आधारभूत सामाजिक मनोवैज्ञानिक प्रक्रियाएं - Basic Social Psychological Processes
आधारभूत सामाजिक मनोवैज्ञानिक प्रक्रियाएं - Basic Social Psychological Processes
सामाजिक मनोवैज्ञानिक प्रक्रियायों को समझने के लिए प्रारंभ में ही कुछ आधारभूत प्रक्रियायों को समझना आवश्यक है । इसके अंतर्गत प्रत्यक्षीकरण, गुणारोपण, सीखना, सामाजीकरण, अभिप्रेरण, अभिवृत्ति पूर्वाग्रह रुढीयुक्तियाँ , को समझना आवश्यक है ।
सामाजिक प्रत्यक्षीकरण
सामाजिक प्रत्यक्षीकरण एक प्रक्रिया है जिसके माध्यम से हम व्यक्तियों को समझने का प्रयास करते है | यह एक संज्ञानात्मक सामाजिक मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया है | जिस प्रकार से एक छोटा बालक अपने आप पास के व्यक्तियों, वस्तुओं एवं घटनाओं को देख कर समझने का प्रयास करता है | इस प्रक्रिया में व्यक्ति वास्तु को देखना जहाँ प्रेक्षण कहलाता है वही उसको पहचानना तादात्मीकरण कहलाता हैं । यह सामाजिक व्यवहार को देखने एवं समझने में अहम् भूमिका निभाता है । इसके अंतर्गत दो प्रकार के प्रत्यक्षीकरण का अध्ययन किया जाता है जिसमे पहला व्यक्ति प्रत्यक्षीकरण और दूसरा स्वाप्रत्यक्षीकरण कहलाता है।
व्यक्ति प्रत्यक्षीकरण
इस प्रक्रिया के अंतर्गत व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति की विशेषताएं जैसे शीलगुण, प्रेरणा, अभिवृत्ति जैसी अमूर्त विशेषताओं का आंकलन करता है। और इसके आधार पर ही वह उस व्यक्ति की छाप या उसके विषय में निर्णय लेता है की व्यक्ति कौन है और कैसा है। क्योंकि प्रत्यक्षीकरण एक अमूर्त विशेषता है अतः इसका आंकलन व्यक्ति के व्यवहार से किया जाता है | अतः यह सामाजिक समझ विकसित करने एवं व्यक्ति की विशेषता । के आधार पर उसका आंकलन करने में सहायता प्रदान करती है । जिसमें व्यक्ति के शीलगुण एवं बुद्धि इत्यादि का आकलन किया जाता है।
स्वप्रत्यक्षीकरण
स्वप्रत्यक्षीकरण से तात्पर्य व्यक्ति के अपने प्रत्यक्षीकरण से है | वह अपने बारे में धारणाएं बनाता है एवं उनका स्वयं मूल्यांकन करता है | इसमें सकारात्मक मूल्यांकन जहाँ समायोजन को आसान बनती है वहीं विपरीत स्थिति कठिनाई पैदा करती है स्वा का मूल्याकन वह दूसरों से डुलना आधार पर करता है । वहीं स्वा मूल्यांकन में परोपकारी, कठोर, उदार क्रोधी इत्यादि विशेषताओं का अध्ययन करता है।
गुणारोपण
सीखना
सीखने की प्रक्रिया जन्म से ही शुरू हो जाती है। जैसे ही नवजात शिशु जन्म लेता है वह अपनी सहज प्रेरणा के आधार पर व्यवहार किया जाता है। । सामाजिक व्यवहार के गुण सीखने की प्रक्रिया का ही भाग है । सामाजिक सीखना कुशलताओं तथ्यों एवं मूल्यों को अर्जित करने की ओर संकेत करता है। सीखने की प्रक्रिया नित-नयी क्रियाओं को जन्म देती है और उन्हें पुनः बल प्रदान करती है। इसी प्रक्रिया के अंतर्गत जैविकीय शिशु सामाजिक प्राणी के रूप में विकसित होता है
सामाजीकरण
सामाजीकरण की प्रक्रिया जन्म से ही शुरू हो जाती है । यह जैविक प्राणी को सामाजिक प्राणी के रूप में विकसित करने में सहायता प्रदान करती है। | सामाजीकरण की प्रक्रिया व्यक्ति के जन्म से प्रारंभ होकर उसकी मृत्यु तक चलती रहती है। सामाजीकरण की प्रक्रिया में बालक पहले प्राथमिक समूह का सदस्य होकर द्वितीयक समूह का सदस्य बनता है | चार्ल्स कु का आत्मदर्शन का सिद्धांत इसी प्रक्रिया की व्याख्या करता है |
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