शोध समस्या निर्धारण के अभीष्ट चरण - Required Stages of Research Problem Determination

शोध समस्या निर्धारण के अभीष्ट चरण - Required Stages of Research Problem Determination

शोध समस्या के निर्धारण के निम्नलिखित चरण होते हैं -


1) समाधान की आवश्यकता होने पर समस्या का अन्वेषण- 


इस चरण की अनुपस्थिति पर शोध के सम्पन्न होने की संभावनाएं नहीं बचती। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से केवल उन्हीं समस्याओं का अध्ययन किया जाना चाहिए जिनका समाधान होना संभव हो। 


2) संचालनीय आकार- 


समस्या इस प्रकार की होनी चाहिए जो संचलनीय आकार के कार्य में सुविधापूर्वक समाहित हो सके। समस्या के क्षेत्र को सीमित करते हुए यह भी ध्यान देने की आवश्यकता है कि क्षेत्र इतना भी सीमित न हो जाए कि उस शोध की कोई उपयोगिता ही न रह जाए।


3) उपकल्पनाओं का प्रतिपादन -


प्रथम दो चरणों के उपरांत समस्या समाधान हेतु उपकल्पनाओं की रचना की जाती है। समस्या निर्धारण के साथ-साथ उपकल्पना का स्वरूप भी निश्चित होने लगता है। 


4) अध्ययन में प्रयोग की गई अवधारणाओं का स्पष्टीकरण और औपचारिक परिभाषा- 


समस्या के अंतर्गत प्रयोग की जाने वाली अवधारणाओं की निश्चित व सुस्पष्ट शब्दों में व्याख्या प्रस्तुत करनी चाहिए और उसकी विस्तृत व्याख्या आगे करनी चाहिए।


5) कार्य संचालन परिभाषाओं का निर्धारण 


अवधारणा की संक्षिप्त परिभाषा के पश्चात प्रस्तावित समस्या की अपेक्षाकृत पूर्ण परिभाषा प्रस्तुत की जाती है। जब तक समस्या के संबंध में स्पष्टता नहीं होगी तब तक अच्छे परिणाम नहीं प्राप्त हो सकते। 


6) अन्य ज्ञान की उपलब्धियों को संबंधित करना -


इस चरण के अंतर्गत पहले से किए गए। कार्यों का सावधानीपूर्वक अध्ययन करना शामिल है।