विज्ञापन के प्रकार - Types of Advertisements
विज्ञापन के प्रकार - Types of Advertisements
विज्ञापन का काम अपने निश्चित लक्ष्य और उद्देश्य की पूर्ति के लिए संदेश को प्रसारित करना है। विज्ञापन के इन्हीं उद्देश्यों को पूरा करने के लिए विज्ञापनों का अलग-अलग प्रकार से वर्गीकरण किया जाता है। प्रमुख रूप से विज्ञापनों को चार वर्गों में बाटा जा सकता है।
1. बनावट के आधार पर
2. विज्ञापनकर्ता के आधार पर
3. प्रसार क्षेत्र के आधार पर
4 संदेश के आधार पर
1.) बनावट के आधार पर
विज्ञापनों को बनावट के आधार पर 4 श्रेणियों में बाँटा जा सकता है। वर्गीकृत विज्ञापन, सजावटी विज्ञापन वर्गीकृत सजावटी विज्ञापन और समाचार सूचना विज्ञापन।
वर्गीकृत विज्ञापन वर्गीकृत विज्ञापन प्रायः स्थानीय आवश्यकताओं और सूचनाओं पर आधारित होते हैं। इस तरह के विज्ञापन विज्ञापन के प्रारम्भिक स्वरूप हैं। समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में निश्चित पृष्ठ और निश्चित स्थान पर एक निश्चित शीर्षक के अंतर्गत इस तरह के विज्ञापन प्रकाशित किए जाते हैं। खरीदना, बेचना, जरूरत है, किराए के लिए खाली, रोजगार, शैक्षणिक, वैवाहिक और खोया पाया आदि ऐसे कुछ शीर्षक हैं जिनके अन्तर्गत वर्गीकृत विज्ञापन प्रकाशित किए जाते हैं।
वर्गीकृत विज्ञापन का मूल्य काफी कम होता है। इनकी छपाई सामान्य होती है और यह संक्षिप्त होते हैं। प्रायः इनमें तीन चार लाइनों में पूरी बात कह दी जाती है। इस तरह के विज्ञापनों में प्रतीक चिन्हों या चित्रों का इस्तेमाल नहीं होता और न ही इनमें सजावटी अक्षरों या मोटे बॉर्डर आदि का ही प्रयोग होता है। इनकी लागत इनमें प्रयुक्त शब्दों की संख्या पर निर्भर होती है। इन विज्ञापनों का उद्देश्य उपभोक्ता को आकृष्ट करना नहीं होता बल्कि उपभोक्ता अपनी जरूरत के मुताबिक खुद ब खुद इन विज्ञापनों में अपने उपयोग की चीज ढूंढ लेता है। वर्गीकृत विज्ञापन एक साथ विषयवार छापे जाते हैं।
सजावटी विज्ञापन यह सबसे अच्छे विज्ञापन माने जाते हैं क्योंकि यह दिखने में आकर्षक, सुन्दर अधिक प्रभावशाली तथा अधिक जानकारी देने वाले होते हैं। इनमें प्रतीक चिन्हों, शीर्षक, मोनोग्राम या लोगो आदि का प्रयोग होता हैं। इनकी कॉपी आकर्षक होती है, डिजाइन सुन्दर होती है और चित्र भी बेहद आकर्षक होते हैं।
वर्गीकृत विज्ञापनों की तरह इनके छपने का स्थान पूर्व निर्धारित नहीं होता बल्कि ये विज्ञापनदाता की इच्छानुसार निर्धारित पृष्ठ, स्थान और आकार में छापे जाते हैं। इनकी कीमत भी इनके आकार और छपने वाले पृष्ठ के आधार पर अलग-अलग होती है।
सजावटी विज्ञापनों को उनकी पूर्णता के कारण विस्तृत विज्ञापन भी कहा जाता है। ये विज्ञापन उपभोक्ता पर अधिक असर करते हैं और उपभोक्ता के अन्दर उत्पाद के प्रति जिज्ञासा और उसे खरीदने या इस्तेमाल करने की ललक पैदा करते हैं। ये विज्ञापन उत्पाद की ब्रांड छवि (Brand Image) बनाने का भी काम करते हैं और इनके निर्माण में पेशेवर मॉडलों, लोकप्रिय खिलाड़ियों या फिल्म कलाकारों या अन्य महत्वपूर्ण व्यक्तियों का भी इस्तेमाल अतिरिक्त आकर्षण के रूप में किया जाता है। प्रायः इन विज्ञापनों का निर्माण संस्थान, कंपनी या फर्म यानी विज्ञापनकर्ता द्वारा खुद नहीं किया जाता बल्कि इनका निर्माण विज्ञापन एजेंसियां करती हैं। इस कारण ये विज्ञापन महंगे भी होते हैं। टेलीविजन में प्रसारित विज्ञापनों को भी इसी श्रेणी में रखा जा सकता है।
वर्गीकृत सजावटी विज्ञापन यह विज्ञापन भी एक प्रकार के वर्गीकृत विज्ञापन ही हैं। लेकिन इनका आकार वर्गीकृत विज्ञापनों से बड़ा होता है और इनमें सीमित रूप में विज्ञापनकर्ता का प्रतीक चिन्ह, फोटो आदि भी इस्तेमाल होते हैं। इनकी बनावट में थोड़ी बहुत सजावट भी होती है। इन विज्ञापनों के लिए भी प्रायः पेज और स्थान निर्धारित होता है। इस तरह के विज्ञापन ज्यादातर स्थानीय उत्पादों के ही होते हैं।
समाचार सूचना विज्ञापन : समाचार सूचना विज्ञापनों को एडवरटोरियल (Advertorial) भी कहा जाता है। यह विज्ञापन का अपेक्षाकृत नया रूप है। इसमें विज्ञापन को इस प्रकार तैयार किया जाता है कि वह किसी समाचार की तरह ही लगता है। इसका प्रकाशन भी समाचारों की तरह ही समाचारों के बीच में किया जाता है। इनकी शुरूआत समाचारों की तरह ही होती है और इनके अन्त में या किसी अन्य स्थान में संक्षिप्त में Ad. लिख दिया जाता है। ये एक प्रकार के छद्म विज्ञापन होते हैं। क्योंकि उपभोक्ता इन्हें समाचार की तरह पढ़ कर उसी भाव से इन पर यकीन भी कर लेता है। इन विज्ञापनों का मूल्य काफी अधिक होता है।
2.) विज्ञापनकर्ता के आधार पर :
विज्ञापनों का एक वर्गीकरण विज्ञापनकर्ता के आधार पर भी किया जाता है। इस आधार पर विज्ञापनों को उपभोक्ता विज्ञापन, औद्योगिक विज्ञापन, वित्तीय विज्ञापन, व्यापारिक विज्ञापन, कृषि सम्बन्धी विज्ञापन, सहकारी विज्ञापन राजकीय और शिक्षाप्रद विज्ञापन प्रमाण सम्बन्धी विज्ञापन और सहकारी विज्ञापन आदि श्रेणियों में बाँटा जाता है।
उपभोक्ता विज्ञापन :- इस तरह के विज्ञापन विज्ञापन कर्ता को उपभोक्ता से सीधे जोड़ते हैं। इस तरह के विज्ञापनों में दैनिक जीवन की उपयोगी चीजों, आम उपभोक्ता वस्तुओं की जानकारी होती है। खाने पीने की वस्तुओं, कपड़े, साबुन, तेल, चाय, बिस्कुट, चॉकलेट, पेय पदार्थ, स्कूटर कार साइकिल आदि तमाम रोजाना जरूरतों की चीजों के विज्ञापन इसी तरह के होते हैं। ये विज्ञापन ब्रांड इमेज भी बनाते हैं और उपभोक्ता को विज्ञापित वस्तुओं को खरीदने के लिए प्रोत्साहित भी करते हैं। विज्ञापन का यह सबसे लोकप्रिय रूप है जो प्रसारण और प्रकाशन माध्यमों में हर जगह दिखाई देता है। इस तरह के विज्ञापनकर्ता प्रायः उपभोक्ता वस्तुओं के उत्पादक, वितरक या विक्रेता होते हैं। इन विज्ञापनों का पूरा जोर उत्पाद की विशेषताओं को बताने में होता है। इनमें दामों में छूट, समान दाम में अधिक वस्तु आदि बातें भी बताई जाती हैं।
औद्योगिक विज्ञापन :- औद्योगिक विज्ञापन सामान्य उपभोक्ताओं के लिए नहीं होते बल्कि वे उद्यमियों या एक निश्चित वर्ग के लोगों के लिए जारी किए जाते हैं। ये विज्ञापन उद्यमियों को कच्चे माल, उपकरण, सहायक उद्योग आदि के बारे में जानकारी देते हैं। उदाहरणार्थ किसी बड़ी स्टील निर्माता कंपनी का विज्ञापन जो स्टील के सामान बनाने वाले छोटे उत्पादकों को लक्ष्य कर जारी किया जाए। छोटे उद्योग भी अपना कच्चा माल बेचने के लिए इस तरह के विज्ञापनों का सहारा लेते हैं। इन विज्ञापनों का संदेश लुभावना और आकर्षक न होकर तत्वों पर आधारित होता है। इन विज्ञापनों में कही गई बातें प्रामाणिक होती हैं। इस तरह के विज्ञापन प्रसारण प्रकाशन माध्यमों के साथ-साथ डायरेक्ट मेल और कैटलॉग आदि के जरिए भी किए जाते हैं।
वित्तीय विज्ञापन :- बैंक, बीमा कंपनियाँ वित्तीय संस्थाएं आदि अपनी वित्तीय गतिविधियों की जानकारी देने, शेयर जारी करने, पूंजी बाजार से पैसा उठाने आदि कामों के लिए इस तरह के विज्ञापन जारी करती हैं। इस तरह के विज्ञापनों के जरिए कंपनियों अपनी वित्तीय उपलब्धियां अनुमानित लाभ और विस्तार योजनाओं आदि के बारे में बताती हैं। कंपनियों के वार्षिक आय व्यय का ब्यौरा भी इन्हीं विज्ञापनों के जरिए उपभोक्ताओं को दिया जाता है। ये विज्ञापन एक निश्चित पाठक वर्ग के लिए होते हैं और इनमें लिखित संदेश बहुत अधिक होता है। ये विज्ञापन पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित भी होते हैं और डाक माध्यम से भी भेजे जाते हैं। निजी क्षेत्र की वित्तीय कंपनियाँ इस तरह के विज्ञापनों का खूब प्रयोग करती हैं।
व्यापारिक विज्ञापन :- व्यापारिक विज्ञापनों का सीधा सम्बन्ध उपभोक्ता से नहीं होता बल्कि वितरकों, थोक विक्रेता आदि से होता है। इनमें विज्ञापनकर्ता, वितरकों और थोक विक्रेताओं को उत्पादों के भण्डारण फुटकर बिक्री योजनाओं, वितरकों की नियुक्ति, बिक्री केन्द्र खोलने आदि की जानकारी देता है। इस तरह के विज्ञापन विपणन प्रक्रिया को काफी प्रभावित करते हैं और उसे बढ़ाते भी हैं। डिटर्जेंट पाऊडर या किसी खास ब्रांड के अण्डरगार्मेटस की थोक खरीद में बड़े उपहारों की घोषणा वाले ऐसे विज्ञापन पत्र पत्रिकाओं में प्राय: देखे जा सकते हैं।
कृषि संबंधी :- कृषि और ग्रामीण क्षेत्र में परम्परागत कृषि के स्थान पर आधुनिक तकनीकों का प्रयोग करने के लिए इस तरह के विज्ञापनों का इस्तेमाल किया जाता है। ये विज्ञापन आधुनिक कृषि उपकरणों, नयी तकनीक, बीज खाद आदि की जानकारी देते हैं। चूंकि देश की आबादी का बड़ा भाग कृषि पर निर्भर है इसलिए इन विज्ञापनों का महत्व बहुत अधिक होता है। कृषि सम्बन्धी विज्ञापन पत्र पत्रिकाओं, स्थानीय समाचार पत्रों, रेडियो आदि में अधिक किए जाते हैं। दूरदर्शन और कुछ अन्य निजी चैनलों में भी कृषि सम्बन्धी कार्यक्रमों में इस तरह के विज्ञापन प्रसारित किए जाते हैं।
राजकीय और शिक्षाप्रद विज्ञापन :- इस तरह के विज्ञापनों का उद्देश्य बिक्री बढ़ाना न होकर लोगों को नई जानकारियां देना होता है। जन चेतना और जनजागृति बढ़ाने के लिए भी इस तरह के विज्ञापन जारी किए जाते हैं। बाल मजदूरी, दहेज जैसी कुप्रथाओं के खिलाफ या पर्यावरण संरक्षण, सर्व शिक्षा अभियान आदि की चेतना बढ़ाने के लिए या पोलियो आदि कुछ खास रोगों के उपचार सम्बन्धी जरूरी जानकारियों के लिए भी इस तरह के विज्ञापन जारी होते हैं। समय से कर चुकाने, मताधिकार का प्रयोग करने, जनसंख्या वृद्धि को रोकने जैसे विषयों को भी इन विज्ञापनों के जरिए प्रचारित किया जाता है।
इन विज्ञापनों का उद्देश्य आर्थिक लाभ कमाना नहीं होता बल्कि ये सामाजिक चेतना जगाने का काम करते हैं। इस तरह के विज्ञापन प्रायः सरकारी संस्थाओं और सामाजिक संगठनों द्वारा जारी किए जाते हैं।
प्रमाण सम्बन्धी विज्ञापन:- ऐसे विज्ञापन होते हैं जिनमें कोई महत्वपूर्ण व्यक्ति किसी खास उत्पाद के गुणों को प्रमाणित करता है। जिसमें वह यह बताता है कि अमुक चीज के प्रयोग से उसे क्या फायदा हुआ। इस तरह के विज्ञापन उपभोक्ता को गहराई से प्रभावित करते हैं। इसी तरह सहकारी विज्ञापन किसी खास वस्तु की मांग बढ़ाने के लिए विभिन्न संगठनों द्वारा मिलकर जारी किए जाते हैं। इनमें किसी खास ब्रांड के बजाए मूल वस्तु की खूबियां बताई जाती हैं। जैसे मां के दूध के गुण बताता विज्ञापन या अण्डों के गुणों के बारे में विज्ञापन।
3.) प्रसार क्षेत्र के आधार पर :
प्रसार क्षेत्र के आधार पर विज्ञापनों को 4 श्रेणियों, अर्न्तराष्ट्रीय, राष्ट्रीय क्षेत्रीय और स्थानीय में बाटा जा सकता है।
अन्तर्राष्ट्रीय :- जब कोई एक संगठन या कंपनी एक से अधिक देशों में किसी उत्पाद या सेवा का प्रचार करने के लिए विज्ञापन करती है तो ऐसे विज्ञापनों को अंतर्राष्ट्रीय विज्ञापन कहा जाता है। ये विज्ञापन बेहद खर्चीले होते हैं और इनकी भाषा तथा माध्यम का चयन बहुत सोच समझकर किया जाता है। प्रायः बहुराष्ट्रीय कंपनियां इस तरह के विज्ञापन जारी करती हैं और इनका प्रसारण प्रायः अंतर्राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं और इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों के जरिए किया जाता है। इन विज्ञापनों पत्र पत्रिकाओं और इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों के जरिए किया जाता है। इन विज्ञापनों का उद्देश्य ब्रांड को बढ़ावा देना है। मुक्त अर्थव्यवस्था के दौर में आज कल इस तरह के विज्ञापन अधिक लोकप्रिय होने लगे हैं। अर्न्तराष्ट्रीय विमान सेवाएं, होटल समूह, डिजाइनर घड़ियाँ, इलैक्ट्रानिक उत्पाद, पेय और भोज्य पदार्थ आदि से जुड़े उत्पादों के निर्माता इस तरह के विज्ञापनों का सहारा लेते हैं।
राष्ट्रीय विज्ञापन : राष्ट्रीय विज्ञापन किसी उत्पाद या सेवा का राष्ट्रीय स्तर पर विज्ञापन करते हैं। चूंकि हमारे देश में अनेक भाषाएं हैं। अतः राष्ट्रीय विज्ञापन एक से अधिक भाषाओं में तैयार किए जाते हैं। एक ही वस्तु को अलग-अलग कंपनियां उत्पादित करती हैं। हर कंपनी को अपने ब्रांड को श्रेष्ठ बताने के लिए इस तरह के विज्ञापन का सहारा लेना पड़ता है। सौन्दर्य प्रसाधन, घरेलू उपकरण, मोबाइल सेवाएं आदि ऐसे अनेक विषय हैं जिनका विज्ञापन राष्ट्रीय स्तर पर किया जाता है। बैंक और वाणिज्यिक प्रतिष्ठान भी इस तरह के विज्ञापनों का प्रयोग करते हैं। ऐसे विज्ञापन प्रकाशन और प्रसारण माध्यमों का अधिक उपयोग करते हैं। क्रिकेट मैच के दौरान दिखाए जाने वाले विज्ञापन भी इसी तरह के होते हैं।
क्षेत्रीय विज्ञापन:- किसी क्षेत्र विशेष के लिए तैयार किए जाने वाले विज्ञापन क्षेत्रीय विज्ञापन कहलाते हैं। इन विज्ञापनों का संदेश क्षेत्रीय भाषाओं में होता है। रेडियो, टेलीविजन और क्षेत्रीय पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित होने वाले ये विज्ञापन स्थानीय भाषा में होने के कारण अधिक प्रभावशाली होते हैं और क्षेत्रीय आवश्यकताओं के अनुरूप उत्पादों के बारे में होने के कारण इनकी उपयोगिता भी अधिक होती है।
स्थानीय विज्ञापन : इनका प्रसार क्षेत्र अपेक्षाकृत बहुत छोटा होता है और ये स्थानीय स्तर पर उत्पाद की बिक्री बढ़ाने में काम आते हैं। इनमें आकर्षक छूट, ईनामी योजनाओं का जिक्र होता है। किसी खास तरह के स्थानीय उत्पाद के लोकप्रिय उत्पादक का विवरण होता है या आम जरूरत की चीजों विवरण होता है। ये विज्ञापन प्रत्यक्ष बिक्री बढ़ाने वाले होते हैं और इनका प्रसारण स्थानीय पत्र, रेडियो, टीवी, केबल नेटवर्क, बैनर, पोस्टर, स्लाइड आदि के द्वारा होता है।
4.) संदेश के आधार पर :
संदेश के आधार पर भी विज्ञापनों का वर्गीकरण किया जाता है। इस आधार पर विज्ञापनों को चार वर्गों में बांटा जा सकता है।
1. उत्पाद विषयक
2. व्यवसाय विषयक
3. मांग विषयक
4. लाभ विषयक
उत्पाद विषयक :- उत्पाद का अर्थ है कोई वस्तु या सेवा जिसे प्राप्त करने के लिए उपभोक्ता मूल्य चुकाता है। किसी उत्पाद की बिक्री बढ़ाने के लिए किया जाने वाला विज्ञापन उत्पाद विषयक विज्ञापन कहलाता है। ये विज्ञापन प्रत्यक्ष उत्पादों जैसे घरेलू जरूरत की चीजों, कपड़ों, खाद्य पदार्थों आदि तथा अप्रत्यक्ष उत्पादों जैसे वित्तीय शैक्षणिक, चिकित्सा सुविधाओं आदि के बारे में भी हो सकते हैं और जैसे वित्तीय, शैक्षणिक, चिकित्सा सुविधाओं आदि के बारे में भी हो सकते हैं और विज्ञापनकर्ता द्वारा अपनी पहचान बनाने के लिए सामाजिक संदेश के रूप में भी हो सकते हैं। बड़ी-बड़ी कंपनियां इस तरह के विज्ञापन जनहित के लिए जारी शीर्षक के अंतर्गत भी करती हैं।
व्यवसाय विषयक:- इस तरह के विज्ञापन व्यवसाय सम्बन्धी आवश्यकताओं के लिए किए जाते हैं। विभिन्न कंपनियों के लिए कर्मचारियों की आवश्यकता बैंक बीमा कंपनियों की योजनाएं, शिक्षा संस्थानों के विज्ञापन आदि इस श्रेणी में आते हैं। ये विज्ञापन आम उपभोक्ता के बजाए वर्ग विशेष को लक्ष्य कर बनाए जाते हैं।
मांग सम्बन्धी: इस तरह के विज्ञापन किसी उत्पाद की मांग पैदा करने या उसे बढ़ाने के लिए किए जाते हैं। जैसे यदि किसी खास वाहन या ए सी का विज्ञापन यह कहे कि वह वाहन अन्य उपलब्ध वाहनों की तुलना में अधिक माइलेज देता है या वह ए सी दूसरों की तुलना में कम बिजली खर्च करता है तो इन विज्ञापनों से विज्ञापित उत्पादों की मांग बढ़ती है। मांग सम्बन्धी विज्ञापन प्राथमिक मांग वाले भी होते हैं। जैसे सेहत के लिए रिफाइंड तेल अधिक अच्छा है ऐसा कहने वाला विज्ञापन रिफाइंड तेल की मांग बढ़ाता है किसी खास ब्रांड की नहीं। इसलिए इन्हें प्राथमिक मांग वाला विज्ञापन कहा जाता है।
लाभ विषयक:- इस प्रकार के विज्ञापन उपभोक्ता को तुरन्त लाभ के बारे में बताते हैं जैसे एक उत्पाद के साथ एक उत्पाद मुफ्त या फलां उत्पाद लेने पर फलां मूल्य का एक उपहार या मोबाइल लेने पर सिमकार्ड साथ में आदि। इस तरह के विज्ञापन उत्पाद की तात्कालिक बिक्री बढ़ाने में सहायक होते हैं और सीमित अवधि के होते हैं।
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