राष्ट्रीय जनसंख्या नीति - 1976 : National Population Policy - 1976

राष्ट्रीय जनसंख्या नीति - 1976 : National Population Policy - 1976

राष्ट्रीय जनसंख्या नीति - 1976 : National Population Policy - 1976

इस नीति में सरकार का लक्ष्य विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से सुनियोजित प्रयास द्वारा जनसंख्या नियंत्रित करना ही था। इस नीति के प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं -


1. 1984 तक जनसंख्या वृद्धि दर को 2.2 प्रतिशत से कम कर 1.7 तक लाना।


2. लड़कों के लिये विवाह की न्यूनतम आयु 21 वर्ष तथा लड़कियों की 18 वर्ष करना। 


3. केंद्रीय संसाधनों का 8 प्रतिशत धन परिवार नियोजन वाले राज्यों के लिए सुरक्षित रखना।


4. जनसंख्या शिक्षा नीति में शिक्षा प्रणाली एवं स्त्री शिक्षा के विकास पर ध्यान केंद्रित करना। 


5. परिवार नियोजन की अवधारणा का जनता के बीच प्रचार-प्रसार करना। 


6. परिवार नियोजन के लिए प्रोत्साहन राशि में वृद्धि करना।





सरकार ने परिवार नियोजन कार्यक्रम में जिला परिषदों, पंचायत समितियों, सहकारी संगठनों, अध्यापकों, श्रमिक संघों और स्त्रियों एवं युवकों के स्वैच्छिक संगठनों का सहयोग लिया। जनसंख्या नीति में तो नसबंदीकार्यक्रम को ऐच्छिक रखा गया था, लेकिन व्यवहार में इसे अनिवार्य बना दिया गया। क्योंकि इसको स्वीकार नहीं करने पर कई प्रकार की सुविधाओं से हाथ धोना पड़ सकता था। निष्कर्षत राष्ट्रीय जनसंख्या नीति का उद्देश्य लघु परिवारों के पक्ष में एक जन आन्दोलन का निर्माण करना था, लेकिन नसबन्दी कार्यक्रम को त्रुटिपूर्ण ढंग से एवं अपर्याप्त तैयारी के साथ लागू करने के कारण देशवासियों पर इसका उल्टा असर पड़ा।


1977 में आई जनता सरकार ने परिवार नियोजन के स्थान पर परिवार कल्याण की अवधारणा को स्वीकार किया और जनसंख्या नीति में भी परिवर्तन किया। 1980 में योजना आयोग ने जनसंख्या नीति पर एक कार्यदल का गठन किया। इसने जनसंख्या एवं विकास मापकों के बीच दोतरफा संबंधों की पहचान करने की आवश्यकता पर बल दिया। वर्ष 1991 में सरकार ने केरल के मुख्यमंत्री श्री करुणाकरण की अध्यक्षतामें जनसंख्या के बारे में एक समिति नियुक्ति की। वर्ष 1993 में इस समिति ने राष्ट्रीय विकास परिषद को सौंपी अपनी रिपोर्ट में राष्ट्रीय जनसंख्या नीति बनाए जाने की सिफारिश की। 1993 में सरकार ने राष्ट्रीय जनसंख्या नीति निर्धारित करने के लिए डॉ. स्वामीनाथन की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ दल का गठन किया। मई 1994 में जनसंख्या नीति का मसौदा प्राप्त हुआजिसे संसद में पेश किया गया। वर्ष 1994 से 2000 तक केंद्र की अस्थिर नीतियों की वजह से जनसंख्या नीति का यह मसौदा निष्क्रिय पड़ा रहा। वर्ष 1999 में मंत्रियों के एक दल ने परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा तैयार किए गए मसौदे की जांच की। फरवरी 2000 में सरकार ने राष्ट्रीय जनसंख्या नीति, 2000 की घोषणा की। यह नीति एम. एस. स्वामीनाथन की अध्यक्षता में गठित एक विशेष दल की रिपोर्ट पर आधारित है। इस नीति के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित थे - 






1. सन् 2045 तक जनसंख्या वृद्धि को स्थिर रखना। 


2. गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले लोगों को 5000 रूपये की स्वास्थ्य बीमा सुविधा उपलब्ध करायी जाएगी जिनके सिर्फ दो संतान हो तथा इसके बाद उन्होंने नसबंदी करा ली हो।


3. गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले उन लोगों को पुरस्कृत किया जाएगा जो निर्धारित आयु में विवाह करने के उपरांत 3 वर्ष बाद संतान को जन्मदें और छोटे परिवार के सिद्धांत को अपनाए। 


4. बाल विवाह निरोधक अधिनियम तथा प्रसवपूर्व लिंग परीक्षण तकनीकी निरोधक अधिनियम सख्ती से लागू हो।


5. ग्रामीण क्षेत्रों में एम्बुलेंस की सुविधा।


6. 14 वर्ष तक बुनियादी शिक्षा निःशुल्क एवं अनिवार्य करना। 


7. केंद्रीय सरकार उन स्थानीय एवं स्वशासी निकायों को पुरस्कृत करेगी जो अपने परिवार नियोजन एवं कल्याण के उपायों को अपनाने हेतु लोगों को प्रेरित करेगी।


8. गर्भावस्था, प्रसव एवं जन्म-मृत्यु का पंजीकरण ।


9. गैर-सरकारी संस्थाओं को परिवार नियोजन एवं कल्याण कार्य में जुड़ने हेतु प्रोत्साहित करना। 


10. राष्ट्रीय जनसंख्या आयोग का गठन करना। 







11. स्कूलों में बीच में ही पढ़ाई छोड़ देने वाले लड़के लड़कियों की संख्या 20 प्रतिशत से नीचे लाना


12. शिशु मृत्यु दर प्रति एक हजार जीवित बच्चों में 30 से कम करना।


13. जच्चा मृत्यु अनुपात प्रति एक लाख संतानों में एक सौ से कम करना।


14. टीकों से रोके जाने वाले रोगों से सभी बच्चों को प्रतिरक्षित करना।


15. लड़कियों के देर से विवाह को बढ़ावा देना। विवाह 18 वर्ष से पहले न हो, बेहतर होगा अगर यह 20 वर्ष की आयु के बाद हो।


16. अस्सी प्रतिशत प्रसव अस्पतालों, नर्सिंग होमों आदि में और 100 प्रतिशत प्रशिक्षित लोगों से कराना। 


17. सभी को सूचना, परामर्श तथा जनन क्षमता नियमन की सेवाएं और गर्भनिरोध के विभिन्न विकल्प उपलब्ध कराना। 


18. एड्स का प्रसार रोकना तथा प्रजनन अंग रोगों के प्रबंध तथा राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन के बीच अधिक समन्वय स्थापित हो।


19. संक्रामक रोगों को रोकना और उन पर काबू पाना। प्रजनन और शिशु स्वास्थ्यसुविधाओं को घरघर तक पहुंचाने के लिए भारतीय चिकित्सा प्रणालियों की समेकित करना।