सामाजिक नियोजन की सफलता की आवश्यक शर्ते - Factors Affecting Social Planning

सामाजिक नियोजन की सफलता की आवश्यक शर्ते - Factors Affecting Social Planning

सामाजिक नियोजन की सफलता की आवश्यक शर्ते - Factors Affecting Social Planning


सामाजिक नियोजन तभी सफल हो सकता है जब इसका नियोजन कुछ बातों को ध्यान में रखकर की जाए। सामाजिक नियोजन की सफलता निम्नलिखित शर्तों को ध्यान में रखकर की जा सकती हैं -


1) वास्तविक और विस्तृत आंकड़ों की उपलब्धता 


सामाजिक नियोजन के दौरान योजना बनाने का कार्य प्रारंभ करने के पहले विभिन्न प्रकार के आँकड़े उपलब्ध करने की कोशिश करनी चाहिए। ये आँकड़े सामाजिक-आर्थिक क्षेत्रों से होने चाहिए तथा ये वास्तविक एवं विस्तृत आँकड़े होने चाहिए। बचत, पूँजी निर्माण, उत्पादन, उत्पादकता, रोजगार, बेरोजगारी, लागत, रहन-सहन, आदतों, स्वास्थ्य स्तर, शैक्षिक उपलब्धियों मनोवृतियों, मूल्यों, विश्वासों इत्यादि से संबंधित विस्तृत एवं यथार्थ सूचना उपलब्धहोनी चाहिए। 


2) नियोजन के क्रमिक चरणों का समुचित उपयोग 


नियोजन के कुछ चरण होते हैं इन चरणों का क्रमबद्ध तरीके से समुचित उपयोग करना चाहिए। ये चरण निम्न क्रम में हो सकते है योजना का निर्धारण, योजना का स्वीकृतिकरण, योजना का कार्यान्वयवन तथा योजना का मूल्यांकन इन सभी चरणों का क्रमानुसार अनुपालन किया जाना आवश्क है।











3) प्राथमिकता का उचित निर्धारण 


अल्पविकसित एवं विकासशील देश में सामान्यतः लोगों की आवश्यकता अधिक होती है तथा संसाधन सीमित होते हैं। अत नियोजन के लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु प्राथमिकताओं का निर्धारण किया जाना आवश्यक होता है। प्राथमिकता के आधार पर ही हम यह तय करते कि कौन सा कार्य अत्यधिक आवश्यक एवं उपयोगी है तथा कम संसाधन में अधिक लाभ मिलेगा।


4) उचित राजनीतिक निर्देश 


किसी भी लोकतांत्रिक देश में नियोजन की सफलता ईमानदार कर्तव्य निष्ठ तथा उत्साही राजनेताओं पर निर्भर करती है। अत राजनेताओं का यह कर्तव्यबनता है कि वे सामाजिक नियोजन के क्षेत्र में समुचित मार्गदर्शन एवं प्रोत्साहन प्रदान करें।


5 ) उचित प्रोत्साहन 


योजनाओं के सफल संचालन के लिए तथा सामाजिक एवं आर्थिक क्षेत्रों में कार्य करने वाले कुशल एवं कर्तव्यनिष्ठ कार्यकर्ताओं को समयसमय पर उचित पारितोषिक एवं प्रोत्साहन प्रदान करना चाहिए तथा कार्यान्वयन का दायित्व निर्धारित करने की व्यवस्था का विकास कर अयोग्य अकुशल एवं भ्रष्ट कार्यकर्ताओं को उदाहरण स्वरूप दण्ड दिया जाना चाहिए।


6) जन सहभागिता 


नियोजन के लिए जनसहभागिता आवश्यक है। नियोजन के लिए जन सहयोग के उपलब्ध होने पर ही लोगों की अनुभूत आवश्यकताओं कासही पता चल सकता है तथा इनके कार्यान्वयन में जन सहभागिता हो सकती है।


7) समानता पर बल सामाजिक नियोजन का अंतिम उद्देश्य सामाजिक


आर्थिक विषमता को दूर कर अधिक से अधिक सामाजिक तथा आर्थिक समानता को उत्पन्न करना होता है। समानता लाने के लिए निर्बल एवं समाज के कमजोर वर्गों के उत्थान पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता होती है। इसके लिए कुछ विशिष्ट प्रकार के कार्यक्रम का आयोजन करते हुए इन वर्गों को विशेष सहायता प्रदान किये जाने की आवश्यकता होती है। 


8) वैकल्पिक व्यवस्थाओं की अनिवार्यता 


सामाजिक नियोजन के उद्देश्यों एवं लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु वैकल्पिक व्यवस्थाओं, रणनीतियों एवं साधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करनी चाहिए क्योंकि अगर कोई व्यवस्था या रणनीति असफल होती है तो उसके जगह पर अन्य विकल्प को प्रयोग में लाया जा सके।


9) अल्पकालीन तथा दीर्घकालीन लक्ष्यों का निर्धारण


 सामाजिक नियोजन में अल्पकालीन एवं दीर्घकालीन दोनों प्रकार के लक्ष्यों का समावेश होना चाहिए। अल्पकालीन लक्ष्य अनुभव से प्राप्त आवश्यक आवश्यकताओं की पूर्ति में सहायक सिद्ध होते है तथा दीर्घकालीन लक्ष्यभावी विकास के लिए अपेक्षित संदर्भ प्रदान करते हुए प्रारंभ की गई क्रिया एवं उपलब्धि की निरंतरता को बनाए रखती है। 


10) योजना का प्रचार एवं प्रसार 


प्रचार एवं प्रसार के माध्यम से योजना के स्वरूप कार्यान्वयवन की रणनीति तथा प्रगति इत्यादि की जानकारी सामान्य वर्गों को प्रदान करती रहनी चाहिए ताकि अपेक्षित जन सहयोग प्राप्त होता रहे। जन सहभागिता के माध्यम से योजना को सफलता पूर्वक कार्यान्वित किया जा सकता है।