इतिहास और समाजशास्त्र में अंतर - Difference between history and sociology

इतिहास और समाजशास्त्र में अंतर - Difference between history and sociology

इतिहास और समाजशास्त्र में अंतर - Difference between history and sociology

एक विषय के रूप में जो अंतर इतिहास एवं सामाजिक मानवविज्ञान में हमने पूर्व में उल्लिखित किए हैं, लगभग वहीं अंतर हमें इतिहास एवं समाजशास्त्र में भी दृष्टिगोचर होते हैं। इतिहास एवं समाजशास्त्र के कुछ मौलिक अंतरों को हम निम्नानुसार देख सकते हैं।





1. फ्रेंक बैन आल्स्ट महोदय के अनुसार इतिहास समाजशास्त्र की तरह मनुष्य को सामाजिक अंतर्संबंधों के साथ ही नहीं देखता अपितु उसको भी समय के प्रवाह में रखकर निरंतर परिवर्तनशील विकास में भी देखता है। समाजशास्त्री मनुष्य को समय के प्रवाह से अलग करके देखता है, वह समय को स्थिर कर देता है और यही कारण है कि यह अध्ययन यथार्थ से दूर हो जाता है मनुष्य समय के प्रवाह में जीता है और उसके जीवन का निष्कर्ष यही है कि वह गतिशील


 2. सामान्यत इतिहास में कुछ विशिष्ट उल्लेखनीय एवं असाधारण सामाजिक घटनाओं का अध्ययन किया जाता है, जिन्होंने इतिहास की गति एवं दिशा को प्रभावित किया हो, जबकि समाजशास्त्र उन सामाजिक घटनाओं का अध्ययन करता है, जिसकी पुनरावृत्तियाँ अधिक हुई हो। 






3. इतिहास देश, काल एवं परिस्थिति के परिप्रेक्ष्य में घटनाओं का विश्लेषण करता है और संभावित निष्कर्ष निकालता है, जबकि समाजशास्त्र देश, काल एवं परिस्थिति के अनुसार घटनाओं से


मर्यादित न रहकर सार्वभौमिक एवं सर्वकालिक निष्कर्ष निकालता है। 


4. इतिहास की प्रमुख विषय वस्तु अतीतकालीन समाज का अध्ययन है जबकि समाजशास्त्र की प्रमुख विषय-वस्तु वर्तमान समाज का अध्ययन है। एक समाजशास्त्री अतीत के समाज के अध्ययन में वहीं तक रुचि रखता है, जहाँ तक कि उन घटनाओं से वर्तमान समाज को समझने में मदद मिल सकती हो। 





5. इतिहास में यर्थाथता पर विशेष बल रहता है। अतः वह ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर अतीत का अध्ययन करता है और कुछ संभावित निष्कर्ष निकालने का प्रयास करता है, जबकि समाजशास्त्र वैज्ञानिक पद्धति एवं प्रयोगात्मक तरीकों से सामाजिक घटनाओं का अवलोकन करता है।


समाजशास्त्र सामाजिक समस्याओं के विश्लेषण के साथ-साथ उन्हें सुलझाने हेतु सुझाव भी प्रस्तुत रता है।


 6. पार्क महोदय के अनुसार इतिहास मानव एवं मानव प्रकृति का एक मूर्त विज्ञान है, जबकि समाजशास्त्र इन्हीं का एक अमूर्त विज्ञान है। इतिहास अतीत में घटी हुई किसी भी घटना के घटने के पश्चात् उनके कारणों एवं परिस्थितियों का विश्लेषण करता है जबकि समाजशास्त्र कई घटित घटनाओं का प्रायोगिक परीक्षण कर उन प्रक्रियाओं का अध्ययन करता है, जिनके कारण घटनाएँ घटती हैं।









इस प्रकार हम देखते हैं कि इतिहास एवं समाजशास्त्र परस्पर घनिष्ठ रूप से संबंधित होते हुए भी इनमें सैद्धांतिक रूप से कुछ मूलभूत अंतर भी है। इतिहास एवं समाजशास्त्र दोनों में ही अतीतकालीन समाज का अध्ययन होता है इतिहास काल के सापेक्ष में गतिशील समाज का अध्ययन करता है एवं समाजशास्त्र काल से निरपेक्ष रहते हुए स्थिर अवस्था में समाज का अध्ययन करता है। इतिहास में ऐतिहासिक पद्धति को महत्व दिया जाता है और संभावित निष्कर्ष निकाले जाते हैं। समाजशास्त्र में वैज्ञानिक पद्धति का अवलंबन कर सार्वजनिक निष्कर्ष निकाले जाते हैं। इतिहास इस तथ्य को रेखांकित करता है कि घटना क्यों पटी, जबकि समाजशास्त्र यह बताता है कि घटनाएँ क्यों घटती है? इस संदर्भ में इतिहास एक मूर्त एवं समाजशास्त्र अमूर्त विज्ञान है इतिहास एवं समाजशास्त्र में कुछ मौलिक अंतर होते हुए भी दोनों परस्पर पनिष्ठ रूप से सहसंबंधित हैं।