भारत का सांस्कृतिक इतिहास - Cultural History of India
भारत का सांस्कृतिक इतिहास - Cultural History of India
सांस्कृतिक इतिहास समाज, धर्म, साहित्य और कला का मिश्रण है। इसके अंतर्गत रीति रिवाज, संस्कार, शिक्षा, साहित्य, वास्तुकला, चित्रकला, संगीत तथा आमोद-प्रमोद के साधनों का विवरण रहता है। सांस्कृतिक इतिहास के अध्ययन को सरल तथा सुबोध बनाने के लिए इतिहासकारों ने इतिहास क्षेत्र को प्राचीन, मध्ययुगीन तथा आधुनिक काल में विभक्त किया है। किसी भी महान सम्राट या राजवंश के शासन काल को सांस्कृतिक इतिहास का विषय बनाया जाता है। जैसे मौर्यकाल गुप्तकाल, राजपूतकाल, मुगलकाल, ब्रिटिशकाल के सांस्कृतिक विकास का अध्ययन इतिहासकारों ने किया है।
भारतीय संदर्भ में संस्कृतविदए एल. बाशम की पुस्तक अद्भुत भारत (The wonder that was India) राजनीतिक इतिहास से अराजनीतिक इतिहास अथवा सांस्कृतिक इतिहास की ओर एक प्रमुख मोड़ था। यही मोड़ डी. डी. कोशाम्बी की पुस्तक 'एन इस्ट्रोडक्शन टु द स्टडी ऑफ इण्डियन हिस्ट्री में भी परिलक्षित होता है जो बाद में 'एन्शिाएन्ट इंडियन कल्चर एंड सिबलाइजेशन आउटलाइन में प्रचारित हुआ। कोशाम्बी ने सांस्कृतिक इतिहास को प्रमुखता देकर भारतीय इतिहास को एक नवीन आयाम दिया।
वर्तमान में अधिकांश इतिहासकार सामाजिक, धार्मिक एवं आर्थिक पहलुओं के परिप्रेक्ष्य में सांस्कृतिक इतिहास पर विशेष जोर देते हुए उनका संबंध राजनीतिक गतिविधियों से जोड़ने का सराहनीय प्रयास करते हैं। भारत की सांस्कृतिक विरासत की बृहदता को देखते हुए सांस्कृतिक इतिहास को प्राचीन मध्ययुगीन एवं आधुनिक भारत के सांस्कृतिक इतिहास में विभक्त कर लिया गया है। इस दिशा में दत्ता, राम चौधरी एवं मजूमदार की कृति भारत का बृहद् इतिहास भाग 1.2 एवं 3 तथा चोपड़ा, पुरी एवं दास की कृति A Social Cultural and Economic History of India, Vol 1, 2 and 3 विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। इन्होंने अपनी कृतियों में प्राचीन, मध्ययुगीन एवं आधुनिक भारत के सांस्कृतिक इतिहास को समेटा है।
सांस्कृतिक इतिहास के विस्तार क्षेत्र को देखते हुए कई इतिहासकारों ने काल विशेष एवं सम्राट विशेष के काल की संस्कृति के विविध पक्षों पर भी विशेष रूप से प्रकाश डाला है। रोमिला थापर कृत "अशोक एण्ड द डिक्लाइन ऑफ मौर्य, राधाकुमुद मुखर्जी कृत चन्द्रगुप्त मौर्य और उसका काल राहुल सांकृत्यायन कृत 'ऋग्वैदिक आर्य एवं अकबर, मजूमदार एवं अल्तेकर कृत 'द वाटक गुप्ता एज मजूमदार कृत दहा इरा', रामानन्द चटर्जी कृत 'राम मोहन राव एण्ड मार्डन इण्डिया ए. आर. देसाई कृत सोशल बैकग्राउण्ड ऑफ इण्डियन नेशनलिज्म, कपिल कुमार कृत 'पीजेप्ट्स इन रिवोल्ट, ए. आर. देसाई कृत 'पीबेण्ट्स स्ट्रगल इन इण्डिया, आर. सी. दत्ता कृत 'द इकनॉमिक हिस्ट्री ऑफ इण्डिया' आदि कृतियाँ राजनीतिक इतिहास में सांस्कृतिक इतिहास की ओर एक प्रमुख रुझान प्रस्तुत करती हैं। इस दृष्टि से रामधारी सिंह दिनकर कृत संस्कृति के चार अध्याय भी एक महत्वपूर्ण कृति है।
वार्तालाप में शामिल हों