आठवीं पंचवर्षीय योजना में परिवार नियोजन की रणनीति - Family Planning Strategy in the Eighth Five Year Plan

Family Planning Strategy in the Eighth Five Year Plan

आठवीं पंचवर्षीय योजना में परिवार नियोजन की रणनीति - Family Planning Strategy in the Eighth Five Year Plan

दिसम्बर 1991 में राष्ट्रीय विकास परिषद के सम्मुख पेश किए गए योजना आयोग के प्रलेख “जनसंख्या नियन्त्रण चुनौतियां एवं रणनीतियाँ में उल्लेख किया गया। “जनसंख्या विस्फोट जो हमारे देश के सामाजिक आर्थिक विकास के सभी प्रयासों को निष्फल बनाता जा रहा है, हमारी सबसे महत्वपूर्ण समस्या है। 1991 की जनगणना से यह बात साफ हो गयी है कि जनसंख्याकी वृद्धि दर में मात्र कमी हुई है। 1971 1981 के दशक के दौ 2.2 प्रतिशत से 1981-1991 के दशके 2.11 प्रतिशत, किन्तु 2 प्रतिशत की वृद्धि दर अभी भी बहुत ऊँची है। यदि जनसंख्या की वृद्धिदर वर्तमान स्तर पर बनी रहती है, तो इस शताब्दी के अन्त तक हमारी आबादी लगभग 100 करोड़ हो जायेगी और 2040 तक यह दुगुनी होकर 170 करोड़ तक पहुँच जाएगी। इतनी बड़ी जनसंख्याका प्रबंध वस्तुत: असम्भव हो जाएगा और भरसक प्रयास करने के बावजूद इतनी बड़ी जनसंख्या के लिए जीवन की बुनियादी आवश्यकताएं भी उपलब्ध नहीं करायी जा सकेंगी..... अत: यह अनिवार्य हो जाता है कि जनसंख्या नियन्त्रण को सर्वोच्च प्राथमिकता दिए जाने पर जोर दिया गया।"










परिवार कल्याण कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा से पता चलता है कि सन् 2000 तक राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति द्वारा निर्धारित लक्ष्य प्राप्त करना सम्भव हो सकेगा। चाहे शिशु मृत्युदर को 9 प्रति हजार तक कम करना और ि मृत्युदर को स्वास्थ्य सेवाओं और माता एवं बालस्वास्थ्य की देखभाल के कार्यक्रमों के परिणामस्वरूप कम करके 60 प्रति हजार तक कम करना तो सम्भव हो सकेगा किन्तु जन्मदर में आवश्यक कमी करके इसे 21 प्रति हजार और परिणामत: जनसंख्या वृद्धि दर को 1.2 प्रतिशत तक कम करना व्यवहार्य प्रतीत नहीं होता। यदि ये लक्ष्य सन् 2010 तक भी प्राप्त करने हों, तो भी इसके लिए भारी प्रयास करना होगा जिसका आधार जनसंख्या नियन्त्रण पर सम्पूर्ण दृष्टिकोण होना चाहिए जिसमें परिवार नियोजन उपायों के साथ-साथ सामाजिक-आर्थिक उपाय भी करने होंगे।


अत: आठवीं योजना के अन्त तक शिशु जन्मदर को कम करके 26 प्रति हजार और शिशु मृत्युदर को कम करके 70 प्रति हजार का लक्ष्य प्राप्त कर लिया गया है। यह एक सन्तोषजनक उपलब्धि है। नौवीं योजना के दौरान परिवार नियोजन आठवीं योजना की प्रगति संतोषजनक है। इसके दौरान शिशु जन्मदर 1996 में 27.4 प्रति हजार हो गयी और शिशु मृत्युदर 1996 में प्रति हजार हो गयी। इसके अतिरिक्त दम्पत्ति सुरक्षा दर मार्च 1997 तक 45.5 प्रतिशत के पर पहुँच गयी।


नौवीं योजना (1997-2000) में जनसंख्या वृद्धि में योगदान के लिए तीन कारण तत्वों को उत्तरदायी माना है: 


1) प्रजनन आयु वर्ग में जनसंख्या का योगदान बहुत बड़ा है और इसका जनसंख्या की वृद्धि में योदान 60 प्रतिशत आंका गया। ध्यान देने योग्य बात यह है कि जहाँ 15-44 आयु वर्ग में विवाहित स्त्रियों की संख्या 1961 में 788 लाखी थी, इस संख्या के 1,442 लाख हो जाने का अनुमान है। 


2) गर्भ निरोधकों की आवश्यकता की पूर्ति न हो सकने के परिणामस्वरूप जनसंख्या की वृद्धि में 20 प्रतिशत योगदान का अनुमान लगाया गया। 









3) उच्च शिशु मृत्युदर के परिणामस्वरुप उच्च अनिच्छित प्रजनन दर हो जाने से जनसंख्या में 20 प्रतिशत योगदान का अनुमान है।


नौवीं योजना में यह आशा की गयी थी कि प्रजनन एवं बाल स्वास्थ्य देखभाल में वृद्धि के फलस्वरूप सन् 2002 तक शिशु मृत्युदर की निम्न सीमा अर्थात् 50 प्रति हजार, रूक्ष जन्मदर 23 प्रति हजार सकल जनन दर 2.6 प्राप्त की जा सकेगी।


प्रजनन एवं बाल स्वास्थ्य देखभाल कार्यक्रम में निम्नलिखित बातों को शामिल किया गया। 


1. मातृ एवं बाल स्वास्थ्य देखभाल को प्रभावी बना कर सुरक्षित मातृत्व और बाल जीवन-शेष का आश्वासन देना।


2. अनिच्छित गर्भधारण रोकने के लिए गर्भ निरोधकों की अधिक मात्रा में उपलब्धता। 


3. कमजोर वर्गों के लिए प्रभावी पोषण सेवाएं उपलब्ध कराना और 


4. यौन सम्बन्धी संक्रामक रोगों और स्त्रियों के गुप्तरोगों का उपचार करना।


इन उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए जनसंख्या नीति पत्र में इस बात पर बल दिया गया कि परिवार नियोजन के लिए कुल सार्वजनिक क्षेत्र योजना परिव्यय का लगभग 3 प्रतिशत उपलब्ध कराया जाना चाहिए जबकि पहली योजनाओं में यह केवल 1.8 प्रतिशत ही रहा।








दसवीं योजना के दौरान परिवार नियोजन उर्वरता, मृत्युदर और जनसंख्या वृद्धि दर में कमी लाना दसवीं योजना के दौरान प्रमुख लक्ष्य थे ।


I. आई एम आर में 2007 तक 45 प्रति हजार और 2012 तक 28 प्रति हजार तक कमी लाना।


II. मातृ मृत्युदर अनुपात में 2007 तक 2 प्रति हजार जीवित जन्म और 2012 तक 1 प्रति हजार जीवित जन्म तक कमी लाना। 


III. 2001-2011 के बीच जनसंख्या की दशाब्दिक वृद्धि दर में कमी करके इसे 16.2 तक लाना।