शोध अभिकल्प के प्रकार - अन्वेषणात्मक, विवरणात्मक, नैदानिक और प्रयोगात्मक
Types of Research Design - Exploratory, Descriptive, Clinical, Experimental - शोध अभिकल्प के प्रकार - अन्वेषणात्मक, विवरणात्मक, नैदानिक, प्रयोगात्मक
शोध अभिकल्प के प्रकार
शोध विषय की प्रकृति, उद्देश्यों एवं परिकल्पना में अत्यधिक भिन्नता होने के कारण उनसे सम्बद्ध शोध अभिकल्प भी भिन्न होते हैं।
अन्वेषणात्मक शोध अभिकल्प (Exploratory research design)
अन्वेषणात्मक शोध अभिकल्प का संबंध नवीन तथ्यों की खोज से होता है। पहले से मौजूद तथ्यों अथवा सिद्धांतों का व्यापक अध्ययन करने के लिए अन्वेषणात्मक शोध अभिकल्प का प्रयोग किया जाता है। जब के समस्या के चुनाव और शोध कार्य के लिए उसकी उपयुक्तता के संबंध में अन्य किसी स्रोत से कुछ ज्ञान प्राप्त नहीं हो पाता है उस अवस्था में अन्वेषणात्मक शोध अभिकल्प की सहायता से पर्याप्त मदद मिल सकती है। अन्वेषणात्मक शोध अभिकल्प किसी समस्या या स्थिति की अंतर्दृष्टि और समझ प्रदान करता है।
इसका लक्ष्य विषय विशेष में गहन अंतर्दृष्टि प्राप्त करना है। इसके अतिरिक्त कभी-कभी शोध विषय की उपयुक्तता का ज्ञान प्राप्त करने के लिए भी इस प्रकार के शोध अभिकल्प का निर्माण किया जाता है। अन्वेषणात्मक शोध के लिए निम्नलिखित विधियों को अपनाना चाहिए
• संबद्ध साहित्य का अध्ययन व समीक्षाः अन्वेषणात्मक शोध अभिकल्प के निर्माण के प्रारंभ में अध्ययन विषय से संबंधित प्रकाशित एवं अप्रकाशित साहित्य का गहनता से अध्ययन किया जाता है। इसमें विषय या समस्या से संबंधित संदर्भ शोध, रिपोर्ट, पत्र-पत्रिकाएं, साहित्य, पुस्तकों और लेखों इत्यादि का अध्ययन किया जाता है। शोधकर्ता द्वारा चुने गए विषय से मिलते-जुलते विषय पर उपलब्ध साहित्य के अध्ययन से शोध विषय को अंतिम रूप देने में मदद मिलती है।
• अनुभव सर्वेक्षण: मिलते-जुलते विषय पर शोध कर रहे या पूर्व में कर चुके शोधकर्ताओं से साक्षात्कार और बातचीत के जरिए किए गए सर्वेक्षण शोध अभिकल्प की योजना बनाने में मदद मिलती है। अंतर्दृष्टि प्रेरक घटनाओं का विश्लेषण अन्वेषणात्मक शोध की एक महत्वपूर्ण अनिवार्यता अंतर्दृष्टि प्रेरक घटनाओं का संकलन, वर्गीकरण एवं विश्लेषण करना है। इसका तात्पर्य यह है कि किसी भी विषय विशेष का गहन अध्ययन करके अंतर्दृष्टि विकसित हो सकती है। अंतर्दृष्टि विकसित होने से तथ्यों को समझने और परिकल्पना विकसित करने में सहायता होती है।
अन्वेषणात्मक शोध अभिकल्प का उद्देश्य प्रारंभिक जानकारी इकट्ठा करना है जो समस्याओं को परिभाषित करने और परिकल्पना का सुझाव देने में मदद करता है।
अन्वेषणात्मक शोध अभिकल्प की विशेषताएं
• इस अभिकल्प के माध्यम से अज्ञात तथ्यों की खोज या सीमित ज्ञान के बारे में व्यापक खोज की जाती है।
• अन्वेषणात्मक अनुसंधान अभिकल्प घटनाओं में व्याप्त नियमितता और श्रृंखलाबद्धता को स्पष्टता के साथ प्रस्तुत करता है।
• जहां अर्जित ज्ञान सीमित है तथा प्रयोगात्मक अनुसंधान संभव नहीं है, वहां अन्वेषणात्मक शोध किया जाता है। यह शोध को प्राथमिक दिशा प्रदान करता है।
• अन्वेषणात्मक शोध के आधार पर वर्तमान अवधारणाओं का स्पष्टीकरण एवं नवीन अवधारणाओं की खोज की जाती है।
• अन्वेषणात्मक अनुसंधान अभिकल्प शोध से संबंधित प्राथमिक सूचनाएं एवं सामग्री प्रदान करके शोध के कार्य को एक निश्चित दिशा प्रदान करता
विवरणात्मक या वर्णनात्मक शोध अभिकल्प (Explanatory or descriptive research design)
• किसी स्थिति, समूह या व्यक्ति विशेष की विशेषताएं जानने के लिए वर्णनात्मक शोध अभिकल्प अपनाया जाता है।
• विषय या समस्या के संबंध में वास्तविक तथ्यों के आधार पर वर्णनात्मक विवरण प्रस्तुत करना इसका मुख्य उद्देश्य है।
वर्णनात्मक शोध अभिकल्प के द्वारा घटनाओं अथवा तथ्यों को उसी रूप में प्रस्तुत करने पर बल दिया जाता है, जैसा कि वे वास्तव में है। वर्णनात्मक शोध अभिकल्प के अंतर्गत जनगणना प्रतिवेदन एवं किसी विषय से जुड़े लोगों के विचारों के अध्ययन को रखा जा सकता है। इस तरह के शोध अभिकल्प में प्रश्नावली, साक्षात्कार अनुसूची तथा अवलोकन इत्यादि के माध्यम से तथ्य अथवा सामग्री संकलित की जाती है। साथ ही इसमें घटना का उल्लेख किया जाता है, जिसके आधार पर यथार्थता का अध्ययन किया जाता है।
वर्णनात्मक शोध अभिकल्प के उद्देश्य
किसी विशेष व्यक्ति, स्थिति या समूह की विशेषताओं का सटीक चित्रण या वर्णन प्रदान करना
वर्तमान स्थिति की व्याख्या, आवृत्ति और जानकारी का वर्गीकरण करना।
• चयनित चरों के बीच सह-संबंधों को खोजना।
वर्णनात्मक शोध अभिकल्प की विशेषताएं
पूर्ण और यथार्थ सूचना प्राप्त करना
• वर्णनात्मक शोध अभिकल्प यह निर्धारित करता है कि दो या दो से अधिक चर के बीच संबंध है या नहीं।
• इस प्रकार के शोध अभिकल्प में तथ्यों का संकलन किसी भी वैज्ञानिक विधि के द्वारा किया जा सकता है। प्रायः साक्षात्कार, अनुसूची और प्रश्नावली, प्रत्यक्ष निरीक्षण, सहभागी निरीक्षण, सामुदायिक रिकॉर्ड का विश्लेषण आदि प्रविधियों को वर्णनात्मक शोध अभिकल्प में सम्मिलित किया जाता है।
• वर्णनात्मक शोध अभिकल्प में मिथ्या झुकाव तथा पूर्व धारणाओं से बचाव आवश्यक
• एकत्रित आँकड़ों की व्याख्या कई प्रकार से करी जा सकती है।
नैदानिक शोध अभिकल्प (Clinical research design)
शोधकर्ता किसी समस्या के वास्तविक कारणों को जानने तथा उसका निवारण करने के उद्देश्य से जिस शोध अभिकल्प का निर्माण करता है उसे नैदानिक शोध अभिकल्प कहते हैं। नैदानिकशोध कार्य में समस्या का पूर्ण एवं विस्तृत अध्ययन वैज्ञानिक ढंग से करके समस्या की गहराई में पहुंचने का प्रयास किया जाता है। जिससे समस्या के प्रत्येक संभावित कारण का ठीक से पता लगाया जा सके। इस प्रकार के शोध अभिकल्प में समस्याओं के कारणों का पता लगाने के लिए चरों का परीक्षण किया जाता है।
नैदानिक शोध अभिकल्प की विशेषताएं
नैदानिक शोध किसी शोध समस्या के समाधान की खोज के लिए किया जाता है।
• नैदानिक शोध कार्य वैज्ञानिक पद्धति का निश्चित रूप से अनुसरण करता है जिसका प्रथम चरण परिकल्पना निर्माण और उसी के आधार पर अध्ययन का संचालन है।
नैदानिक शोध कार्य की आवश्यकता सामाजिक व्यवस्था व सामाजिक संबंधों से उत्पन्न सामाजिक समस्याओं को शीघ्रातिशीघ्र उपाय करने या उपचार की खोज करने से संबंद्ध होती है।
• नैदानिक शोध में सर्वप्रथम वैज्ञानिक ढंग से समस्या के कारणों का सही रूप से पता करने का प्रयत्न किया जाता है।
नैदानिक शोध में समस्या का उपचार के विषय में वर्णन एवं विश्लेषण किया जाता है।
प्रयोगात्मक शोध अभिकल्प
• प्रयोगात्मक शोध अभिकल्प का प्रयोग चरों के बीच कारणात्मक संबंधों का परीक्षण करने के लिए किया जाता है। इसमें अध्ययन समस्या के विश्लेषण हेतु किसी न किसी प्रकार का 'प्रयोग' समाहित होता है।
नियंत्रित दशाओं में निरीक्षण परीक्षण के द्वारा शोध समस्या का व्यवस्थित अध्ययन करने की रूपरेखा को प्रयोगात्मक शोध अभिकल्प कहते हैं। यह अभिकल्प नियंत्रित स्थिति में जैसे कि प्रयोगशालाओं में ज्यादा उपयुक्त होता है।
• यह विधि समूहों में किये जाने वाले अध्ययनों पर आधारित है। नियंत्रित समूह और प्रयोगिक समूह बिल्कुल एक जैसे होते हैं, इसमें केवल वह चर प्रभावकारी नहीं होता है जिसका अध्ययन किया जाना है।
मात्रात्मक शोध में अध्ययन अभिकल्प
अध्ययन जनसंख्या के साथ संपर्कों की संख्या के आधार पर, अभिकल्पों को दो समूहों में वर्गीकृत किया जा सकता है:
1. क्रॉस सेक्शन अध्ययन अभिकल्प
2. अनुदैर्ध्य अध्ययन अभिकल्प
क्रॉस सेक्शन अध्ययन अभिकल्प
• क्रॉस सेक्शन अभिकल्प में एक ही समय पर अलग अलग आयु वर्ग के प्रतिदर्श को लेकर उनका अध्ययन किया जाता है। यह शोध संरचना एक घटना, स्थिति, समस्या, अभिवृत्ति या मुद्दे के प्रसार को जानने वाले अध्ययनों के लिए सबसे उपयुक्त है। उदाहरण के लिए, एक उत्पाद के प्रयोग से उपभोक्ता संतुष्टि के स्तर का मापन अथवा एक समुदाय की स्वास्थ्य के आवश्यकताओं का आंकलन।
इस शोध अभिकल्प में अध्ययन जनसंख्या के साथ केवल एक बार संपर्क होता है, इसलिए यह तुलनात्मक रूप से सस्ता और विश्लेषण करने में आसान होता है।
• इसमें शोधकर्ता कम समय में कम व्यय से बहुत सी महत्वपूर्ण सूचनाएँ एकत्रित कर सकता है। उदाहरणः परिवार में खाद्य उपलब्धता तथा नवजात शिशुओं का वजन व लम्बाई।
अनुदैर्ध्य अध्ययन
इसमें प्रतिभागियों के एक ही समूह का बार बार परीक्षण या निरीक्षण किया जाता है।
इस विधि में एक ही समूह को लेकर दीर्घकालीन अध्ययन किया जाता है। समय के अनुसार परिवर्तन के स्वरूप को निर्धारित करने के लिए एक अनुदैर्ध्य अभिकल्प का उपयोग किया जाता है। जब निरंतर आधार पर तथ्यात्मक जानकारी एकत्र करने की आवश्यकता होती है तब अनुदैर्ध्य अध्ययन उपयोगी होते हैं।
अध्ययन में अंतराल की सीमा तय नहीं होती हैं, अंतराल की सीमा प्रत्येक अध्ययन में भिन्न हो सकती है।
अनुदैर्ध्य अध्ययन का मुख्य लाभ यह है कि यह शोधकर्ता को परिवर्तन के पैटर्न को मापने और तथ्यात्मक जानकारी प्राप्त करने की अनुमति देता है, जिससे परिणामों की सटीकता में वृद्धि होती है।
इसका नकारात्मक पहलू यह है कि यह लम्बी अवधि तक चलने वाला अध्ययन है। इसलिए इसमें धन तथा समय अधिक लगता है। बार-बार उन्हीं प्रतिभागियों से संपर्क उनके व्यवहार को प्रभावित करता है, जिससे शोध के परिणाम प्रभावित हो सकते हैं।
किसी बीमारी की व्यापकता, प्रसार या मृत्यु दर में परिवर्तन, प्रजनन दर आदि पर शोध
के लिए अनुदैर्ध्य या लम्बवर्तीय अध्ययन अभिकल्प का प्रयोग किया जाता है।
संदर्भ अवधि के आधार पर अध्ययन अभिकल्प
संदर्भ अवधि उस समय सीमा को संदर्भित करती है जिसमें एक अध्ययन के अंतर्गत एक घटना, स्थिति या समस्या की खोज की जाती है। संदर्भ अवधि के आधार पर, अध्ययन अभिकल्पों को दो समूहों में वर्गीकृत किया जा सकता है:
1. पूर्ववर्ती अध्ययन अभिकल्प
2. भावी अध्ययन अभिकल्प
पूर्ववर्ती अध्ययन अभिकल्प
पूर्ववर्ती अध्ययन अतीत में हुई एक घटना, स्थिति, समस्या के कारणों की जांच में करते हैं। एक पूर्ववर्ती अध्ययन में विगत समय में प्रभावित करने वाले संदिग्ध जोखिम कारकों या सुरक्षा कारकों की जाँच की जाती है। अध्ययन के लिए शोधकर्ता उन प्रतिभागियों को नामांकित करते हैं जिनको पहले से ही बीमारी होती है या उन्होंने पहले से ही किसी घटना, स्थिति या समस्या का अनुभव किया हो।
पूर्ववर्ती अध्ययन के लिए आँकड़े एकत्र करने के दो तरीके हैं; जांचकर्ता लिखित साक्ष्य जैसे, किताबें, पत्रिकाएं, समाचार पत्र, डायरी और अन्य व्यक्तिगत अभिलेखों से जानकारी एकत्र करता है, या वह उन उत्तरदाताओं से पूछता है जो अध्ययन विशेष वाली घटना को याद कर सकते हैं।
• पूर्ववर्ती अध्ययनों में पूर्वाग्रह की संभावनाएं अधिक होती हैं क्योंकि इसमें आँकड़ें किसी प्राथमिक स्रोत से प्राप्त नहीं किये जा सकते हैं। पूर्वाग्रह की संभावनाओं से बचने के लिए जांचकर्ता को बड़ा प्रतिदर्श आकार लेने की आवश्यकता होती है। अतीत में हुई चिकित्सा परिस्थितियों का अध्ययन करने में यह विधि बहुत उपयोगी है।
• उदाहरण के लिए, “फेफड़ों के कैन्सर व धूम्रपान में सहसंबंध” निर्धारण के लिए फेफड़ों के कैन्सर से ग्रस्त रोगियों की धूम्रपान की आदत का पूर्ववर्ती अध्ययन किया जाता है।
भावी अध्ययन अभिकल्प
● भावी अध्ययन अभिकल्प भविष्य में होने वाली किसी घटना, स्थिति, कार्यक्रम, अभिवृत्ति या बीमारी के प्रभाव या कारण का अध्ययन किया जाता है। भावी अध्ययन अभिकल्प में किसी संदिग्ध जोखिम कारक या सुरक्षा कारक के प्रभाव को आने वाले समय में अध्ययन किया जाता है। अध्ययन के लिए प्रतिभागियों को बीमारी या घटना, स्थिति, कार्यक्रम, अभिवृत्ति के विकास से पूर्व ही नामांकित कर लिया जाता है।
• उदाहरण के लिए, “फेफड़ों के कैन्सर व धूम्रपान में सहसंबंध” निर्धारण के लिए धूम्रपान की आदत वाले व्यक्तियों में फेफड़ों के कैन्सर होने की सम्भावना का भावी अध्ययन किया जा सकता है।
कोहर्ट अध्ययन
• कोहोर्ट अध्ययन जनसंख्या के बीच कुछ सामान्य विशेषताओं के आधार पर आयोजित किए जाते हैं। यह विशेषता उम्र, रोजगार, शादी, शिक्षा वर्ष, प्रजनन व्यवहार या अन्य जनसांख्यिकी जैसे किसी भी कारक के रूप में हो सकती है।
• एक कोहोर्ट अध्ययन अनुदैर्ध्य अध्ययन का एक विशेष रूप है जो एक कोहोर्ट के प्रतिदर्श का चयन करता है जो समय के साथ एक निश्चित अंतराल पर क्रॉस-सेक्शन अध्ययन का प्रदर्शन करते हैं।
• यह एक प्रकार का पैनल अध्ययन है जहां एक पैनल के अंतर्गत व्यक्ति एक सामान्य विशेषता साझा करते हैं।
रुझान अध्ययन
• एक निश्चित अवधि में परिवर्तन का आलेख बनाने के लिए रुझान अध्ययन सबसे उचित अभिकल्प है। रुझान विश्लेषण से पता चलता है कि अतीत में क्या हुआ है, वर्तमान में क्या हो रहा है और भविष्य में जनसंख्या समूह में क्या होने की संभावना है। इस अभिकल्प में अध्ययन के तहत घटना के संबंध में वर्तमान या तत्काल अतीत के आंकड़ों से भविष्य के रुझानों के बारे में कुछ धारणाएं बनाई जाती हैं और परिवर्तन के रुझान के बारे में निष्कर्ष निकाले जाते हैं।
• रुझान अध्ययन वर्तमान और अतीत के रुझानों के फलस्वरूप भविष्यवाणी करने में उपयोगी होते हैं जिससे योजना बनाने में महत्वपूर्ण योगदान मिलता है। रुझान अध्ययन का उपयोग फैशन, उपभोगता व्यवहार, पोषण स्तर आदि से संबंधित शोध के लिए उपयोग किया जा सकता है।
गुणात्मक शोध में अध्ययन अभिकल्प
• गुणात्मक अध्ययन अभिकल्प के लिए केस स्टडी अभिकल्प, मौखिक इतिहास, फोकस समूह अध्ययन, अवलोकन, साक्षात्कार, और सामुदायिक चर्चा आदि का प्रयोग किया जाता है। यह सभी विधियाँ आँकड़े संग्रह करने के तरीके भी हैं।
अच्छे शोध अभिकल्प की विशेषताएं
• शोध अभिकल्प को उपयुक्त होना चाहिए तभी प्रयोग के विश्वसनीय परिणाम प्राप्त किये जा सकते हैं। शोध अभिकल्प जटिल या सरल न होकर चाहिये। उपयुक्त उपयुक्त होनी अभिकल्प के चयन द्वारा शोधकर्ता अध्ययन की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए वस्तुनिष्ठ विधि से प्रयोगात्मक अवस्थाएं व्यवस्थित करता है।
• एक अच्छा अभिकल्प लचीला, उचित, कुशल, और मितव्यय होता है। एक अच्छा अभिकल्प पूर्वाग्रह को कम करता है और एकत्रित और विश्लेषण किए गए आँकड़ों की विश्वसनीयता को अधिकतम करता है।
वह अभिकल्प, जो अधिकतम जानकारी प्रदान करता है और किसी शोध समस्या के अलग-अलग पहलुओं पर विचार करने का अवसर प्रदान करता है, सबसे उपयुक्त और कुशल अभिकल्प माना जाता है।
• अच्छा शोध अभिकल्प शोधकर्ता को एक निश्चित दिशा का बोध कराता है।
• एक अच्छा शोध अभिकल्प शोधकर्ता को समय प्रबन्धन में मदद: करता है।
• अच्छा शोध अभिकल्प शोध समस्या के उद्देश्य और समस्या की प्रकृति को समझ कर बनाया जाता है। कोई एक अभिकल्प सभी प्रकार की शोध समस्याओं के उद्देश्य को पूरा नहीं कर सकता है।
एक विशेष शोध समस्या के लिए उपयुक्त एक शोध अभिकल्प तैयार करने के लिए निम्नलिखित कारकों पर
विचार करना चाहिए;
• जानकारी प्राप्त करने के साधन
शोधकर्ता के पास संसाधनों की उपलब्धता और कौशल
अध्ययन की समस्या का उद्देश्य
• अध्ययन की समस्या की प्रकृति
• शोध कार्य के लिए समय और धन की उपलब्धता।
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