विज्ञापन क्या होता हैं - What is Advertisement

पत्रकारिता एवं जनसंचार के आधुनिक युग में विज्ञापन पत्रकारिता की रीढ़ की हड्डी बन गयी है। जिस तरह एक व्यक्ति रीढ़ की हड्डी के बिना खड़ा नहीं रह पाता उसी तरह पत्रकारिता जगत के किसी भी समाचार पत्र पत्रिका या जनसंचार माध्यम का विज्ञापन के बिना चलना असम्भव सा हो गया है। इसी लिए कुछ विद्वानों का कहना है कि विज्ञापन पत्रकारिता व जनसंचार माध्यमों की 'बैकबोन है। आजकल पत्रकारिता जगत में जो क्रांति आयी है उसमें विज्ञापन की बहुत बड़ी भूमिका है। समाचार पत्र-पत्रिकाओं व अन्य जनसंचार माध्यमों (टी.वी. रेडियो आदि) के लिए विज्ञापन आय के सबसे बड़े स्रोत है। पत्रकारिता में विज्ञापन के महत्व को देखते हुये इस इकाई में विज्ञापन के अर्थ एवं उद्देश्य से परिचय कराया जा रहा है।


आज के युग को विज्ञापन का युग कहें तो इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। दिन-प्रतिदिन बढ़ते औद्योगीकरण तथा व्यावसायिक प्रतियोगिता के इस दौर में विज्ञापन का विशेष स्थान हो गया है। विज्ञापनों के बढ़ते प्रभाव के कारण आज विज्ञापन अध्ययन एवं प्रशिक्षण की विशेष शाखा के रूप में विकसित होने लगा है। किसी भी पत्र-पत्रिका के पन्ने पलट कर देखिए एक से बढ़कर एक सुन्दर चेहरे चित्र या ग्राफिक दृश्य तथा शब्दों के आकर्षक संयोजन के जरिए वस्तु विशेष के प्रति आपको आकृष्ट करते दिखाई देंगे गावों, नगरों या महानगरों को सीधी सपाट सरल जिन्दगी से लेकर व्यस्ततम तीव्र गति एवं यांत्रिक जीवन में प्रवेश करके देखिए आप जगह-जगह पर विज्ञापनों की विविध आयामी दुनिया से प्रत्यक्ष साक्षात्कार कर सकते हैं। घर में अवकाश के अथवा कामकाज के क्षणों में रेडियो का या टीवी का बटन दबाइये शब्द संगीत और चित्र से समन्वित कर्णप्रिय स्वर तथा नयनाभिराम दृश्य कभी आपको किसी खास ट्रेडमार्क की चाय, कॉफी, शीतल पेय पदार्थ आदि पीने के लिए प्रेरित करेंगे या फिर किसी नाम विशेष के टूथपेस्ट अथवा मंजन आदि से दांतों की सफाई का निवेदन करेंगे। कभी आपको कोई फिल्म अभिनेत्री यह बताएगी कि आप यदि उसकी पसंद के साबुन से स्नान करेंगे तो सदा तरोताजा रहेंगे। इस मनोवृत्ति पर मोहन राकेश ने अत्यन्त रोचक बात लिखी


विज्ञापन ! विज्ञापन !! सर्वत्र विज्ञापन !!!


आज विज्ञापन हमारे जीवन की दिनचर्या का एक जरूरी अंग बन गया है। व्यवसाय के उत्तरोत्तर विकास अपनी वस्तु की मांग को बाजार में बनाए रखने, नई वस्तु का परिचय जनमानस तक प्रचलित करने, विकय में वृद्धि करने तथा अपने प्रतिष्ठान की प्रतिष्ठा कायम रखने आदि कुछ प्रमुख उद्देश्यों को लेकर विज्ञापन किए जाते हैं।


यह विज्ञापन का ही प्रभाव है कि कल तक समाज जिन वस्तुओं को विलास सामग्री मानता था. वे ही आज आवश्यक वस्तुओं की श्रेणी में गिनी जाने लगी हैं। विज्ञापन जहां समाचार माध्यमों के लिए राजस्व जुटाने का काम करते हैं वहीं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में कुछ विज्ञापनों द्वारा दर्शकों का मनोरंजन भी होता है। खासकर बच्चे इन विज्ञापनों से काफी प्रभावित भी होते हैं।




वर्तमान युग में औद्योगिक क्रांति के परिणामस्वरूप उपभोग्य वस्तुओं का उत्पादन बड़ी मात्रा में हो रहा है, जिनके विपणन हेतु विज्ञापन की मत्वपूर्ण भूमिका है। फिल्म, रेडियो, टेलीविजन, पोस्टर्स, हैंडबिल, साइनबोर्ड, लोकल केबल टी.वी. नेटवर्क, सिनेमा स्लाइड, इंटरनेट और बैलून आदि अनेक माध्यमों से विज्ञापन होता है परन्तु अब तक समाचार पत्र ही सर्वाधिक सक्षम एवं उपयोगी माना जाता है। पत्रों में छपे विज्ञापनों की आंखों पर प्रतिक्रिया होती है, मन आकर्षित होता है और वस्तु विशेष के प्रति ध्यान केन्द्रित हो जाता है। वास्तव में विज्ञापन का कार्य भी जन सामान्य का ध्यान किसी सामग्री अथवा सेवा व व्यक्ति विशेष की ओर आकर्षित करना है।




आज किसी भी वस्तु सेवा या विचार को आगे बढ़ाने के लिए विज्ञापन को एक सहारा बनाया जाता है। आज का युग यों भी विज्ञापन का युग है। किताबों से लेकर पत्रिकाओं तक सड़क से लेकर घर तक और संचार के तमाम साधनों में विज्ञापन ही विज्ञापन नजर आते हैं।