समाज कार्य ​शोध रिपोर्ट की विशेषताएँ - Characterstics of Social Work Research

समाज कार्य ​शोध रिपोर्ट की विशेषताएँ - Characterstics of Social Work Research

समाज कार्य ​शोध रिपोर्ट की विशेषताएँ - Characterstics of Social Work Research

अच्छी रिपोर्ट के संबंध में विद्वानों के विचारों में मतभेद पाए जाते हैं। रिपोर्ट तैयार करना एक वैज्ञानिक कार्य होता है, इसलिए इसमें ध्यान और कुशलता की आवश्यकता होती है। एक उत्कृष्ट रिपोर्ट की प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख यहाँ किया जा रहा है  -


1. आकर्षक: 


यह एक मनोवैज्ञानिक तथ्य है कि मनुष्य आकर्षक वस्तुओं पर अधिक ध्यान देता है। इसलिए रिपोर्ट का शीर्षक पृष्ठ आकर्षक होना चाहिए। इसके अलावा इसकी अंतर्वस्तु भी आकर्षक होनी चाहिए। कंप्यूटर से प्रिंट लेते समय यह ध्यान देना चाहिए कि सामाग्री पेज के बिल्कुल बीच प्रिंट हो रही है अथवा नहीं। साथ ही पूरे पेज को अच्छे तरह से नियोजित कर लेना चाहिए।


2. सरल भाषा: 


रिपोर्ट में प्रयुक्त भाषा इतनी सरल और सधी हुई होनी चाहिए कि वह हर किसी को आसानी से समझ में आ सके। कठिन और क्लिष्ट भाषा के प्रयोग से कभी - कभी लोग उबाऊ महसूस करने लगते हैं। 


3. अच्छी लेखन शैली: 


शोधकर्ता की लेखन शैली स्पष्ट, सुदृढ़ और संतुलित होनी चाहिए। उग्र और क्लिष्ट शब्दों के प्रयोग से तथ्य अपनी वास्तविकता और सत्यता को खो देते हैं। इसके अलावा ऐसा करने से तथ्य अतिशयोक्तिपूर्ण और अस्वाभाविक लगने लगते हैं।






4. वैज्ञानिक व्याख्या: 


जैसा कि पहले भी कहा जा चुका है कि रिपोर्ट लेखन का कार्य वैज्ञानिक नियमों के अनुरूप किया जाता है। अतः शोधकर्ता द्वारा लिखे गए तथ्यों का वैज्ञानिक स्तर होना चाहिए, जिससे पाठक को ये तथ्य कल्पना अथवा अवास्तविक न लगे।


5. स्पष्ट, सटीक और विस्तृत विवरण: 


रिपोर्ट का लेखन कार्य इस प्रकार से प्रभावी होना चाहिए कि पाठक उसके बारे में संशय न कर सके। शोध में प्रयुक्त प्रविधियों, तकनीकों, निदर्शन तथा इनकी सहायता से अध्ययन क्षेत्र से प्राप्त तथ्यों आदि को रिपोर्ट में उचित ढंग से शामिल किया जाना चाहिए। 


6. तार्किक और क्रमवार तथ्यों का प्रस्तुतीकरण: 


पुनरावृत्ति के अलावा यह भी ध्यान रखना चाहिए कि तथ्यों का क्रम बना रहे और उन क्रमों का नियोजन तार्किक ढंग से किया जाय। 


7. पुनरावृत्ति से बचाव: 


उत्कृष्ट रिपोर्ट के लिए यह आवश्यक है कि तथ्यों की पुनरावृत्ति से बचा जाय। एक ही तथ्य का कई स्थानों पर प्रयोग करने से रिपोर्ट अपनी मौलिकता खो देती है।


8. व्यावहारिक शब्दावली का प्रयोग: 


अच्छे रिपोर्ट को तैयार करने में शोधकर्ता को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि इसमें कम से कम बोझिल शब्दों का प्रयोग किया जाय। उसे किसी तथ्य अथवा समस्या को व्यक्त करने के लिए पारिभाषिक शब्दों के स्थान पर व्यावहारिक शब्दों का प्रयोग करना चाहिए।








9. सामाग्री स्रोतों का विवरण: 


रिपोर्ट लेखन के दौरान जहां उल्लेखनीय हो वहाँ तथ्यों के स्रोतों का उल्लेख किया जाना चाहिए। इससे तथ्यों की प्रामाणिकता और विश्वसनीयता बनी रहती है।


10. विश्वसनीय तथ्यों का प्रयोग: 


रिपोर्ट में जितने अधिक विश्वसनीय तथ्यों का प्रयोग किया जाएगा रिपोर्ट उतनी ही अच्छी मानी जाएगी। इसके लिए आवश्यक है कि निष्कर्ष के साथ तथ्यों का भी प्रस्तुतीकरण किया जाए। 


11. संक्षिप्त और ज्ञानवर्धक: 


एक उत्कृष्ट रिपोर्ट संक्षिप्त, ज्ञानवर्धक और बोधगम्य होनी चाहिए। 


12. शोध की कठिनाइयों का विवरण: 


एक अच्छी रिपोर्ट की विशेषता यह भी है कि शोध के दौरान शोधकर्ता को किन-किन समस्याओं का सामना करना पड़ाए और उसके अध्ययन की सीमा क्या है? का उल्लेख किया जाय।