पेयजल नियोजन - drinking water planning
पेयजल नियोजन - drinking water planning
केन्द्र सरकार ने 1954 में राष्ट्रीय जल प्रदाय एवं स्वच्छता योजना (National Water Supply and Sanitation) प्रारम्भ की जिसके अधीन राज्य सरकारों को नगरीय क्षेत्रों में इन कार्यों के लिए लम्बी अवधि के ऋण तथा ग्रामीण क्षेत्रों के लिए समुचित आर्थिक अनुदान देने की व्यवस्था की गयी। पहली, दूसरी तथा तीसरी योजनाओं में गाँवों में पेयजल की व्यवस्था करने को प्राथमिकता प्रदान की गयी। इन तीनों योजनाओं में इस कार्यक्रम पर कुल मिलाकर 201.1 करोड़ रूपये खर्च किये गये तथा 57,800 गाँवों में पीने के पानी की सुविधा प्रदान की गयी।
चौथी पंचवर्षीय योजना में 373 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया। पाँचवीं पंचवर्षीय योजना में ग्रामीण पेयजल के लिए 381.24 करोड़ रूपये निर्धारित किये गये तथा नगरीय क्षेत्रों के लिए 539.17 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया। छठीं पंचवर्षीय योजना में सभी गाँवों में पेयजल की सुविधा प्रदान करने हेतु2007 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया तथा नगरीय क्षेत्रों के लिए 1753.56 करोड़ रूपये की व्यवस्था की गयी। सातवी पंचवर्षीय योजना में ग्रामीण पेयजल हेतु 2350 करोड़ रूपये तथा नगरीय पेयजल हेतु 2935.64 करोड़ रूपये की धनराशि निर्धारित की गयी। आठवीं पंचवर्षीय योजना में नगरीय पेयजल हेतु 70000 करोड़ रूपये तथा ग्रामीण पेयजल हेतु 10055 करोड़ रूपये की राशि निर्धारित की गई।
नौवीं पंचवर्षीय योजना में नगरीय पेयजल हेतु230750 करोड़ रूपये एवं ग्रामीण पेयजल हेतु 8252 करोड़ रूपये निर्धारित की गई। दसवीं पंचवर्षीय योजना में पेयजल हेतु 14200 करोड़ रूपये का अनुमोदित परिव्यय निर्धारित किया गया। जिसके अन्तर्गत त्वरित ग्रामीण जल आपूर्ति कार्यक्रम पर 13245 करोड़ रूपये तथा ग्रामीण सफाई कार्यक्रम पर 955 करोड़ रूपये का परिव्यय रखा गया।
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