महिला कल्याण - Women Welfare
महिला कल्याण - Women Welfare
प्रसूति लाभ अधिनियम, 1961 मैटरनिटी बेनिफिट एक्ट 1961 का उद्देश्य शिशु जन्म के पूर्व तथा जन्म के पश्चात् के कुछ समय काल में महिला कर्मचारियों के रोजगार को नियंत्रित करना और मैटरनिटी और कुछ अन्य लाभों की व्यवस्था करना है या वह होने है। इस अधिनियम के दायरे में सभी फैक्ट्रियां, खाने बागान घुड़सवारी कलाबाजी और अन्य करतब के प्रदर्शन में कार्यरत संस्थापनाएं और दुकान और संस्थापनाएं आती है जहां एक वर्ष के दौरान किसी एक समय पर 10 या इससे अधिक व्यक्ति काम पर रखें गए हों। (सिवाय उन के जो ESI Act के दायरे में आते हैं)।
इस अधिनियम के तहत प्रत्येक महिला कर्मचारी जिसने अपने प्रत्याशित प्रसव से तुरंत पहले बारह महीनों के दौरान कम से कम 80 दिन काम किया हो वह निम्न मैटरनिटी बेनिफिट प्राप्त करने की अधिकारी है-
(1) 12 सप्ताह की अवधि के लिए मैटरनिटी छुट्टी जो कि प्रसव से पहले या बाद में ली जा सकती है, और
(ii) औसत दैनिक वेतन की दर पर, अपनी वास्तविक अनुपस्थिति की अवधि के लिए मैटर्निटी वैनिफिट इसके अतिरिक्त एक महिला कर्मचारी, गर्भपात, चिकित्सकीय गर्भ समाप्ति ट्यूबैक्टोमी आपरेशन, गर्भ धारण, डिलिवरी, बच्चे का समय पूर्व जन्म, मिसकैरिज, चिकित्सकीय गर्भ समाप्ति, या ट्यूबेक्टोमी आपरेशन से सम्बंधित रोकग के होने पर भी मैटर्निटी बेनिफिट प्राप्त करने का अधिकार है। महिला कर्मचारी जो मैटर्निटी बैनिपि की अधिक है, उसको 250 रुपये का मेडिकल बोनस भी दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त प्रत्येक महिला जब बच्चे के जन्म के बाद डयूटी पर वापिस आती हैं, जो बच्चे के 15 महीने की आयु प्राप्त करने उसको 15 मिनट के दो नर्सिंग ब्रेक भी दिए जाएंगे। अधिनियम के तहत नियोक्ता को निम्नलिखित कार्य करना जरूरी है।
1. मैटरनिटी बेनिफिट और मेडिकल बोनस का भुगतान,
2. नर्सिंग ब्रेक देना,
3. महिला कर्मचारी को उसकी डिलिवरी या मिसकैरेज या चिकित्सकीय गर्भ समाप्ति की तारीख के तुरन्त बाद 6 सप्ताह की अवधि तक काम पर नहीं रखना,
4. किसी गर्भवती महिला कर्मचारी से कोई श्रम-साध्य काम जिसमें लम्बे समय तक खड़ा रहना पड़े या कोई ऐसा काम जो उसके गर्भावस्था पर विपरीत प्रभाव डाले. या सर का कारण बने या उसकी सेहत पर बुरा असर डोले या मिसकैरेज का कारण बने या उसकी सेहत पर बुरा असर डाले संभावित डिलीवरी से नहीं करवाना, पहले छह हफ्ते से एक मास पूर्व और उक्त छह हफ्ते के दौरान नहीं करवाना,
5. मैटरनिटी छुट्टी के दौरान उस गर्भवती महिला कर्मचारी को नौकरी से नहीं निकालना या नौकरी से बर्खास्त नहीं करना।
उपर्युक्त जिम्मेदारियों के उल्लंघन पर सजा दी जा सकती है। परन्तु ठेकेदार या प्राइवेट नियोक्ताओं द्वारा इन जिम्मेदारियों का पालन हो रहा है, यह सुनिश्चित करने के लिए कोई नियंत्रण नहीं है। कई मामलों में मैटर्निटी छुट्टी नहीं दी जाती और गर्भवती महिलाओं को अपनी नौकरी छोड़नी पड़ती है। इसके अतिरिक्त न तो क्रेच सुविधाएं दी जाती है और न ही माताओं को शिशुओं को स्तन पान कराने की इजाजत दी जाती है।
समान पारिश्रमिक अधिनियम, 1976 :- इस अधिनियम में पुरुषों और महिला कर्मचारियों को एक ही काम पर या समान प्रकार के काम पर रखने पर एक बराबर पारिश्रमिक देने की व्यवस्था है और साथ ही रोजगार के मामले में लिंग के आधार पर महिलाओं के साथ भेदभाव बरतने पर रोक है। यह अधिनियम लगभग सभी तरह की संस्थापनाओं पर लागू होता है।

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