शिक्षा नियोजन - education planning

शिक्षा नियोजन - education planning

शिक्षा नियोजन - education planning


योजना में शिक्षा व्यवस्था में पुर्वाभिमुखीकरण (ओरिएंटेशन), प्राथमिक एवं सामाजिक शिक्षा के विस्तार एवं व्यावसायिक शिक्षा में सुधार उपलब्ध शिक्षा सुविधाओं के सुदृढ़ीकरणमहिला शिक्षा, विशेष रूप से ग्रामीण अंचलों में के विस्तार तथा अध्यापकों, विशेष तौर से महिला अध्यापकों के प्रशिक्षण के संबंध में प्रावधान किये गये दूसरी पंचवर्षीय योजना में शिक्षा सुविधाओं में परिमाणात्म विकास की बात कही गयी। इस योजना में माध्यमिक तथा उच्च शिक्षा पर अधिक बल दिया गया।

तीसरी पंचवर्षीय योजना में प्राथमिकताएं दूसरी पंचवर्षीय योजना जैसी ही रहीं। 


चौथी पंचवर्षीय योजना में गुणात्मक सुधार पर बल दिया गया। अनुसूचित जनजातियों की शिक्षा की ओर विशेष ध्यान दिया गया।


पाँचवीं पंचवर्षीय योजना में प्रारम्भिक शिक्षा पर पुन बल दिया गया। भवन, श्यमापट्ट, टाट पट्टी इत्यादि जैसी भौतिक सुविधाओं की व्यवस्था को प्राथमिकता प्रदान की गयी। पाठ्यक्रम में सुधार का प्रस्ताव रखा गया। अध्यापक प्रशिक्षण सुविधाओं में वृद्धि करने की व्यस्था की गयी। माध्यमिक स्तर पर शिक्षा के व्यवसायीकरण का प्रस्ताव रखा गया। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़े वर्गों के लिए सांयकालीन कक्षायें चलायी गयीं। पत्राचार पाठ्यक्रम प्रारम्भ करने की बात की गयी । उन्नत शिक्षा के लिए केन्द्र स्थापित करने तथा कम्प्यूटर सुविधाओं का विकास करने हेतु प्रावधान किया गया। राष्ट्र भाषा विकास के लिए दो हजार अतिरिक्त हिन्दी अध्यापकों की नियुक्ति का प्रस्ताव रखा गया। राष्ट्रीय सेवा योजना तथा नेहरू युवक केन्द्रों को और अधिक सुदृढ़ बनाने की संस्तुति की गयी। तकनीकी शिक्षा में गुणात्मक विकास के लिए नये तकनीकी केन्द्रों तथा शिक्षा की व्यवस्था की गयी। इंजीनियरिंग महाविद्यालयों को खोलने और उन्हें आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित करने का भी प्रस्ताव रखा गया।











छठीं पंचवर्षीय योजना में ये निश्चित किया गया कि 8.26 करोड़ बच्चों को प्राथमिक स्तर पर तथा 2.58 करोड़ को माध्यमिक स्तर पर निवेशित किया जायेगा और इस प्रकार से 6-11 वर्ष के बच्चों में से 95 प्रतिशत तथा 11-14 वर्ष के बच्चों में 50.3 प्रतिशत का प्रवेश सुनिश्चित किया जायेगा। इस उद्देश्य की प्राप्ति हेतु अनौपचारिक शिक्षा पर बल दिया गया। इसके साथ ही साथ प्रौढ़ शिक्षा पर भी बल दिया गया और 1977-78 में राष्ट्रीय प्रौढ़ शिक्षा कार्यक्रम प्रारम्भ किया गया।


सातवीं पंचवर्षीय योजना में सार्वभौमिक की संकल्पना प्रारम्भिक शिक्षा प्रदान करने, 15-33 वर्ष की आयु के लोगों में निरक्षरता को हटाने, शिक्षा के विभिन्न स्तरों पर व्यवसायीकरण करने, शिक्षा के सभी स्तरों का आधुनिकीकरण करने तथा प्रत्येक जिले में अच्छी शिक्षा की व्यवस्था करने से सम्बन्धित प्रावधान किये गये। 


शिक्षा नीति आठवीं पंचवर्षीय योजना के अंतर्गत लागू हुई जिसकी उपलब्धियां महत्पूर्ण थीं। नवीं योजना में शिक्षा को सबसे महत्वपूर्ण निवेश माना गया। विशेष क्रियायोजना में शिक्षा को सबसे महत्वपूर्ण माना गया है।


सार्वभौमिक प्राथमिक शिक्षा की संकल्पना पंचायतीराज संस्थाओं, राज्य एवं केन्द्र संस्थाओं स्वैच्छक संस्थाओं, सामाजिक एवं अन्य समूहों के प्रयासों से सम्भव हो पायेगी । प्रौढ़ शिक्षा के ऊपर बल देना बहुत आवश्यक है, सार्वभौमिक प्राथमिक शिक्षा (UEE) कार्यक्रम की तरह इसे भी सबकी साझेदारी से आगे बढ़ाना होगा। माध्यमिक शिक्षा हेतु पाठ्यक्रम में बदलाव किए गए। छात्रवृत्ति, छात्रावास व अन्य सुविधायें प्रदान की गयी जिससे महिलाओं एवं अन्य पिछड़े समूहों के सदस्यों का शैक्षिक स्तर ऊपर उठ सके। शिक्षा के व्यवसायीकरण पर बल दिया गया तथा मुक्त शिक्षा प्रणाली एवं दूरस्थशिक्षा प्रणाली जैसी अन्य प्रणालियां उपलब्ध करायी गयीं। जिससे साक्षरता बढ़ सके। अध्यापकों की सेवावधि में समय-समय पर प्रशिक्षण आयोजित किया जायेगा तथा शिक्षण पूर्व प्रशिक्षण दिया जाएगा। शिक्षा की नवीनतम तकनीकों का अध्ययन एवं उनका इस्तेमाल सम्भव कराया जाएगा।