पिछड़े वर्गों का विकास - development of backward classes
पिछड़े वर्गों का विकास - development of backward classes
पिछड़े वर्गों वे जातियाँ अथवा समुदाय हैं जिन्हें राज्य सरकारों द्वारा सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़ा वर्ग के रुप में अधिसूचित किया जाता है अथवावे है जिन्हें समय-समय पर केन्द्रीय सरकार द्वारा अधिसूचित किया जाता है। पिछड़े वर्गों के कार्य की देखभाल गृह मंत्रालय में पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठद्वारा की जाती थी जो बाद में नए सृजित किए गए कल्याण मंत्रालय में चला गया जिसे अब सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की संज्ञा दी जाती है। मंत्रालय में पिछड़ा वर्गे प्रभाग, अन्य पिछड़ा वर्ग के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण से संबन्धित कार्यक्रमों की नीति नियोजन और कार्यान्वयन पर ध्यान देना है। यह उन दो संस्थाओं के मसलों को भी देखता है जो कि अन्यपिछड़ा वर्ग की भलाई के लिए स्थापित की गई है- राष्ट्रीय अन्य पिछड़ा वर्ग, वित्त एवं विकास निगम (NSCFDC, जिसका अर्थ पिछड़ा वर्गों के लाभ के लिए आर्थिक और विकास अर्थ-कलापों का संवर्द्धन करना और कौशल विकास तथा स्वरोजगार कार्यों में इन श्रेणियों के गरीब वर्गों की मदद करना है) और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग है, NCBC राष्ट्रिय पिछड़ा आयोग अधिनियम 1993 सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर बनाया गया जिससे कि भारत सरकार के अन्तर्गत सिविल पदों और सेवाओं में आरक्षण करने के उद्देश्य के लिए अन्य पिछड़ा वर्ग के नागरिकों को केन्द्रित सूची में सम्मिलित करने के अनुरोधों और शिकायतों पर विचार करने, जाँच करने और सिफारिश करने के लिए एक स्थानीय निकाय स्थापित किया जा सकें।
अन्य पिछड़ा वर्गों के लिए प्रमुख कार्यक्रम निम्न हैं -
• अन्य पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों के लिए पूर्व मैट्रिक छात्रवृत्तियाँ हैं (गरीबी रेखा से नीचे परिवारों के विद्यार्थियों के लिए)
• अन्य पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों के लिए उत्तर-मैट्रिक छात्रवृत्ति
• अन्य पिछड़ा वर्ग के बालकों और बालिकाओं के लिए छात्रावास (स्थापित छात्रावासों में से कम से कम एक-तिहाई विशेषरूप से बालिकाओं के लिए होंगे और इनमें कुल स्थानों में 5 प्रतिशत विकलांग विद्यार्थियों के लिए आरक्षित होंगे)
• अन्य पिछड़ा वर्गों के कल्याण के लिए स्वैच्छिक संगठनों को मदद देना।
वार्तालाप में शामिल हों