केंद्रीय समाज कल्याण बोर्ड - Central Social Welfare Board
केंद्रीय समाज कल्याण बोर्ड - Central Social Welfare Board
स्वैच्छिक समाज कल्याण के इतिहास में महत्वपूर्ण कदम प्रथम पंचवर्षीय योजना में समाज कल्याण क्षेत्र के लिए 4 करोड़ रूपये की व्यवस्था के साथ 1953 के रूप में था। देश के योजनाकारों के सामने यह दुविधा थी कि क्या इस राशि को सरकारी तंत्रकर्ता माध्यम से उचित इस्तेमाल किया जाना चाहिए या स्वैच्छिक एजेंसियों के माध्यम से इस्तेमाल किया जाना चाहिए क्योंकि उस समय न तो केन्द्र में और न ही राज्य स्तरों पर कोई मुक्त समाज कल्याण विभाग था। तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के आदेशानुसार एक उत्कृष्ट समाज कार्यकर्ता डॉ. (श्रीमती) दुर्गाबाई देशमुख को केन्द्री समाज कल्याण बोर्ड का प्रथम अध्यक्ष बनाया गया। बोर्ड का मुख्य कार्य समाज कल्याण कार्यकलापों में लगे स्वैच्छिक संगठनों को सहायता अनुदान और तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान करना था। बोर्ड का एक कार्य उन क्षेत्रों में संगठन का सृजन करना भी था जहाँ ये उपलब्ध नहीं थे। तदनुसार बोर्ड ने परिवार और बाल कल्याण योजनाओं नाम से एक योजना शुरू की। वर्तमान समन्वित बाल विकास सेवा कार्यक्रम प्रयत्नों का परिणाम था।
केन्द्रीय समाज कल्याण बोर्ड एक अर्द्ध-स्वायत्त निकाय के रूप में योजना आयोग के सुझावों पर स्थापित किया गया, परन्तु प्रशासनीय शक्ति, शिक्षा मंत्रालय के पास थी। इसे भारतीय कम्पनी अधिनियम, 1956 की धारा-25 के अन्तर्गत 1 अप्रैल 1969 से एक कम्पनी के रूप में पंजीकृत किया गया जिससे कि इसे अधिक स्वायत्ता और लचीलापन प्राप्त हो सके।
बोर्ड के निम्न उद्देश्य हैं
1. स्वैच्छिक समाज सेवा एजेन्सियों के विकास का संवर्द्धन करना।
2. व्यक्तियों के उन विशिष्ट समूहों के लिए स्वैच्छिक कल्याण कार्यक्रमों की मदद करना जिन्हें विशेष सहायता की जरूरत है जैसे महिलाएं, बालक और विकलांग।
3. विभिन्न केन्द्रीय और राज्य सरकारों की कल्याण योजनाओं का समन्वय करना।
4. कल्याण के नए कार्यक्रमों को विकसित करना और अग्रणी एवं नवीन प्रयोजनाओं को आयोजित करना जो आम आदमी की मौलिक सुविधाओं के सन्निकट है।
मंत्रालय की मदद, इसके कार्यों में विभिन्न अधीनस्थ संगठन, राष्ट्रीय आयोग और राष्ट्रीय संस्थान करते हैं जिन पर मंत्रालय अपने प्रशासनिक नियन्त्रण का इस्तेमाल करता हैं।
नीचे कुछ निकायों के नाम दिए गए हैं -
1. केन्द्रीय समाज कल्याण बोर्ड
2. राष्ट्रीय अनुसूचित जाति
3. अल्पसंख्यक आयोग
एवं अनुसूचित जनजाति आयोग
4. राष्ट्रीय सामाजिक रक्षा संस्थान
5. राष्ट्रीय दृष्टि विकलांग संस्थान
6. राष्ट्रीय अस्थि विकलांग संस्थान
7. राष्ट्रीय पुनर्वास संस्थान
मंत्रालय के कार्यकलाप
बहुत सारे विषय मंत्रालय के बढ़ते जा रहे है और तदनुसार मंत्रालय समाज में विभिन्न वर्गों के कल्याण से संबन्धित बह-आयामी कार्य करता है, यथा
1. कार्यक्रमों की नीति, नियोजन और समन्वय
2. केन्द्रीय और केन्द्र द्वारा प्रायोजित योजनाओं के संचालन
3. राज्य को दिया जाने वाला मार्गदर्शन और निदेश
4. योजना आयोग के साथ सम्बन्ध
5. समाज कल्याण राज्य मंत्री सचिवों का सम्मेलन बुलाना
6. आयोग, समितियों/अध्ययन दलों का गठन
7. स्वैच्छिक संगठनों का सहायता
8. अनौपचारिक और जन शिक्षा कार्यकलाप
9. प्रकासन
10. अनुसंधान शिक्षा और प्रलेखन
11. अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलनों, संगोष्ठियों और कार्यशालाओं में भाग लेना
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