अनुवाद की प्रक्रिया - Translation Process

अनुवाद की प्रक्रिया - Translation Process


अनुवाद दो भाषाओं के बीच रूपान्तरण की एक जटिल प्रक्रिया है जिस भाषा से अनुवाद होना है, उसे स्त्रोतभाषा (Source Language) कहा जाता है और जिस भाषा में अनुवाद होना है। लक्ष्यभाषा (Target Language) कहते हैं। उसे स्त्रोतभाषा के पाठ में अनुवादक विषयवस्तु का विश्लेषण यानी उसका एक निश्चित अर्थबोध करता है। अर्थबोध हो जाने के उपरान्त वह लक्ष्य भाषा में उसका रूपान्तरण करता है। एक मूल और निश्चित अर्थबोध वाला रूपान्तरण प्राप्त हो जाने के उपरान्त लक्ष्यभाषा में उसके भाषिक और वैयाकरणिक नियमों के अनुरूप उसका पाठ तैयार कर प्रस्तुत कर दिया जाता है। हम जानते हैं कि हर भाषा की प्रकृति अलग होती है, उसका व्याकरण अलग होता है और उसके अपने सामाजिक-सांस्कृतिक परिदृश्य से जुड़े मुहावरे और कहने का एक लहजा होता है। जब कोई अनुवादक अनुवाद करता है तो उसके सामने शब्दों के पार एक समूची भावभूमि की जमीन पर बिना उसे बदले कार्य करने की चुनौती होती है। अनुवादक को देखना होता है कि स्रोत भाषा में प्रयुक्त मुहावरे और लहजे का समतुल्य पक्ष लक्ष्य भाषा में क्या है। अनुवाद की इस जटिल प्रक्रिया को निम्न आरेख द्वारा सरलता से समझा और याद रखा जा सकता है।




अनुवाद की प्रक्रिया में विषयवस्तु के विश्लेषण, अंतरण और वैयाकरणिक पुनर्गठन की महत्वपूर्ण भूमिका को इस छोटे से उदाहरण में आसानी से समझा जा सकता है।

Right शब्द के विश्लेषण आधारित कितने अनुप्रयोग अनुवाद की जटिल प्रक्रिया में सम्भव हो जाते हैं, देखें -


Right Direction - दाहिनी दिशा


Right Answer - सही उत्तर


Right Angle - 90° का कोण


Right Conduct - उचित आचरण


Rightist - दक्षिणपंथी


उपर्युक्त उदाहरण में हर बार Right शब्द का विश्लेषण करने उसका अर्थ और तदनुसार उसका अंतरण और पुनर्गठन अलग हो जाता है।