जनसंपर्क, जनसंचार प्रचार और महत्व - Public Relations, Mass Communication Publicity and Importance
जनसंपर्क, जनसंचार प्रचार और महत्व - Public Relations, Mass Communication Publicity and Importance
साधारणतया जनसंपर्क एवं जनसंचार को लोग एक ही समझ बैठते हैं और इनका प्रयोग एक-दूसरे के पर्यायवाची शब्दों की तरह करते हैं परन्तु वास्तव में इन दोनों में कई अंतर हैं। जनसंचार जनसंपर्क की एक शैली मात्र है। जनसंपर्क व्यक्तिगत रूप से या छोटे पैमाने पर भी किया जा सकता है। जैसे कोई प्रधानमंत्री अपने संसदीय क्षेत्र में किसी एक व्यक्ति से बात करता है तो यह जनसंपर्क ही कहा जायेगा, जनसंचार नहीं।
जनसंचार के सम्बन्ध में आर के चटर्जी की मान्यता है कि "जन-संचार लोगों तक पहुंचने की विधि है, जो एक वैज्ञानिक प्रणाली है।"
सभी प्रकार का जनसंचार जनसंपर्क भी है परन्तु सभी प्रकार का जनसंपर्क जनसंचार नहीं है। हालांकि आज के वर्तमान समय में इन दोनों के मध्य अन्तर इतना कम हो गया है कि इन दोनों शब्दों को पर्यायवाची समझना कोई बड़ी भूल नहीं मानी जानी चाहिए, आज जनसंचार के ही साधनों को जनसंपर्क' के लिए भी प्रयोग में लाया जाने लगा है।
प्रचार एवं प्रोपेगण्डा :
जनसंपर्क और प्रचार में निकटतम सम्बन्ध होते हुए भी इनमें कुछ अंतर अवश्य हैं। इनका प्रयोग भी एक ही सन्दर्भ में पर्यायवाची शब्दों के रूप में नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि व्यक्तिगत रूप में लोगों के पास पहुंचना जनसंपर्क का उद्देश्य है। जबकि सामूहिक रूप से जनता को जानकारी देना प्रचार है। साधारणतया आजकल लोग जनसंपर्क अधिकारी को प्रचार अधिकारी भी कहकर सम्बोधित करते हैं। वस्तुतः मिटता हुआ यह अंतर दोनों शब्दों की निकटता को स्पष्ट करता है।
इसी प्रकार जनसंपर्क एवं प्रोपेगेंडा को भी समानार्थी समझा जाता है, परन्तु इन दोनों शब्दों में भी अंतर है। जनसंपर्क में सही बातें बताकर जनता के विचारों को प्रभावित किया जाता है, जबकि प्रोपेगेंडा में झूठी अफवाहें फैलाकर अपना उल्लू सीधा किया जा सकता है। प्रोपेगेंडा का स्रोत अज्ञात और अनिश्चित रहता है, जबकि जनसंपर्क सम्बन्धी प्रचार के स्रोत की जानकारी सभी को रहती है। इन दोनों के मध्य एक महत्वपूर्ण अन्तर यह भी है कि जनसंपर्क का उद्देश्य स्वच्छ एवं सूचनात्मक होता है जबकि प्रोपेगेंडा का उद्देश्य स्वार्थपूर्ण और गलत सूचना देना भी होता है अर्थात प्रोपेगेंडा लोगों को गुमराह करने के लिए ही किया जाता है।
जनसंपर्क का महत्व :
इस प्रकार हम कह सकते हैं कि जनसंपर्क किसी निश्चित लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए जनता और सरकार के मध्य जीवित संबंधों की स्थापना करता है ताकि एक दूसरे की भावनाओं को समझा जा सके। उपर्युक्त परिभाषाओं के आधार पर जनसंपर्क के सम्बन्ध में निम्नलिखित बातें स्पष्ट होती हैं:
1. जनसंपर्क लोक कल्याणकारी राज्य की प्रमुख अनिवार्यता है।
2. जनसंपर्क जनता की भावनाओं और समस्याओं को समझने का एक साधन है।
13. जनसंपर्क सरकारी नीतियों और कार्यक्रमों का जनता पर पड़ने वाले प्रभावों, लाभों अथवा हानियों को जानने वाला एक माध्यम है।
4. जनसंपर्क के द्वारा यह जानने का प्रयास किया जाता है कि जनता किसी सरकारी अथवा गैर सरकारी संगठन से क्या क्या अपेक्षाएं रखती है ?
5. जनसंपर्क के द्वारा यह बताने का प्रयास किया जाता है कि कोई संगठन जनसाधारण के लिए क्या क्या कार्य कर रहा है और वह उनके लिए कितना महत्वपूर्ण है ?
6. जनसंपर्क एक ऐसा माध्यम है, जिसमें कई सरकारी एवं गैर सरकारी संगठन तथा जनता एक दूसरे की भावनाओं के अनुकूल व्यवहार करने के लिए राजी करने का प्रयास करते हैं।
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