परीक्षणात्मक शोध की विशेषताएँ - Features of Experimental Research

परीक्षणात्मक शोध की विशेषताएँ - Features of Experimental Research

परीक्षण करने के लिए तीन अनिवार्य अंतर्वस्तुएँ हैं-


1) नियंत्रण- 

स्वतंत्र परिवर्ती के प्रभावों को असंदिग्ध रूप से मूल्यांकित करना असंभव है। मूलरूप से परीक्षणात्मक विधि परिवर्तियों के संदर्भ में दो पूर्वानुमानों पर निर्भर करती है—


• यदि दो स्थितियाँ हैं और किसी एक स्थिति में जोड़े अथवा घटाए जाने वाले परिवर्ती के अलावा दूसरे सभी संदर्भों में बराबर है तो दोनों स्थितियों में परिलक्षित होने वाले किसी भी अंतर का कारण परिवर्ती होगा। यह एकल परिवर्ती का नियम कहा जाता है।


• यदि दो स्थितियाँ एक जैसी नहीं है और यह प्रदर्शित करती है कि कोई भी परिवर्ती अन्वेषण क जाने वाली परिघटना का निर्माण करने में प्रभावपूर्ण नहीं है अथवा यदि महत्वपूर्ण परिवर्ती एक समान हो तो किसी एक में नए परिवर्ती के समावेशन के उपरांत दोनों स्थितियों के मध्य होने वाले किसी भी अन्तर का कारण नया परिवर्ती हो सकता है। यह एकमात्र महत्वपूर्ण प्रभावी परिवर्ती का नियम कहा जाता है।


2) बदलाव-

परिवर्ती में बदलाव करना परीक्षणात्मक शोध का एक और विभेदी गुण है। इसका तात्पर्य शोधकर्ता द्वारा सचेतन किए जाने वाले प्रचालन से है। विवरणात्मक शोध के विपरीत शोधकर्ता केवल उन स्थितियों को उस रूप में देखता है जिसमें वे प्राकृतिक रूप से होती हैं। परीक्षणात्मक शोध में शोधकर्ता वास्तव में उन कारकों के घटित होने के लिए स्थिति का निर्माण करता है जिनके प्रदर्शन का अध्ययन उन स्थितियों में किया जाता है जिसमें सभी दूसरे सभी कारकों को नियंत्रित अथवा दूर कर दिया जाता है। सामाजिक शोध और अन्य व्यवहारगत विज्ञानों में परिवर्ती में बदलाव एक विशिष्ट रूप में होता है जिसमें परीक्षणाकर्ता विषय/व्यक्ति पर विभिन्न परिस्थितियों के पहले निर्धारित सेट को नियोजित करता है। विभिन्न स्थितियों का ये सेट स्वतंत्र परिवर्ती परीक्षणात्मक परिवर्ती अथवा उपचार परिवर्ती कहा जाता है। फिर आश्रित परिवर्ती के दो अथवा उससे अधिक मूल्यों को प्रदर्शित करने के लिए विभिन्न स्थितियों का निर्माण किया जाता हैं। ये मात्रा अथवा प्रकार में अलग हो सकते हैं अर्थात स्वतंत्र परिवर्ती के दो अथवा उससे ज्यादा मूल्य हो सकते हैं और मूल्यों में मात्रात्मक अथवा गुणात्मक प्रकृति का अंतर हो सकता है। 

व्यक्तित्व के गुण, शिक्षण की विधियाँ, सोच, प्रेरणा के प्रकार, सामाजिक आर्थिक स्तर आदि सामाजिक शोध में स्वतंत्र परिवर्ती के कुछ उदाहरण है। 


3) प्रेक्षण- 

परीक्षण में, हमारी रुचि आश्रित परिवर्ती पर स्वतंत्र परिवर्ती की बदलाव के प्रभाव में हो सकती है। प्रेक्षणों को शोध में प्रयुक्त विषय के व्यवहार के कुछ गुणों के रूप में समझा जाता है। ये प्रेक्षण मात्रात्मक प्रकृति के होते हैं और आश्रित परिवर्ती बनाते है। इसके लिए कुछ स्पष्टीकरण की जरूरत पड़ती है।