शोध समस्या का चयन - Selection of Research problem in Research Methodology


शोध पद्धति और संखियिकी - Research Methodology and  Statistics

शोध समस्या का चयन भाग - 1 

 • शोध प्रक्रिया में सबसे महत्वपूर्ण एवं प्रथम चरण शोध समस्या का चुनाव एवं सही निर्माण करना है। शोधकर्ता द्वारा चयनित और निर्मित शोध समस्या पर ही उसके शोध की सफलता निर्भर करती है। सामान्य अर्थों में शोध समस्या सैद्धांतिक या व्यवहारिक संदर्भों में व्याप्त वह समस्या या कठिनाई है जिसका समाधान शोधकर्ता अपने अध्ययन करना चाहता है। 


•शोध समस्या से तात्पर्य एक ऐसे प्रश्नवाचक कथन या समस्या कथन से होता है जिसमें चरों के बीच कोई विशेष प्रकार के संबंध होने की कल्पना की जाती है।


• एक अच्छी शोध समस्या का चयन या निर्माण शोध अध्ययन के लिए एक निवेश की तरह होता है जिसका परिणाम शोध रिर्पोट की विषय वस्तु की गुणवत्ता तथा कार्य की वैधता आदि के रूप में परिलक्षित होता है।

शोध समस्या का चयन दो चरणों में किया जाता है:


विषय क्षेत्र का चयन


• शोधकर्ता को एक बड़ा विषय क्षेत्र चुनना चाहिए जिसमें उसे अध्ययन करना है। उसे उस विषय क्षेत्र में गहरी रुचि होनी चाहिए। शोध समस्या कोई समस्या विशेष कार्यक्रम या घटना के अध्ययन पर आधारित होती है।


• चयनित क्षेत्र ऐसा होना चाहिए जिसमें शोधकर्ता मौलिकता का अच्छा निर्णय प्रदर्शित कर सकें। मुख्य विषय क्षेत्र के चयन के पश्चात् उप विषय का चयन करना चाहिए। किसी भी रूचिपूर्ण शोध समस्या के चयन के लिए स्वयं के शैक्षणिक क्षेत्र या व्यवसायिक क्षेत्र से उप विषय का चयन करना चाहिए।


• उप विषय का चयन करने के बाद शोधकर्ता को उस उप विषय से संबंधित किसी स्पष्ट शोध समस्या का चयन करना चाहिए, जिसका उत्तर वह वैज्ञानिक विधि का प्रयोग कर खोजना चाहता है। स्पष्ट शोध समस्या का चयन करने से पूर्व उप विषय का गहन साहित्य अवलोकन, विशेषज्ञों से परामर्श, आसपास व्याप्त समस्याओं की पूर्ण जानकारी अति आवश्यक है। • साहित्य अवलोकन व परामर्श की प्रक्रिया शोधकर्ता के ज्ञान को स्पष्टता व कुशलता प्रदान करती है, सम्बन्धित क्षेत्र के शोध कार्यों की सूचना प्रदान करती है, समस्या के चुनाव, विश्लेषण एवं कथन में सहायक होती है व शोध अध्ययन में अन्तर्दृष्टि अथवा सूझबूझ पैदा करती है। साहित्य अवलोकन व परामर्श के द्वारा शोध समस्या का सीमांकन आसानी से किया जा सकता है व इससे अध्ययन की रुपरेखा तैयार करने में सहायता मिलती है। शोध की कार्यविधि, संभावित समाधानों, अनुभवों आदि के बारे में भी पता चलता है।


●साहित्य अवलोकन के स्रोत; पाठ्य पुस्तक और अन्य ग्रंथ, शोध पत्र, सम्मेलन / सेमिनार में पढ़े गए आलेख, शोध प्रबंध, पत्रिकाएँ एवं समाचार पत्र, इंटरनेट, साक्षात्कार, हस्तलेख अथवा अप्रकाशित पांडुलिपि ।


स्पष्ट शोध समस्या के कुछ उदाहरण हैं


◆महिलाओं के पोषण ज्ञान पर पोषण संचार का प्रभाव


◆ पूर्वस्कूली बच्चों की पोषण की स्थिति का आकलन।


◆ ग्रामीण गर्भवती महिलाओं में एनीमिया के प्रसार पर पोषण शिक्षा का प्रभाव


◆बच्चों की पोषण की स्थिति और संज्ञानात्मक विकास के बीच संबंध


◆वस्त्र व्यापार और उपभोक्ता व्यवहार


◆विज्ञापन का उपभोक्ता व्यवहार पर प्रभाव


◆खेलों में प्रदर्शन पर आहार संशोधन और पोषण शिक्षा का प्रभाव 


◆ मोटापे तथा मधुमेह में सहसंबंध


शोधकर्ता के लिए शोध समस्या के निर्माण के लिये कुछ स्रोतों का सहारा ले सकता है जिससे उसे समस्या को ढूँढने में मदद मिल सके। ये स्रोत निम्नवत हैं


(1) शिक्षकों, छात्रों एवं अभिभावकों द्वारा अनुभव की जा रही दिन-प्रतिदिन की समस्यायें किसी भी शोधकर्ता के लिये एक उपयोगी समस्या का स्रोत हो सकते हैं।


(2) पाठ्य पुस्तक, शोध-पत्र, शोध जर्नल आदि को पढ़कर भी संभावित शोध समस्या का संकेत प्राप्त किया जा सकता है क्योंकि इन स्रोतों में कुछ ऐसी प्रविधियों एवं कार्यविधियों का भी उल्लेख रहता है जिनसे शोध की नयी समस्या की झलक तो मिलती ही है साथ ही उन्हें सुलझाने में भी शोधकर्ता को विशेष सहायता मिलती है।


(3) वरिष्ठ शिक्षक एवं विषय विशेषज्ञ भी अच्छी एवं वैज्ञानिक समस्या के प्रतिपादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।


शोध समस्या को परिभाषित करना


• समस्या के परिभाषीकरण से तात्पर्य समस्या का स्पष्ट रूप से एवं विस्तार पूर्वक वर्णन करना है। परिभाषीकरण के चरण में शोध समस्या की स्पष्ट परिभाषा दी जाती है, शोध का प्रमुख आशय प्रस्तुत किया जाता है और उसके महत्व की संक्षिप्त व्याख्या की जाती है।


• परिभाषीकरण से शोध समस्या के अध्ययन की पहली रूपरेखा तैयार की जाती है। इसकी मदद से शोध समस्या से संबंधित उद्देश्यों का निर्धारण किया जाता है। समस्या की परिभाषीकरण के आधार पर उचित शोध अभिकल्प का चुनाव किया जा सकता है।


शोध समस्या को परिभाषित करते समय निम्न नियमों का पालन करना चाहिए:


• सभी तकनीकी शब्दों, व चरों को पहचान कर परिभाषित करना चाहिए।


• शोध समस्या के चयन का औचित्य, कारण सहित वर्णन करना चाहिए।


शोधकर्ता को यह निश्चित करना चाहिए कि चयनित समस्या अस्पष्ट और समय के अनुसार विस्तृत कार्य क्षेत्र वाली तो नहीं है।


शोध के उद्देश्यों का स्पष्ट रूप से उल्लेख करना चाहिए।


• शोध के निर्णय किस जनसंख्या समूह, समाज, आयु वर्ग, स्थिति पर लागू होंगे इसका विस्तृत वर्णन करना चाहिए।


• समस्या की अंतर्निहित त्रुटियों व मान्यताओं का सावधानीपूर्वक उल्लेख करना चाहिए |


• शोध के पूर्वानुमानों आदि का वर्णन किया जाना चाहिए।


शोध के प्रभाव एवं उपयोगिता तथा समय अवधि का वर्णन होना चाहिए।


शोध समस्या के चयन को प्रभावित करने वाले कारक


मौलिकता


मूलरूप से यह माना जाता है कि प्रत्येक शोध नयी व अपने आप में अनोखी होती है। इसलिए यह शोधकर्ता का दायित्व होता है कि शोध समस्या का चयन करने के लिए अभिनव ज्ञान का उपयोग किया जाए जिससे ज्ञान में और भी वृद्धि हो सके।


रूचि


शोध का कार्य अधिकतर समय लेने वाला और परिश्रम पूर्ण होता है और यदि आप कोई ऐसे विषय का चुनाव कर लेते हैं जिसमें आपकी अधिक रुचि नहीं है तो आवश्यक उत्साह को बनाए रखना और इसको पूर्ण करने में पर्याप्त समय तथा ऊर्जा लगाना अत्यंत कठिन हो सकता है।


आकार


शोध के आकार का अर्थ शोध में प्रयुक्त होने वाले चरों की संख्या का आकार, प्रतिदर्श का आकार से है। शोध का आकार बहुत छोटा या अत्यधिक बड़ा नहीं होना चाहिए। शोध के विषय का चयन इस प्रकार से सीमित होना चाहिए कि वह प्रबंधन योग्य, विशिष्ट तथा स्पष्ट हो ।


अवधारणाओं का मापन


शोध समस्या या विषय के चुनाव में यह भी ध्यान रखने योग्य है कि अवधारणाओं का मापन मात्रात्मक होगा या गुणात्मक मात्रात्मक अवधारणाओं में वजन, लम्बाई व गुणात्मक में स्वाद, अभिवृत्ति, व्यवहार आदि सम्मिलित होते हैं।


विशेषज्ञता का स्तर


शोधकर्ता को सुनिश्चित होना चाहिए कि चयनित शोध कार्य के लिए उसके पास पर्याप्त स्तर की विशेषज्ञता है। इसलिए शोध समस्या या विषय के चुनाव से पूर्व विषय विशेष का गहन साहित्य अवलोकन करना आवश्यक होता है।


प्रासंगिकता व व्यवहारिक उपयोगिता


सदैव एक ऐसे विषय का चयन करना चाहिए जिसकी शैक्षणिक, कार्य क्षेत्र या समाज सेवा रूप में प्रासंगिकता हो। शोध परक अध्ययन के लिए उस समस्या का चुनाव करना चाहिए जिसके निष्कर्षों से व्यक्ति एवं समाज को लाभ हो ।


आंकड़ों की उपलब्धता


ऐसी समस्या का चुनाव करना चाहिए जिससे संबंधित तथ्य आंकड़ों द्वारा समयावधि के अन्दर प्राप्त किये जा सकें। आंकड़ों के संग्रह के लिए विश्वसनीय और वैध उपकरण भी उपलब्ध होने चाहिए।


वित्तीय संसाधनों की सीमा


शोध कार्य में धन का व्यय होता है। शोध समस्या का चुनाव कर समय वित्तीय संसाधनों एवं उपलब्ध धन के विषय में भी ध्यान अवश्य रखना चाहिए।