उपकल्पना निर्माण के स्रोत - Source of Hypothesis

उपकल्पना निर्माण के स्रोत - Source of Hypothesis

उपकल्पनाओं के सामान्यत: दो प्रमुख स्रोतों होते हैं-


1) वैयक्तिक अथवा निजी स्रोत -


इसके अंतर्गत शोधकर्ता की स्वयं की वैचारिकी, अभिवृत्ति, सूझ-बूझ, विचार, दृष्टिकोण, अनुभव उपकल्पनाओं के निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण स्रोत हैं। शोधकर्ता अपनी प्रतिभा तथा अनुभवों के आधार पर उपकल्पना को निर्मित कर सकता है। 


2) बाह्य स्रोत-


इसके अंतर्गतशोधकर्ता के अतिरिक्त बाह्य स्रोत यथा- काव्य साहित्य, कल्पना, कविता, नाटक, कहानी, उपन्यास आदि कुछ भी हो सकता है। 


गुडे एव हॉट ने उपकल्पना के चार स्रोतों का उल्लेख किया है -


1) सामान्य संस्कृति- 


किसी समूह की सामाजिक संरचना में सांस्कृतिक और स्थानीय परम्पराओं का समावेश होता है। अर्थात व्यक्तियों की गतिविधियों को समझने का सबसे अच्छा एवं सरल तरीका है उनकी संस्कृति को समझना। व्यक्तियों का व्यवहार एवं उनका सामान्य चिन्तन, एक सीमा तक उनकी अपनी संस्कृति के अनुरूप ही होता है। गुडे एवं हॉट का ऐसा मानना है कि "वृहत सांस्कृतिक मूल्य न केवल शोध अभिरुचियों का पाठ प्रदर्शन करने में ही सहायता प्रदान करते हैं प्रत्युत लोक-प्रज्ञा उपकल्पना की एक-दूसरे के रूप में मदद करती है।' 

इसलिए अधिकांशतः उपकल्पनाओं का मूलस्रोत वह सामान्य संस्कृति होती है, जिसमें विशिष्ट विज्ञान का संवर्धन होता है। सामान्य तौर पर, संस्कृति को तीन प्रमुख भागों में विभाजित कर समझा जा सकता है।


• सांस्कृतिक पृष्ठभूमि का तात्पर्य है सांस्कृतिक पृष्ठभूमि की उन विशेषताओं से है जहां हम रहते हैं। वे विशेषताएँ उपकल्पना का स्रोत बन सकती है।


• सांस्कृतिक चिह्न के अन्तर्गत लोक कथाएँ, लोक विश्वास उपकल्पना का स्रोत बन सकती है। 


• सामाजिक-सांस्कृतिक परिवर्तनों के कारण बदले सामाजिक-सांस्कृतिक मूल्य भी उपकल्पना के स्रोत बन सकते हैं।


2) वैज्ञानिक सिद्धांत-


उपकल्पनाओं का जन्म स्वयं ही विज्ञान में होता है। वैज्ञानिक सिद्धांत जो समय-समय पर विद्वानों द्वारा प्रतिपादित किए जाते हैं, भी उपकल्पना के स्रोत बन सकते हैं। प्रत्येक विज्ञान में कई सिद्धांत होते हैं। इन सिद्धांतों से हमें विषय के बारे में कई पहलुओं के सम्बन्ध में ज्ञान प्राप्त होता है।


3) अनुरूपताएँ सादृश्यताएँ-


जूलियन हक्सले ने इस बात की ओर संकेत किया है कि "प्रकृति अथवा दूसरे विज्ञान के स्वरूप में कारणात्मक अवलोकन उपकल्पनाओं के उर्वरक स्रोत हो सकते हैं।" जब कभी दो क्षेत्रों में कुछ समानताएँ या अनुरूपताएँ परिलक्षित होती हैं तो सामान्यतया, इस आधार पर भी उपकल्पनाओं को निर्मित कर लिया जाता है। अर्थात कभी कभी दो तथ्यों के मध्य समरूपता/समानता के कारण नई उपकल्पना का सृजन होता है और  इनकी प्रेरणा का कारण सादृश्ताएँ होती है। 


4) व्यक्तिगत अनुभव-


व्यक्तिगत अनुभव भी उपकल्पना के निर्माण हेतु महत्वपूर्ण स्रोत होते हैं। उदाहरणस्वरूप, न्यूटन, डार्विन, लैम्ब्रोसो आदि ने अपने व्यक्तिगत अनुभवों पर ही उपकल्पनाओं का निर्माण किया था।