प्राधिकार, शक्ति और स्थिति - authority, power and position

प्राधिकार, शक्ति और स्थिति - authority, power and position

प्राधिकार, शक्ति और स्थिति - authority, power and position


संगठन को अंतसम्बन्धों का जाल माना जाता है जो प्राधिकार, शक्ति और संप्रेषण के औपचारिक और अनौपचारिक विन्यासों से अत्याधिक पूर्ण होता है। सामान्य बोलचाल में प्राधिकार और शक्ति को पर्याय समझा जाता है। जब किसी मसले के सम्बन्ध में निर्णय लेने का अधिकार किसी पद में निहित होता है तो तब उस पद के बारे में कहा जा सकता है कि प्राधिकार उपलब्ध है, जबकि शक्ति दूसरे के व्यवहार पर प्रभाव डालने की व्यक्ति की योग्यता है। ऐसा तब होता जब किसी व्यक्ति द्वारा अन्य को प्रभावित करने वाला व्यवहार, संगठनात्मक पदानुक्रम में बहुत कम स्तर पर होता है। इस प्रकार प्राधिकार कानूनी अथवा वैध होता है जबकि शक्ति का अस्तित्व, गैर-संस्थागत होता है। चूंकि संगठनात्मक संरचना में प्रत्येक पद को कुछ ज़िम्मेदारी सौंपी जाती हैं तथा इन जिम्मेदारियों को संभालने के लिए पर्याप्तप्राधिकार दिये जाने चाहिए।



कोई भी कर्मचारी प्रभावशाली तरीके से तब तक कार्य नहीं कर सकता जब तक उसके पास अपेक्षित प्राधिकार की कमी है। प्राधिकार परम्परागत (परम्परा अथवा मानंदडों से उत्पन्न), चमत्कारिक (वैयक्तिक चमत्कार अथवा दैवी या विशिष्ट शक्तियों से उत्पन्न), कानूनी प्राधिकार (संगठन द्वारा निर्धारित सिद्धांतों नियमों, विनियमों से उत्पन्न) से संबन्धित हो सकता है। स्थिति अथवा स्तर अन्य की तुलना में व्यक्तियों की स्थिति होती है। यह एक प्रकार की प्रतिष्ठा की श्रेणी है जो प्राधिकार के अनुसार व्यक्ति में अंतर्निहित होती है। अत: प्राधिकार, शक्ति और स्थिति, प्रशासन के महत्वपूर्ण संघटक है जो प्रेरण कार्य संतुष्टि राजनीति करना और संगठनात्मक व्यवहार के अन्य पक्षों में महत्वपूर्ण भूमिका वहाँ करते हैं।