संघर्ष समाधान और थकान से निपटना - Conflict Resolution and Dealing with Fatigue
संघर्ष समाधान और थकान से निपटना - Conflict Resolution and Dealing with Fatigue
समाज कल्याण प्रशासक को संघर्ष निवारण को समझने की आवश्यकता है। कार्य स्थल पर विभिन्न ऐसी स्थितियाँ हो सकती हैं जिनसे सह कर्मियों के बीच तर्क और असहमतियाँ व्याप्त हो सकती हैं। इनमें कुछ संघर्ष को अपेक्षाकृत पहचानना आसान है परन्तुजरूरी नहीं है कि इसका निवारण सरल हो। यह व्यक्तियों के मध्य संघर्ष अथवा लोगों के संगठित समूहों के मध्य बहस से देखा जा सकता है। संघर्ष विभिन्न ढंगों से अभिव्यक्त हो सकता है जिसमें क्रोध में चिल्लाना, दूसरे व्यक्ति को विपरीत बातें कहना, अथवा सभी परस्पर सम्बन्धों को नाराज होकर तोड़ देना सम्मिलित हैं। संघर्ष विभागों, संस्थाओं, संगठनों, समूहों और व्यक्तियों में व्याप्त हो सकता है। प्रबंधको को रचनात्मक संघर्ष प्रेरित करने की आवश्यकता है जो नए समाधान, नई सेवाएं और सामाजिक स्थिति की नई जानकारी प्रस्तुत कर सके। विविध व्यक्तित्व, विचार, मूल्य, कार्य शैली और नियंत्रणकारी प्रतिमान से कार्यस्थल पर संघर्ष उत्पन्न होता है।
प्रशासक को आरंभिक अवस्था से ही संघर्ष को समझना चाहिए और इसका निवारण करने के लिए उपाय प्रस्तुत करने चाहिए। संघर्ष निवारण संघर्ष का अंतिम निवारण करने का परिचायक है। समाज कार्य पद्धतियों, विधियों और कौशलों का इस्तेमाल करके किसी समस्या, तर्क अथवा कठिन कार्य का निवारण करने के विभिन्न ढंग हैं। संघर्ष के कारणों का पता लगाना यदि कोई उपलब्ध मामला है तो, उसके बारे में भ्रांतियों की पहचान करना, सांस्कृतिक अथवा मूल्य संबन्धित मामले, व्यक्तित्व संघर्ष और परिवर्तन के प्रतिरोध का संघर्ष अगला चरण होगा। इसके बाद अनेक वैकल्पिक निवारणों का अनुमान लगाया जाना चाहिए और सर्वाधिक उचित निवारण पर सहमति होनी चाहिए। सहमति में बातचीत, सौदेबाजी और समझौता सम्मिलित हो सकता है। बातचीत, एकमत के माध्यम से, संघर्ष निवारण की सामान्य पद्धति है। समझौता, संघर्ष निवारण की अन्य विधि है जिसमें तीसरे पक्षकार सामान्य तौर पर समझौता अधिकारी की मौजूदगी में निपटारा किया जाता है। मध्यस्थता संघर्ष निवारण की एक दूसरी विधि है जिसमें मध्यस्थ का निर्णय दोनों पक्षों के लिए बाध्यता मूलक होता है।
थकान से आश्रय
थकान से निपटना आवश्यक है और कुछ सुझाए गए ढंग निम्न उल्लेखित किए गए हैं -
i. सामाजिक कार्यकर्ता को परिवर्तित होते हुए सामाजिक परिवेश की जागरूकता और लोगों पर इसके प्रभाव का वास्तविक मूल्यांकन करना चाहिए, जिसमें उनका अपना मूल्यांकन भी सम्मिलित है।
ii. सीखने और आगे बढ़ने के लिए हर चुनौती को अवसर के रूप में देखने की जरूरत होती है।
iii. अपनी रूचि के क्षेत्र में कार्य करना जिसके बारे में वे अधिक सीखने के लिए प्रोत्साहित होते हैं, थकान दूर करने का उचित समाधान है।
iv. समय प्रबंधन और तनाव प्रबंधन आज के कार्य परिवेश में काफी जरूरी हैं।
V. मानव सेवा की मूल्य पद्धति के अनुरूप, निजी मूल्य पद्धति का होना और उसे बनाए रखना जरूरी है चाहे इसके सिद्धांत स्वीकृत सामाजिक मूल्यों के विपरीत ही हों।
vi. व्यवसायिक और निजी जीवन को अलग रखना जरूरी है।
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