अभिवृत्ति - परिभाषा, निर्माण, विशेषताएँ, तत्व - Attitude - Definition, Construction, Characteristics, Elements

अभिवृत्ति - परिभाषा, निर्माण, विशेषताएँ, तत्व - Attitude - Definition, Construction, Characteristics, Elements

अभिवृत्ति

अभिवृत्ति सामाजिक मनोविज्ञान का एक केन्द्रीय विषय है। सामाजिक मनोवैज्ञानिकों की रूचि विगत कई दशकों से अभिवृत्ति में रही है, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि मनुष्य के व्यवहार को अभिवृत्ति बहुत प्रभावित करती है। अभिवृत्ति का अभिप्राय सामाजिक विश्व के किसी पक्ष के हमारे मूल्याँकन से है | सामाजिक विश्व के कोई और हर तत्व मद्दे, विचार, व्यक्ति, सामाजिक समूह, वस्तु के प्रति हम जिस हद तक सकारात्मक या नकारात्मक प्रतिक्रियाएँ रखते हैं।


आलपोर्ट (1935) ने अभिवृत्ति को परिभाषित करते हुए लिखा है कि, "अभिवृत्ति मानसिक तथा स्नायविक तत्परता की एक स्थिति है, जो अनुभव द्वारा निर्धारित होती है और जो उन समस्त वस्तुओं तथा परिस्थितियों के प्रति हमारी प्रतिक्रियाओं को प्रेरित व निर्देशित करती है, जिनसे कि वह अभि


आलपोर्ट की उपरोक्त परिभाषा को विश्लेषित किया जाये तो स्पष्ट होता है कि यह मानसिक एवं स्नायुविक तत्परता की एक स्थिति है तथा किसी वस्तुओं या परिस्थितियों के सन्दर्भ में व्यक्ति के मन के भाव पक्ष या मूल्यांकन पक्ष को अभिव्यक्त करती है। चूँकि यह अनुभवों द्वारा निर्धारित होती है अतः जन्मजात नहीं होती अपितु मनुष्य के अनुभवों द्वारा निर्धारित या प्राप्त की जाती है। आलेपोर्ट ने मूल रूप से अभिवृत्ति को विशिष्ट प्रकार से अनुक्रिया करने के एक समुच्चय (सेट) के रूप में माना है। वृत्ति सम्बन्धित है। "


अभिवृत्ति की विशेषताएँ


* आलपोर्ट (1935), बी. कुप्पस्वामी (1975) कूच एवं क्रूचफील्ड तथा अन्य (1962) इत्यादि की परिभाषाओं एवं व्याख्याओं अभिवृत्ति की निम्नांकित विशेषताएँ स्पष्ट होती हैं।


• यह एक मानसिक एवं स्नायविक अवस्था है।


• यह प्रतिक्रिया करने की एक तत्परता है।


• यह एक जटिल एवं हस्तक्षेपीय या मध्यस्थ अवधारणा है। जटिल और संगठित इसलिए है कि. इसमें जो सूघटकू हैं भावनात्मक संज्ञानात्मक और व्यवहारात्मक, ये तीनों अत्यन्त जटिल होते हैं। इसलिए अभिवृत्ति भी जटिल होती है। कई संघटकों के कारण यह संगठित होती है। जहाँ तक मध्यस्थ या हस्तक्षेपीय अवधारणा की बात है अभिवृत्ति स्वतंत्र चर का न केवल परिणाम होती है। अपितु स्वयं में भी स्वतंत्र चर (किसी व्यवहार या प्रतिक्रिया का निर्धारक होने के कारण) होती है।


• यह अर्जित की जाती है। व्यक्ति अपने जीवन काल में विविध कारकों के सहयोग से अभिवृत्तियों को अर्जित करता या सीखता है।


● अभिवृत्ति बहुधा स्थायी होती है। विशेष परिस्थितियों में इसमें परिवर्तन भी पाया जाता है।


• इसमें एक दिशा और तीव्रता होती है। दिशा या तो सकारात्मक होती या नकारात्मक सकारात्मक या नकारात्मक अभिवृत्ति में तीव्रता के आधार पर अन्तर होता है। जैसे किन्हीं दो व्यक्तियों में किसी के प्रति घृणा या पसन्दगी की मात्रा कम या ज्यादा हो सकती है। सकारात्मक या नकारात्मक अभिवृत्ति में अनुकूल या प्रतिकूल व्यवहार या प्रतिक्रिया के प्रेरक गुण होते हैं।"



अभिवृत्ति निर्माण


सामाजिक अधिगम मनोवृत्ति का एक महत्त्वपूर्ण स्रोत है, लेकिन सप्रमाण यह ज्ञात हुआ है कि मनोवृत्तियों पर अनुवांशिक कारकों को भी प्रभाव पड़ता है। रॉबर्ट ए. बैरन एवं डौन बायर्न (2004) ने इस सन्दर्भ में व्यापक विश्लेषण किया है।


अभिवृत्तियों के निर्माण का सबसे महत्वपूर्ण स्रोत सामाजिक सीख है। सामाजिक सीख वह प्रक्रिया है, जिसके द्वारा हम अन्य लोगों से नई जानकारी, व्यवहार के तरीके या मनोवृत्तियाँ ग्रहण करते हैं। रॉबर्ट ए. बैरन तथा बायर्न (2004: 108) ने इसे और भी स्पष्ट करते हुए लिखा है कि, "हमारे अनेक मत उन परिस्थितियों में ग्रहण किये जाते हैं जहाँ हम दूसरों के साथ परस्पर क्रिया करते हैं, या सिर्फ उनके व्यवहार का निरीक्षण करते


हमारी अधिकांश अभिवृत्तियाँ उस समूह से विकसित होती है, जिससे हम सम्बद्ध होते हैं। बाल्यावस्था से ही बच्ची परिवार में सामाजीकरण की प्रक्रिया के दौरान विविध वस्तुओं, व्यक्तियों इत्यादि के प्रति सकारात्मक एवं नकारात्मक अभिवृत्ति को निर्मित करता है। परिवार के साथ-साथ व्यक्ति अपने संगी-साथियों और समूह के अन्य सदस्यों से भी सामाजिक सीख के द्वारा अभिवृत्तियों को निर्मित करता चलता है। उदाहरण के लिए बच्चे कुछ खाद्य पदार्थी, खिलौनों, वस्तुओं के प्रति सकारात्मक अभिवृत्ति विकसित करते हैं और कुछ के प्रति नकारात्मक अभिवृत्ति विकसित करते हैं। हमारी अभिवृत्तियाँ बड़े होने पर भी निर्मित होती रहती हैं।


अभिवृत्ति के संघटक तत्व


• अभिवृत्ति जिन तत्वों से सुरचित होती है, उन्हें ही अभिवृत्ति के संघटक तत्व कहा जाता है। अभिवृत्ति उन तीन संघटकों का स्थायी तंत्र हैं, जिन्हें संज्ञानात्मक भावात्मक तथा क्रियात्मक संघटर्क के रूप में जाना जाता है। अभिवृत्ति के तीनों संघटकों का संक्षिप्त विवरण निम्नवत् है।


• संज्ञानात्मक संघटक मनुष्य प्रत्येक वस्तु, व्यक्ति या अन्यों के प्रति प्रत्यक्षीकरण जिस किसी भी रूप में करते हैं, वह संज्ञानात्मक संघटक को इंगित करता है। अभिवृत्ति-वस्तु (जो उपरोक्त उदाहरण में दलित है) के प्रति सकारात्मक या नकारात्मक विश्वास अभिवृत्ति का संज्ञानात्मक या प्रत्यक्षात्मक संघटक है। अभिवत्ति प्रतिक्रिया करने की तत्परता की मानसिक एवं स्नाविक स्थिति है, यह अभिवृत्ति वस्तु के प्रति विश्वास को अभिव्यक्त करती है।


● भावात्मक संघटुक भावनाएँ एवं संवेग इसके अन्तर्गत आती हैं, जो अभिवृत्ति-वस्तु के प्रति व्यक्ति के भाव (पसन्दगी अथवा नापसन्दगी) को अभिव्यक्त करती है। भावात्मक संघटक किसी भी अभिवृत्ति का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। किसी अभिवृत्ति-वस्तु को अत्यधिक पसन्द करना, कम पसन्द करना या किसी अभिवृत्ति वस्तु को अत्यधिक नापसन्द करना, थोड़ा नापसन्द करने का भाव यह स्पष्ट करता है कि इसकी तीव्रता में व्यक्ति व्यक्ति में अन्तर हो सकता है।


● क्रियात्मक संघटक : अभिवृत्ति वस्तु के प्रति व्यक्ति की क्रिया को अभिव्यक्त करता है, अतः इसे व्यवहार संघटूक भी कहा जाता है। अभिवृत्ति-वस्तु के प्रति व्यक्ति कैसा व्यवहार करता है? क्या वह उससे दूरी बना लेता है या आक्रामक व्यवहार करता है या उससे घनिष्ठता बढ़ा लेता है? यह सब अभिवृत्ति वस्तु के प्रति व्यक्ति की सकारात्मक अथवा नकारात्मक धारणा पर निर्भर करतो है। अभिवृत्ति वस्तुं के प्रति पसन्दगी या ना पसन्दगी व्यवहार के एक विशेष रूप को प्रदर्शित करती है। क्रियात्मक संघटक के अन्तर्गत अभिवृत्ति वस्तु से दूरी बना लेना, निकटता स्थापित करना, प्रेम करना, आक्रामक व्यवहार करना शक्ति का प्रयोग करना इत्यादि सम्मिलित होता है।



पूर्वाग्रह और अभिवृत्ति परिवर्तन


अभिवृत्तियों में स्थायित्त्व होता है। यद्यपि इनमें परिवर्तन भी देखा जा सकता है। परिवर्तन के विविध कारक होते हैं। अभिवृत्ति के संज्ञानात्मक संघटुक में परिवर्तन भावनात्मक संघटक और क्रियात्मक संर्घटक में भी परिवर्तन लाता है।


अभिवृत्ति-वस्तु के प्रति पूर्वाग्रह सकारात्मक या नकारात्मक विश्वास को बल देता है। सामान्यतः पूर्वाग्रह नकारात्मक अभिवृत्ति को इंगित करता है, परिणामस्वरूप क्रिया भी नकारात्मक ही होती है।


• पूर्वाग्रह और अभिवृत्ति परिवर्तन की चर्चा के पूर्व पूर्वाग्रह के अर्थ को जानना जरूरी है। पूर्वाग्रह किसी व्यक्ति या सामाजिक समूह के सदस्यों के प्रति नकारात्मक मनोवृत्ति का दयोतक है। सामाजिक मनोवैज्ञानिकों ने पूर्वाग्रह और विभेदीकरण में अन्तर किया है। विभेदीकरण पूर्वाग्रह का क्रियात्मक पक्ष है। इसे क्रियात्मक पूर्वाग्रह भी कह सकते हैं। नकारात्मक मनोवृत्ति से नकारात्मक व्यवहार (विभेदीकरण) होता है।


. अभिवृत्तियाँ सीधे अनुभव के माध्यम से बदल जाती हैं। इसलिए कभी-कभी जब हम किसी के प्रति पूर्वाग्रही होते हैं और वो हमारे पूर्वाग्रह के आधारों को अपनी योग्यता कुशलता या अन्य आधारों पर तोड़ देता है तो हमारी पूर्वाग्रही अभिवृत्ति भी परिवर्तित हो जाती है। पूर्वाग्रह और नया अनुभव मनुष्य के संज्ञान के मध्य प्रत्याशा और अनुभव या वास्तविकता के मध्य असंगति उत्पन्न कर देता है। इस असंगति को सामान्यतः मनुष्य पनव्यवस्थित करते हुए अपनी अभिवृत्ति में परिवर्तन करता है। यह परिवर्तन आंशिक भी हो सकता है, पूर्ण भी हो सकता है। और एक बार में ही हो सकता है, या कई बार के बाद हो सकती है।


निष्कर्ष


अभिवृत्ति से सम्बन्धित उपरोक्त समस्त विवरण से अभिवृत्ति की न केवल अवधारणा स्पष्ट होती है अपित हम विविध विद्वानों की पूरिभाषाओं से भी परिचित होते हैं। इसके साथ ही साथ हम अभिवृत्ति निर्माण के विविध पक्षों को समझते हैं तथा पूर्वाग्रह और अभिवृत्ति परिवर्तन के स्वरूप को विश्लेषित करते हैं।


18 अभिवृत्ति एक मानसिक एवं स्नायविक अवस्था के साथ प्रतिक्रिया करने की एक तत्परता भी है। इसमें स्थायित्व होता है साथ ही विशेष कारको के प्रभाव से परिवर्तन भी आता है। इसकी तीव्रता अलग-अलग लोगों में अलग-अलग प्रकार की होती है। अभिवृत्ति जन्मजात नही होती, यह अर्जित की जाती है। दिशा, तीव्रता, केन्द्रीयता, प्रमुखता तथा संगति के पाँच पहलू अभिवृत्ति के हैं।


अभिवृत्ति के निर्माण का प्रमुख स्रोत सामाजिक सीख है। परिवार, समूह, विदर्यालय, कार्य स्थल तथा व्यक्तिगत अनुभव से अभिवृत्तियाँ विकसित होती है। सामाजिक सीख की तीन प्रक्रियाएँ होती हैं- साहचर्य आधारित, सही मत धारणा करने सम्बन्धी और उदाहरण द्वारा अभिवृत्ति और व्यवहार में अन्तर होता है। अभिवृत्तियाँ परिवर्तनशील भी होती हैं। हमारी पूर्वाग्रही अभिवृत्तियाँ तब परिवर्तित हो जाती हैं जब सोच और अनुभव में असंगति उत्पन्न हो जाती है।