सामाजिक नियोजन के तत्व - Elements of Social Planning

सामाजिक नियोजन के तत्व - Elements of Social Planning

सामाजिक नियोजन के सफलता के महत्वपूर्ण तत्व - elements of social planning


सामाजिक नियोजन आज प्रत्येक समाज में सर्वांगीण विकास के लिए अपनाया जाता है, फिर भी भारत जैसे देशों में इसका महत्व अधिक है क्योंकि इन समाजों को नागरिकों की अनिवार्य आवश्यकताओं की पूर्ति एवं उनमें समानता लाने के लिए तथा विकसित देशों के बराबर पहुँचने के लिए अभी काफी रास्ता तय करना है। नियोजन की प्रक्रिया एक संपूर्ण प्रक्रिया होती है। इससे संबंधित विभिन्न पहलुओं के अनेक प्रकार के तत्वोंमें आवश्यक अंतसंबंध को ध्यान में रखकर एकीकृत योजना बनायी जानी चाहिए। न केवल सामाजिक एवं आर्थिक नियोजन को एक दूसरे के पूरक के रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए बल्कि इनके विभिन्न तत्वों को भी एक-दूसरे पर निर्भर मानते हुए योजना का निर्माण एवं कार्यान्वान किया जाना चाहिए। सफल नियोजन के लिए निम्नलिखित महत्वपूर्ण तत्वों को ध्यान में रखा जाना चाहिए - 






1. योजना का निर्माण योजना के कार्यान्वयन संबंधी पहलू पर विशेष ध्यम देते हुए किया जाना चाहिए। 


2. योजना का निर्माण स्थानीय स्तर पर गाँव एवं शहर के मोहल्ले को इकाई मानकर किया जाना चाहिए।


3. योजना के निर्माण एवं कार्यान्वयन में अधिक से अधिक जन सहभागिता होनी चाहिए जिससे अनुभूत आवश्यकताओं का परावर्तन हो सके तथा योजना यथार्थवादी बन सके।


4. योजना के अंतर्गत किसी भी कार्यक्रम की शुरूआत करने से पहले संबंधित लक्ष्यसमूह को इसकी जानकारी उपलब्ध करानी चाहिए। 


5. योजना के निर्माण तथा कार्यान्वयन से संबंधित ढंग एवं कार्यरीतियाँसरल एवं स्पष्ट होनी चाहिए तथा इसके बारे में सभी लोगों को जानकारी होनी चाहिए। 


6. योजना न केवल वर्तमान बल्कि भविष्य की आवश्यकताओं एवं समस्याओं को ध्यान में रखकर क्रियान्वित करनी चाहिए। 


7. नियोजन की प्रक्रिया में स्थानीय लोगों, संस्थाओं तथा संबंधित सरकारी तंत्र से संबंधित कर्मचारियों के अलावा विषय विशेषज्ञों को भी सम्मिलित किया जाना चाहिए।








8. लोगों की सांस्कृतिक सामाजिक एवं मनोवैज्ञानिक पृष्ठभूमि को ध्यान में रखकर योजना का निर्माण करना चाहिए। 


9. योजना में सम्मिलित की जाने वाली प्रविधियों को स्थानीय आवश्यकताओं एवं समस्यामों के अनुरूप होना चाहिए।


10. योजना के लक्ष्यों का निर्धारण यथार्थवादी ढंग से होना चाहिए। इन लक्ष्यों के संबंध से संबंधित कर्मचारियों को छूट प्रदान करनी चाहिए। जो प्रत्यक्षतः लोगों की स्वीकृति से संबंधित हो उदाहरण के रूप में परिवार नियोजन के अंतर्गत बंध्याकरण संबंधी लक्ष्यलक्ष्यों को स्वयं को अंतिम उद्देश्यन मानकर इनके माध्यम से लक्ष्य समूहों को होने वाले लाभों को अंतिम उद्देश्य के रूप में स्वीकार करना चाहिए।