परिवार नियोजन - family planning
परिवार नियोजन - family planning
पहली पंचवर्षीय योजना में परिवार नियोजन के नाम पर कोई विशेष कार्यक्रम नहीं प्रस्तावित किये गये थे। केवल सरकारी अस्पतालों तथा स्वास्थ्य केन्द्रों पर स्वेच्छानुसार आने वाले विवाहित दम्पत्तियों को परिवार नियोजन सम्बन्धी तरीकों का ज्ञान कराने, परिवार नियोजन के व्यावहारिक पक्ष को सुदृढ़ बनाने तथा शिक्षा के माध्यम से परिवार को अपनाने के लिए प्रेरित करने तथा मासिक धर्म चक्र को ध्यान में रखते हुए आत्म-संयम कर परिवार को नियोजित करने की बात कही गयी।
दूसरी पंचवर्षीय योजना में परिवार नियोजन कार्यक्रम कीआधार शिला रखी गयी। केन्द्रीय स्तर पर नियोजन निदेशालय की स्थापना की गयी तथा राज्य स्तर पर परिवार नियोजन अधिकारी के पद का सृजन किया गया। इस योजना में परिवार नियोजन के आधुनिक ढंगों से सम्बन्धित ज्ञान का प्रसार करने, परिवार नियोजन क्लीनिकों की स्थापना के माध्यम से निरोधों का वितरण करने तथा नसबन्दी को प्रोत्साहन प्रदान करने से सम्बन्धित प्रावधान किये गये।
तीसरी पंचवर्षीय योजना में राष्ट्रीय स्तर पर परिवार नियोजन सम्बन्धी शिक्षा का प्रसार करने, सीमित परिवार की अवधारणा को समुदाय द्वारा स्वीकार कराने हेतु प्रयास करने 90 प्रतिशत विवाहित दम्पत्तियों को परिवार नियोजन की जानकारी कराने, लूप विधि को प्रारम्भ करने, क्षेत्रीय परिवार नियोजन निदेशालयों की स्थापना करने, परिवार नियोजन से सम्बन्धित कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण की व्यवस्था करने, घनिष्ठ सम्बन्ध स्थापित कर परिवार नियोजन से सम्बन्धित विभिन्न तरीकों के गुणों एवं सीमाओं के विषय में अनौपचरक रूप से बातचीत करते हुए अर्थात् कैफेटीरिया अभिगम अपनाते हुए लक्ष्य दम्पत्ति को उसके द्वारा सर्वोत्तम समझे गये तरीके को अपनाने के लिए प्रेरित करने, तथा निरोध को लोकप्रिय बनाने से सम्बन्धित प्रावधान किये गये।
चौथी पंचवर्षीय योजना में मातृ तथा शिशु कल्याण कार्य को परिवार नियोजन कार्यक्रम के अन्तर्गत सम्मिलित किया गया। इसमें माताओं बच्चों में पोषाहार की कमी को दूर करनेअन्धेपन को रोकने के लिये विटामिन 'ए' की कमी को दूर करने न्यूनतम आवश्यकता कार्यक्रम के अर्न्तगत परिवार नियोजन को सम्मिलित करने तथा मातृ तथा शिशु कल्याण से सम्बन्धित कार्य को परिवार कल्याण, विशेष रूप से परिवार नियोजन, के अन्तर्गत सम्मिलित किये जाने तथा इसका नाम बदलने से सम्बन्धित प्रावधान किये गये।
पाँचवीं पंचवर्षीय योजना में परिवार कल्याण पर विशेष बल दिया गया। 1976 में राष्ट्रीय जनसंख्या नीति निर्धारित की गयी। परिवार नियोजन को स्वीकार कराने के लिए विशेष अभियान चलाये गये। 1 हजार प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों तथा 325 तालुका स्तर के चिकित्सालयों में नसबन्दी की सुविधा उपलब्ध कराने की योजना बनायी गयी। भारत जनसंख्या परियोजना का शुभारम्भ किया गया। 288 नये ग्रामीण परिवार कल्याण केन्द्रों की स्थापना का प्रावधान किया गया।
छठीं योजना में लोगों को परिवार नियोजन स्वीकार करने के लिए दबाव न डालकर समझाने-बुझाने, परिवार की सीमा को 4.2 से घटकार 2.3 निर्धारित करने, जन्मदर को 33 से घटाकर 21 तक करने, मृत्युदर को 14 से करने, तथा निरोध को लोकप्रिय बनाने से सम्बन्धित प्रावधान किये गये। घटाकार 9 तक लाने, शिशु मृत्युदर को 129 से घटाकर 60 तक लाने, तथा नियोजन के अधीन सम्मिलित किये गये दम्पत्तियों की संख्या को 22 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत करने से सम्बन्धित प्रावधान किये गये।
सातवीं पंचवर्षीय योजना में में 42 प्रतिशत दम्पत्तियों को गर्भ निरोध की सीमा में लाने अशोधित जन्मदर को 29.1 प्रतिशत, अशोधित मृत्युदर को 10.4 प्रतिशत तथा बाल मृत्युदर को 90 प्रतिशत तक लाने, सार्वभौमिक टीकाकरण करने, प्रसवपूर्ण सेवाओं के विस्ता क्षेत्र को 75 प्रतिशत तक बढ़ाने से सम्बन्धित प्रावधान किये गये। इन लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु उपस्वास्थ्य केन्द्रों को आधुनिक बनाने, ग्रामीण स्वास्थ्य निदेशकों, बहुउद्देशीय कार्यकर्ताओं तथा अन्य सहायकों को प्रशिक्षित करने, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर सभी रिक्त स्थानों को भरने तथा इन केन्द्रों पर सभी सुविधायें करने, तहसील स्तर पर 400 स्वास्थ्य केन्द्रों को स्थापित करने, स्वयं सेवी संस्थाओं को परिवार नियोजन के लिए प्रोत्साहित करने, शहरों में विशेष प्रकार के कार्यक्रम आयोजित करने तथा पूरे जिले में कम से कम एक चिकित्सालय में नसबन्दी किये हुये मामलों में नस को पुन जोड़ने की सुविधा उपलब्ध कराने सम्बन्धी प्रावधान किये गये।
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