह माध्यम आज भी देश की जनता के लगभग 60 प्रतिशत क्षेत्र तक अपने कार्यक्रमों को पहुंचाता है। राष्ट्रीय एकता, वैज्ञानिक जानकारी परिवार कल्याण, कृषि, पर्यावरण, महिला व बाल विकास, खेलकूद, कला व संस्कृति, इतिहास, साहित्य आदि क्षेत्रों के रोचक कार्यक्रमों के माध्यम से सरकार एवं उसकी सोच व कार्यक्रम जनता तक पहुंचते हैं, जनता की प्रतिक्रिया व मतों के आधार पर उनकी नीतियों व कार्यक्रमों का निर्धारण भी होता है।


2. रेडियो:- 1920 में भारत में रेडियो का जन्म माना जाता है। भारत की विशाल जनसंख्या के सर्वाधिक भाग तक पहुंचने का माध्यम रेडियो है। लगभग 90 प्रतिशत जनता रेडियो से लाभान्वित होती है। सरकारी रेडियो ने जिसे आकाशवाणी कहा जाता है समाचार, लोक संगीत, व्याख्यान वार्ता परिचर्चा, बाल व महिला कार्यक्रम, कृषि, सैनिक कार्यक्रम, गीत संगीत आदि के जरिए देश के लोगों में अपनी गहरी पैठ बना रखी है। इस माध्यम को देश की धड़कन भी माना जा सकता है। लोककल्याण की योजनाओं और जनता व शासक के मध्य सूचनातंत्र के लिए यह सेतु का कार्य करती है।


3. चलचित्र : भारत सरकार के फिल्म डिवीजन की स्थापना 1948 में हुई थी। इसका मुख्य प्रयोजन फिल्मों के माध्यम से सरकार के कार्यक्रमों का प्रचार करना है। यह दो प्रकार के चित्र तैयार करता है 

(क) वृत्त चित्र 

(ख) समाचार चित्र 


देश के विभिन्न सिनेमाघरों में इन्हें यथासमय एवं अवसरानुकूल दिखाया जाता है। यह प्रभाग विभिन्न समारोहों, उत्सवों तथा देश के सांस्कृतिक जनसम्पर्क के स्थानों, स्वतंत्रता संग्राम आदि पर भी फीचर एवं कार्टून फिल्म भी तैयार करता है।


4. पत्र सूचना विभाग :- यह कार्यालय सरकारी नीतियों व गतिविधियों की जानकारी जनता को देता है। यह सरकार व संचार माध्यमों के बीच तालमेल का कार्य भी करता है। समाचार एजेंसियों, देश विदेश पत्र-पत्रिकाओं, दूरदर्शन, आकाशवाणी आदि को भी यह आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करवाता है। जनता की राय व प्रतिक्रिया से भी सरकार को अवगत कराता है।


5. प्रकाशन:- विभाग देश-विदेश के लोगों को भारत व उसके सन्दर्भों की सटीक व सही जानकारी देने के लिए महत्वपूर्ण मुद्दों व विषयों पर विभिन्न भाषाओं में पुस्तकें, फोल्डर, पेम्फलेट तथा पत्र-पत्रिकाएं प्रकाशित करता है। बाल साहित्य, रोजगार ग्रामीण विकास, साहित्य संस्कृति महत्वपूर्ण व्यक्तियों, सरकारी भाषणों, उपयोगी लेखों आदि के संग्रह भी यह विभाग प्रकाशित करता हैं।