राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2015 - National Health Policy 2015

राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2015 (मसौदा) - National Health Policy 2015 (Draft)

राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2015 - National Health Policy 2015


स्वास्थ्य संबंधी विभिन्नविमर्शी, परिवेश बदलाव और आर्थिक पर्यावरण में हुए बदलावों के मद्देनजर वर्तमान सरकार ने एक नयी राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2015 का मसौदा तैयार किया। इस मसौदे की मुख्य बातें निम्नलिखित हैं -


लक्ष्य 

समग्र विकासात्मक नीतियों में एक निवारक और स्वास्थ्यवर्धक सुविधा के व्यवस्थापनद्वारा जनता के अच्छे स्वास्थ्य और कल्याण के सर्वोत्तम संभव स्तर को प्राप्त करना और अच्छी गुणवत्ता की स्वास्थ्य सुविधा सेवाओं को सर्व सुलभ बनाना जिसका प्रयोग में लाने के कारण किसी को भी वित्तीय समस्या का सामना न करना पड़े।





प्रमुख नीतिगत सिद्धांत


साम्यः 

स्वास्थ्य सुविधा सेवा हेतु सार्वजनिक व्यय काउद्देश्य सर्वाधिक असक्षम लोग,जो रोगग्रस्तता का सबसे अधिक शिकार होते हैं, को प्राथमिकता प्रदान करते हुए निर्धन व्यक्तियों की इन सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित करने और उन्हें वित्तीय संरक्षण प्रदान करने के लिए बृहत्तर निवेश करना है। असाम्य या असमानता कम करने का अर्थ सबसे अधिक निधर्न तबकों तक पहुँच स्थापित करने तथा लिंग, निर्धनता, जाति, अक्षमता, सामाजिक बहिष्करण के अन्य रूपों और भौगोलिक बाधाओं के आधार परभेदभाव को न्यूनतम करने के लिए सकारात्मक कार्यवाही करना भी है। 


सर्वसुलभता: 


स्वास्थ्य प्रणालियों और सेवाओं को इस प्रकार निर्धारित किया जाए कि उनसे संपूर्ण आबादी की आवश्यकताओं की पूर्ति हो सके न कि केवल किसी एक्लक्षित उप-समूह की पर्याप्त सावधानी बरतनी होगी ताकि सामाजिक या आर्थिक आधार पर किसी भी व्यक्ति या समूह को इन प्रणालियों और सेवाओं की परिधि से बाहर न किया जाए।





रोगी केंद्रित और सुविधा की गुणवत्ता:


स्वास्थ्य सुविधा सेवाएं प्रभावी सुरक्षित और सुविधाजनक होंगी तथा लोगों को गोपनीयता एवं प्रतिष्ठा के साथ उपलब्ध होगी। विभिन्न क्षेत्रों में दी जा रही स्वास्थ्य सुविधाओं की गुणवत्ता प्रमाणित करने के लिए मूल्यांकन होगा तथागुणवत्ता को बनाए रखने के लिए उन्हें प्रोत्साहन दिया जाएगा। 


समावेशी प्रतिभागिता: 


सभी को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने का कार्य अकेले सरकार द्वारा पूरा नहीं किया जा सकता है। इसके लिए उन सभी समुदायों की भागीदारी आवश्यक है जो इस भागीदारी को एक साधन और लक्ष्य के रूप में, एक अधिकार और एक कर्तव्य के रूप में समझें। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए शैक्षणिक संस्थाओं लाभ के लिए काम न करने वाली एजेंसियों के साथ और निजी क्षेत्र के व्यापारिक व स्वास्थ्य सुविधा उद्योग के साथ भी व्यापक प्रतिभागिता की आवश्यकता होगी।


चिकित्सा पद्धति के विकल्पों की सुविधा:


जो रोगी आयुष सुविधा का चुनाव करते हैं उन्हें समुचित आयुष सेवा प्रदान करने वाले चिकित्सक तक पहुंचाया जाए जो कि प्रमाणित स्थानीय स्वास्थ्य परम्पराओं के अनुसार इस पद्धति का प्रयोग करते हैं। आयुष व अन्य स्वास्थ्य व चिकित्सा प्रणालियों को सरकार का सहयोग और देखरेख की सुविधा प्राप्त होगी ताकि राष्ट्रीय स्वास्थ्य लक्ष्यों और उद्देश्यों को प्राप्त करने में उनका योगदान सुनिश्चित किया जा सके। साथ ही साथ इन चिकित्सा व स्वास्थ्य पद्धतियों का मूल्यांकन अनुसंधान प्रकाशन तथा इन सेवाओं कप्रदान करने व चिकित्सा व स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के साथ निरंतर चर्चा और सहयोग बनाए रखना होगा।


निर्णय लेने की क्षमता का विकेंद्रीकरण (आनुषंगिकता):


अनुक्रियाशीलता और बृहत्तर भागीदारी को सुनिश्चित करने के लिए व्यावहारिक संदर्भों और संस्थागत क्षमताके आधार पर उपयुक्त समझे जाने वाले अधिकाधिक विकेंद्रित स्तरों पर निर्णयन अधिकारों के अंतरण को प्रोत्साहन प्रदान किया जाएगा। किसी बृहत्त और अधिक जटिल संगठन द्वारा ऐसा कुछ भी नहीं किया जाएगा जो एक छोटे और सरल संगठन द्वारा भी किया जा सकता है)।


उत्तरदेयता:


सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली और निजी स्वास्थ्य सुविधा उद्योग दोनों की स्वास्थ्य सुविधा प्रणाली में वित्तीय और कार्यनिष्पादन की उत्तरदेयता, निर्णयन में पारदर्शिता और भ्रष्टाचार का निराकरण आवश्यक होगा। 





व्यावसायिकता, न्याय निष्ठा और उचित अनुचित का विचार: 


स्वास्थ्य कर्मी और प्रबंधक सर्वोच्च स्तर की व्यावसायिकता, न्याय निष्ठा और विश्वास के साथ अपने कार्य का निर्वहन करेंगे तथा उन्हें इसमें सक्षम बनाने के लिए प्रणाली और नियामक परिवेश द्वारा सहायता प्रदान की जाएगी। 


अधिगम और अनुकूली प्रणाली: 


स्वास्थ्य सुविधा के सक्रिय संगठन में निरंतर सुधारलाना जो ज्ञान और साक्ष्य आधारित हो, सेवित समुदायों को प्रतिबिंबित करता हो और उनसे प्राप्त ज्ञान तथा प्रयोग में लाए जाने पर स्वयं से और राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय ज्ञान भागीदारों से प्राप्त अनुभव पर आधारित हो। 







सुविधा व्यय वहन करने की क्षमता: 


स्वास्थ्य सुविधा की लागत में वृद्धि होने समाज के कुछ लोग ज्यादा प्रभावित होते हैं तथा उनकी वित्तीय सुरक्षा पर ध्यान देने की आवश्यकता उत्पन्न होती है। जब किसी परिवार द्वारा स्वास्थ्य सुविधा पर किया जाने वाला व्यय उसकी कुल मासिक खपत पर व्यय के 10 प्रतिशत या उसके गैर-खाद्य वस्तुओं की खपत पर व्यय के 40 प्रतिशत से अधिक हो जाए तो उसे स्वास्थ्य पर आपाती व्यय कहा जाता है और इसे स्वास्थ्य सुविधा पर अस्वीकार्य लागत माना जाता है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि स्वास्थ्य की देखभाल पर लागत के कारण निर्धनता का शिकार होना, कहीं अधिक अस्वीकार्य स्थिति है।