केस अध्ययन विधि - Case Study Method

केस अध्ययन विधि - Case Study Method

 केस अध्ययन विधि - Case Study Method


सामाजिक संस्थानों के केस अध्ययन में अनेक वैयक्तिक इकाईयों यथा-परिवार, सामाजिक संगठन, सांस्कृतिक संगठन, वर्ग अथवा विकासात्मक कार्यक्रम का अध्ययन शामिल हो सकता है। समुदायों के केस अध्ययनों में किसी जनजाति, गाँव, झुग्गी-झोपड़ी के क्षेत्र अथवा संस्कृति को शोध की इकाई माना जा सकता है।

एक पूर्ण केस अध्ययन के प्रक्रियात्मक पहलू कुछ विशिष्ट विशेषताओं को प्रदर्शित करते हैं -


1) पूर्णता- 


एक अच्छे केस अध्ययन के लिए इकाई के आंतरिक और बाह्य परिवेश से सम्बन्धित विस्तृत आँकड़े संकलित करना शामिल है। आँकड़े संकलित करना, तब तक जारी रहता है जब तक आँकड़ों की पूर्णता सुनिश्चित नहीं हो जाती है और इकाई की पूरी जानकारी नहीं मिल जाती है। 


2) अन्वेषण में निरंतरता- 


स्थितियों के बारे में सतत और लंबी जांच जरूरी है जब तक निहित कारकों का पता नहीं चल जाता है और उनकी परस्पर क्रिया/सम्बन्ध के संभावित पैटर्न की पहचान नहीं की जाती है।


3) आँकड़ों की विश्वसनीयता- 


केस अध्ययन की रिपोर्ट का आधार केस/ मामले के संदर्भ में विश्वसनीय, अर्थपूर्ण और वैध जानकारी होनी चाहिए। विभिन्न गुणात्मक और मात्रात्मक तकनीकें जैसे अवलोकन, साक्षात्कार, परीक्षण प्रश्नावलियों, रिकॉर्ड सर्वेक्षण आदि का इस्तेमाल केस अध्ययनों में उपयुक्त रहता है। आँकड़े संकलित करने और आँकड़ों को परस्पर जाँच के लिए विभिन्न तकनीकों द्वारा बहुतकनीक अभिगम का इस्तेमाल करने में आँकड़ों की विश्वसनीयता बनी रह सकती है। 








4) गुप्त/गोपनीय रिकॉर्डिंग -


व्यक्तिगत और नैतिक मुद्दे वाले जरूरी आँकड़े, यथा शिक्षकों और विद्यार्थियों का प्रबंधन से सम्बन्ध, अनुशासन, गोपनीय रिकॉर्ड संस्थान के दस्तावेज आदि का हस्तांतरण कौशल के साथ करना चाहिए और उनकी गोपनीयता को बनाए रखने के लिए मुमकिन सावधानी रखनी चाहिए।


5) बौद्धिक संश्लेषण-


चूँकि केस अध्ययन में बहुविधि जांच शामिल होती है और यह इकाई से सम्बन्धित सभी महत्वपूर्ण स्थितियों के बारे में होती है इसलिए इकाई की विशिष्टता को प्रदर्शित करने और महत्वपूर्ण सम्बन्धों का पता लगाने के लिए आँकड़ों का उपयुक्त संश्लेषण जरूरी है। एक कुशल शोधकर्ता सैद्धान्तिक सौम्यता, अंतर्दृष्टि और लेखन कौशल से न्याय करते हुए अच्छा केस अध्ययन कर सकता है।