राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2002 - National Health Policy 2002
राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2002 - National Health Policy 2002
भारत सरकार ने 1983 में राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति की घोषणा करने के 18 साल बाद राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति की घोषणा वर्ष 2002 में की। राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति का मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था के विकेन्द्रीकरण की पहुंच बढ़ाकरदेश के जन-साधारण के बीच बेहतर स्वास्थ्य के स्वीकार्य मानक प्राप्त करना है। इस उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए कमी वाले क्षेत्रों में नयी सुविधाएं जुटाने और वर्तमान संस्थानों में खलब्ध सुविधाओं के स्तर में लाने हेतु एक योजना बनाई गई है। इस नीति के अंतर्गत सभी को समान स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने पर बल दिया जाएगा। केंद्र सरकार के योगदान द्वारा कुल सार्वजनिक स्वास्थ्य निवेश में वृद्धि पर विशेष जोर दिया जाएगा। इस कदम से सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रशासन को राज्य स्तर पर प्रभावी सेवाएं प्रदान करने की क्षमता में दृढ़ता आयेगी। स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए निजी क्षेत्र से और अधिक सहयोग लिया जाएगा, विशेषकर उस आय वर्ग के लिए जो इन सेवाओं के लिए धन व्यय कर सकते हैं।
सार्वजनिक स्वास्थ्य निवेश की अभिवृद्धि में केंद्र सरकार की मुख्य भूमिका रहेगी। स्वास्थ्य क्षेत्र व्यय में सकलघरेलू उत्पाद का 5.2 प्रतिशत से बढ़ाकर 6 प्रतिशत करने की योजना बनाई गई है, जिसमें वर्ष 2010 तक सार्वजनिक स्वास्थ्य निवेश द्वारा सकल घरेलू उत्पाद का 2 प्रतिशत (मौजूदा 0.9 प्रतिशत) योगदान रहेगा। केंद्र व राज्य सरकार का योगदान वर्ष 2010 तक कुल बजट का मौजूदा 15 प्रतिशत और 5.5 प्रतिशत से बढ़कर क्रमशः 25 प्रतिशत और 8 प्रतिशत होने की आशा व्यक्त की गई है।
राष्ट्रीय नीति में मौजूदा प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाओं को बढ़ाने और मजबूत करने के लिए एकरूप,न्याय संगत प्राथमिकता देने पर विशेष बल दिया गया है। इसका प्रस्ताव प्राथमिक स्वास्थ्य क्षेत्र में कुल सार्वजनिक स्वास्थ्य निवेश का 55 प्रतिशत बजट में वृद्धि के माध्यम से किया गया केंद्र द्वारा वित्तीय योगदान के माध्यम से आवश्यक दवाओं के व्यवस्थापन की नई अवधारणा भी शामिल की गई है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों को राज्य स्तर से विकेंद्रीकृत सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र और राज्य व जिला स्तरके स्वायत निकायों द्वारा क्रियान्वयन पर बल दिया गया है। इस संबंध मेंराष्ट्रीय नीति में देश के सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र में केंद्र व राज्य सरकार की भूमिका को परिभाषित किया गया है। नीति में सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचे और प्राथमिक स् निर्दिष्ट सभी स्वास्थ्य कार्यक्रमों के अधिक-से-अधिक उपयोग और धीरे-धीरे उन्हें एकल कार्यक्षेत्र प्रशासन में एकाकार करने पर बल दिया गया है।
इसके साथ ही नीति में विशेष आवश्यकता वाले क्षेत्रों और अनेक मुद्दों को जोड़ा गया है। इसमें स्वास्थ्य क्षेत्र में भागीदार तमाम समूहों की अपेक्षित भूमिका भी शामिल है जिसमें-सरकार (केंद्र व राज्य दोनों), निजी क्षेत्र, स्वैचि संगठन और अन्य नागरिक सोसायटी के सदस्य, बीमारी की देख-रेख, स्वास्थ्य अधिकारी, उनके सिद्धांत और शिक्षा, नसिंग स्वास्थ्य, राष्ट्रीय स्वास्थ्य लेखा की आवश्यकता, सूचना, शिक्षा और संचार की भूमिका महिला स्वास्थ्य, स्वास्थ्य क्षेत्र पर वैश्वीकरण का प्रभाव, आदि सम्मिलित हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति के अंतर्गत कुछ लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए समयसीमा निर्धारित कर दी गई। इनमें कुछ हैं -
• 2003 चिकित्सा संस्थानों और चिकित्सालयों की स्थापना के लिए मानदंडों का निर्धारण और उसके नियमन के लिए विधेयक लाना।
• 2005 पोलियो उन्मूलन / कुष्ठ रोग उन्मूलन स्वास्थ्य के लिए बजट में 5.5 प्रतिशत से 7 प्रतिशत की वृद्धि।
• स्वास्थ्य के क्षेत्र में संपूर्ण बजट का एक प्रतिशत शोध कार्य के लिए खर्च करना जन स्वास्थ्य कार्यक्रमों का विकेंद्रीकरण करना।
• 2007 एच.आई.वी./ एड्स की वृद्धि को शून्य स्तर पर ला
• 2010 कालाजार रोग का उन्मूलन
• टी.बी., मलेरिया जैसे संक्रामक रोगों से होने वाली मृत्यु की दर में50 प्रतिशत की कमी लाना।
• अंधापन की वर्तमान स्थिति में 0.5 प्रतिशत की कमी लाना।
• जन-स्वास्थ्य सुविधाओं के उपयोग में 75 प्रतिशत तक की वृद्धि करना। अभी यह 20 प्रतिशत से भी कम है।
• बजट में स्वास्थ्य पर जी.डी.पी. का कुल दो प्रतिशत खर्च।
• 2015 लिम्फैटिक फाइलेरिया का उन्मूलन।
वार्तालाप में शामिल हों