शिक्षा नीति - education policy

शिक्षा नीति - education policy

शिक्षा नीति - education policy

भारतीय संविधान के चौथे भाग में उल्लिखित नीति निदेशक तत्वों में कहा गया है कि प्राथमिक स्तर तक के सभी बच्चों को अनिवार्य एवं निःशुल्क शिक्षा की व्यवस्था की जाय। 1948 में डॉ. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग के गठन के साथ ही भारत में शिक्षा प्रणाली को व्यवस्थित करने का काम शुरू हो गया था। 1952 में लक्ष्मीस्वामी मुदालियर की अध्यक्षता में गठित माध्यमिक शिक्षा आयोग, तथा 1964 में दौलत सिंह कोठारी की अध्यक्षता में गठित शिक्षा आयोग की अनुशंशाओं के आधार पर1968 में शिक्षा नीति पर एक प्रस्ता प्रकाशित किया गया जिसमें राष्ट्रीय विकास के प्रति वचनबद्ध, चरित्रवान तथा कार्यकुशल युवक-युवतियों को तैयार करने का लक्ष्य रखा गया।





इसे 1968 में शिक्षा पर राष्ट्रीय नीति की तरह घोषित किया गया। इसके मुख्य बिंदु निम्नानुसार हैं -


• प्राथमिक शिक्षा का सार्वभौमीकरण


• नवीन शिक्षा पद्धति का प्रस्ताव


• त्रिभाषा सूत्र


• उच्च शिक्षा में स्थानीय भाषा के प्रयोग का स्वीकार कृषि, उद्योग एवं प्रौढ़ शिक्षा के विकास का प्रस्ताव


• समान विद्यालय योजना






1979 में जनता सरकार ने पूर्व की शिक्षा नीति में कुछ बदलाव किए गए। इसमें चौदहवर्ष तक के सभी बालक बालिकाओं को निशुल्क सार्वजनिक और अनिवार्य शिक्षा देने पर जोर दिया गया। इसमें शिक्षण (टीचिंग) से अधिक अधिगम (लर्निंग ) पर बल देने का प्रस्ताव किया गया। पत्राचार पाठ्यक्रम, प्रौढशिक्षा को बढ़ावा दिया जाए। 1986 पूर्व की शिक्षा नीतियों को एक नवीन रूप नई शिक्षा नीति से प्राप्त हुआ। मई 1986 में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू की गई, जो अब तक चल रही है।